- आम दिनों में आठ रुपये में बिकने वाला झंडा बिक रहा 30 रुपये में
- दुकानों पर उमड़ रही भीड़ से व्यापारियों ने बढ़ाए बेहिसाब दाम
- झंडे के साथ मुफ्त में मिलने वाली डंडी बिक रही तीन रुपये में
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सुभाष नगर निवासी नत्थे सिंह ने आजाद भारत का पहला तिरंगा बनाया था। उस समय नत्थे सिंह की उम्र लगभग 22 वर्ष थी। उन्होंने तब से तिरंगा झंडा बनाने के काम को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया था। नत्थे के साथ उनका परिवार भी तिरंगा बनाने के काम में जुट गया है।
2019 में नत्थे सिंह इसी राष्ट्रभक्ति के कार्य को करते हुए दुनिया से चले गए थे। आज अगर वो होते तो देखते कि किस तरह तिरंगा बेचने के लिये दुकानदारों ने मनमाने दाम लगाने शुरु कर दिये हैं। जो तिरंगा वो एक महीने पहले आठ रुपये में बेच रहे थे, वही तिरंगा 25 रुपये से लेकर तीस रुपये बेचते समय ग्राहक पर अहसान दर्शा रहे हैं।

आजादी के 75वीं वर्षगांठ पर मनाये जा रहे अमृत महोत्सव को लेकर प्रदेश भर में हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। इस कारण तिरंगे की डिमांड हद से ज्यादा बढ़ गई है। स्कूल, कालेज, सरकारी और प्राइवेट संस्थाओं के अलावा एनजीओ और व्यक्तिगत रूप से लोग अपने मौहल्लों में तिरंगा लगाने के लिये दुकानों में दिखाई दे रहे हैं। इस वक्त तिरंगे की डिमांड काफी अधिक हो गई है।
मेरठ में मुख्य रूप से गुलमर्ग सिनेमा से लेकर इंदिरा चौक की तीन दुकानों पर तिरंगा लेने वाले खूब आ रहे हैं। इन दुकानदारों ने एक सिस्टम बना रखा है। रोज तिरंगे के दाम में एक से दो रुपये की वृद्धि कर देते है। जो तिरंगा 20 बाई 30 का आठ रुपये में मिला करता था,
आज वही झंडा तीनों दुकानों में अलग-अलग रेटस पर मिल रहा है। एक दुकानदार 30 रुपये में झंडा और तीन रुपये में डंडी दे रहा है तो बगल वाला दुकानदार 26 रुपये और तीसरा दुकानदार वही झंडा 28 रुपये में दे रहा है। इसके अलावा तीन रुपये में डंडी लेनी होगी।
शॉटन और खादी के तिरंगों की अधिक मांग
इस वक्त शॉटन और खादी के तिरंगों की मांग ज्यादा है। तिरंगों की मांग को पूरा करने के लिये मुख्य विकास अधिकारी शशांक चौधरी ने जिला कारागार के बंदियों से 10 हजार झंडे बनवाये हैं। गांधी आश्रम में भी झंडे बन रहे हैं। तिरंगा बेचने वाले व्यापारियों की हालत यह हो गई है कि हर घर तिरंगा को लेकर दीवाने हो रहे लोगोंं की भावनाओं को देखते हुए मनमाने दाम लगा रहे है। पहले लोग एक दो झंडे खरीदने आते थे, लेकिन अब सौ से लेकर दो हजार झंडों के आर्डर दिये जा रहे हैं।
दुकानदार उठा रहे फायदा
इसका सीधा फायदा दुकानदारों को मिल रहा है और इस कारण दिन भर ग्राहकों के साथ इनकी गर्मागर्म बहस भी हो रही है। इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हर घर तिरंगा का आह्वान दुकानदारों की किस्मत बदलने में लगा हुआ है वहीं देशभक्ति का जज्बा लिये लोगों की जेबें खाली कर रहा है।
तिरंगा बनाने का जोरों पर चल रहा काम
तिरंगा बनाने का काम जोरों पर चल रहा है। इससे झंडा बनाने वाले लोगों का रोजगार काफी बढ़ गया है। इतना नहीं अब तो झंडा बनाने वाले ठेकेदारों को कारीगर मिलना भी मुश्किल हो गए हैं, क्योंकि झंडे की डिमांड ज्यादा है और बनाने वाले कारीगरों की संख्या बहुत कम है। इसका फायदा वो दुकानदार ज्यादा उठा रहे हैं जिनके पास पुराना स्टाक रखा हुआ है। जब से प्लास्टिक के तिरंगों पर प्रतिबंध लगा है और पूरी रात तिरंगा फहराने के आदेश हुए हैं। तब से लोग ज्यादा से ज्यादा तिरंगा खरीदने के लिये भागदौड़ करने में लगे हुए हैं।

