Thursday, April 25, 2024
- Advertisement -
Homeसंवाददुष्प्रचार है ‘द केरला स्टोरी’

दुष्प्रचार है ‘द केरला स्टोरी’

- Advertisement -

Samvad 1


Ram puniyani‘द केरला स्टोरी’ दुष्प्रचार केरल का नाम सुनते ही हमारे मन में उभरता है एक ऐसा राज्य जहां शांति और सद्भाव का राज है, जहां निरक्षता का निर्मूलन हो चुका है, जहां शिक्षा एवं स्वास्थ्य सूचकांक बहुत अच्छे हैं, और जहां कोविड-19 महामारी का मुकाबला सर्वोत्तम तरीके से किया गया। हमें यह भी याद आता है कि राज्य में ईसाई धर्म का आगमन 52 ईस्वी में संत सेबेस्टियन के जरिए हुआ और सातवीं सदी में इस्लाम यहां अरब व्यापारियों के माध्यम से आया। इस सबके विपरीत फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ (टीकेएस) का टीजर और प्रोमो इसे एक ऐसे राज्य के रूप में दर्शाते हैं, जहां लोगों को मुसलमान बनाया जा रहा है, हिंदू लड़कियों व महिलाओं को जबरदस्ती इस्लामिक स्टेट में विभिन्न भूमिकाएं निभाने के लिए मजबूर किया जा रहा है और उन्हें सीरिया, लेबनान आदि भेजा जा रहा है।

टीकेएस में दावा किया गया है कि आईएस द्वारा 32,000 हिन्दू लड़कियों का धर्मपरिवर्तन करवाया गया है। कम से कम इतना तो कहा ही जा सकता है कि इस आंकड़े का स्त्रोत संदिग्ध है। आदिल रशीद द्वारा इंस्टीट्यूट आॅफ डिफेन्स स्टडीज एंड एनालेसिस (आईडीएसए) के लिए तैयार किए गए एक शोधपत्र ‘वाय फ्यूअर इंडियन्स है व ज्वाइंड आईएसआईएस’ के अनुसार ‘दुनिया भर से लगभग 40,000 लोग आईएसआईएस में शामिल हुए हैं।

भारत से सौ से भी कम लोग आईएसआईएस के प्रभाव वाले सीरिया और अफगानिस्तान के इलाकों में गए और लगभग 155 को आईएसआईएस से उनके संबंधों के कारण गिरफ्तार किया गया। वर्ल्ड पाप्युलेशन रिव्यू के दुनिया भर से आईएसआईएस में हुई भर्ती संबंधी आकड़ों से पता चलता है कि जिन देशों से बड़ी संख्या में लोग आईएसआईएस में शामिल हुए वे हैं ईराक, अफगानिस्तान, रूस, ट्यूनिशिया, जार्डन, सउदी अरब, तुर्की एवं फ्रांस आदि।

सबसे अधिक भर्तियां मध्यपूर्व से हुर्इं और उसके बाद यूरोप से। आईएसआईएस में शामिल हुए भारतीयों की संख्या बहुत कम है। केरल की धर्मांतरित महिलाओं के आईएसआईएस में शामिल होने संबंधी दावे कोरी बकवास हैं।’ केरल में धर्मांतरण की स्थिति पर कई अलग-अलग बातें कही गर्इं हैं। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओम्मन चांडी ने राज्य विधानसभा में 2006 से लेकर 2012 तक के धर्मांतरण संबंधी विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए थे।

उन्होंने बताया था कि ‘2006 से लेकर 2012 तक कुल 7,713 व्यक्तियों ने धर्मपरिवर्तन कर इस्लाम ग्रहण किया जबकि 2,803 धर्म परिवर्तित कर हिंदू बन गए।’ यह दिलचस्प है कि उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म ग्रहण करने वालों के संबंध में कोई आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि ‘जिन लोगों ने 2009-12 के बीच इस्लाम अपनाया उनमें से 2,667 युवा महिलाएं थीं, जिनमें से 2,195 हिंदू और 492 ईसाई थीं।’ उन्होंने कहा कि किसी का भी जबरदस्ती धर्म परिवर्तन नहीं हुआ है। लव जिहाद (हिंदू लड़कियों को मुसलमान बनाना) के नाम पर जुनून पैदा करने का काम केरल से शुरू हुआ था।

