
शिरीश खरे की पहली पुस्तक पढ़ी थी ‘एक देश बारह दुनिया’। इसमें एक ही देश में रहने वाली बारह दुनियाओं (वंचितों की) का शिरीष ने चौंकाने वाला चित्रण किया था। यह किताब भरपूर चर्चित और प्रशंसित हुई। अब उनकी दूसरी किताब आई है ‘नदी सिंदूरी’ (राजपाल एंड संस)। इसे शिरीष कहानी संग्रह बताते हैं। हालांकि कहीं-कहीं इस संग्रह के लिए संस्मरण शब्द का भी इस्तेमाल हो रहा। यह भी सच है पिछले कुछ वर्षों में कहानी और संस्मरण के बीच की दूरी कम हुई है। इन कहानियों को पढ़ते समय कहीं-कहीं ये कहानियां स्मृतियां सी भी जान पड़ती हैं। शिरीष ने भूमिका में यह स्वीकार भी किया है।