हम सब जानते हैं कि सांप्रदायिक ताकतों को अपनी जड़ें जमाने के लिए विघटनकारी और भावनात्मक मुद्दों की सख्त जरूरत होती है। अब चूंकि केरल में राम मंदिर और पवित्र गाय जैसे मुद्दों पर लोगों को भड़काना संभव नहीं था इसलिए झूठ और अर्धसत्यों को अनेक तरीकों से समाज में फैलाने में माहिर तंत्र ने लव जिहाद की काल्पनिक कथा गढ़ ली।

चांडी ने यह भी कहा था, ‘हम जबरदस्ती धर्म परिवर्तन नहीं होने देंगे और ना ही हम लव जिहाद के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने के अभियान को चलने देंगे’। राज्य के विभिन्न शहरों के पुलिस आयुक्तों द्वारा की गई जांच में यह सामने आया कि हिंदू और ईसाई लड़कियों को बहला-फुसलाकर मुसलमान बनाने का कोई संगठित और सुनियोजित प्रयास नहीं हो रहा है।

परंतु भाजपा ने इस मुद्दे को लपक लिया। लव जिहाद भले ही कहीं नहीं हो रहा हो परंतु 11 राज्यों में लव जिहाद के खिलाफ कानून बन चुके हैं। हाल में महाराष्ट्र में सकल हिंदू समाज नामक संगठन ने इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन किया। लव जिहाद हिंदू समुदाय के लिए खतरा है, इस झूठ को इतनी बार दुहराया गया है कि वह मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत भड़काने का हथियार बन गया है।

लव जिहाद हो रहा है या लव जिहाद जैसी कोई चीज है इसका कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए एक प्रश्न के 11 नवंबर 2020 को दिए गए उत्तर में राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि वह लव जिहाद के संबंध में कोई आंकड़े नहीं रखता। ‘लव जिहाद से संबंधित शिकायतों की कोई अलग श्रेणी नहीं है और ऐसे कोई आंकड़े आयोग द्वारा संधारित नहीं किए जाते।’

केरल की सत्ताधारी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी एवं इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग इस फिल्म के प्रदर्शन के खिलाफ हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलेगी। राज्य के मुख्यमंत्री पिनयारी विजयन ने कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता का धार्मिक आधार पर समाज को बांटने के लिए दुरूपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

इस फिल्म के प्रदर्शन के खतरनाक नतीजों को भांपते हुए केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्वीट कर कहा था कि ऐसे व्यक्ति को एक करोड़ रुपए का इनाम दिया जाएगा जो यह साबित कर सके कि 32,000 लड़कियां काल्पनिक लव जिहाद की शिकार हुई हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि शुद्ध झूठ पर आधारित इस फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि बाद में फिल्म के निर्माता ने माना कि ये फिल्म तीन लड़कियों की कहानी पर आधारित है।

अभी कुछ ही समय पहले सर्वोच्च न्यायालय ने अपने सर्वश्रेष्ठ निर्णयों में से एक में कहा है कि नफरत फैलाने वाले भाषणों का राज्य सरकारों को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए और यदि वे ऐसा नहीं करतीं तो इसे न्यायालय की अवमानना समझा जाएगा।

न्यायालय को एक कदम और आगे बढ़कर यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए कि कलात्मक स्वतंत्रता के नाम पर प्रचार फिल्मों पर रोक लगाई जानी चाहिए या कम से कम सेंसर बोर्ड को यह जांच करनी चाहिए कि फिल्म को जिन तथ्यों या आंकड़ों पर आधारित बताया जा रहा है वे कितने प्रामाणिक हैं। (अंग्रेजी से रूपांतरण अमरीश हरदेनिया)


janwani address 221

What’s your Reaction?
+1
0
+1
2
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
+1
0
- Advertisement -

Recent Comments