- रखरखाव का अभाव और विभागीय लापरवाही कारण
- 2019-20 में नहर पटरी, गांधी उपवन में रोपे थे 8800 पौधे
- रखरखाव का अभाव और आवारा पशुओं ने कर दिए नष्ट
जनवाणी ब्यूरो |
शामली: पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग एक जुलाई से सात जुलाई के मध्य वन महोत्सव मनाने जा रहा है। इसके लिए जनपद के 27 विभागों को 12 लाख, 35 हजार, 356 पौधे रोपण का लक्ष्य दिया गया है। विभागों ने लक्ष्य पूरा करने के लिए अभी से तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। शासन के निर्देश पर जनपद में लक्ष्य के सापेक्ष पौधारोपण तो कर दिया जाता है लेकिन उसके बाद पौधों का रखरखाव नहीं किया जाता है। जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण नवीन विकास भवन के पास स्थित गांधी उपवन में देखा जा सकता है। वर्ष 2019-20 में पूर्वी युमना नहर पटरी एवं गांधी उपवन समेत 08 हैक्टेयर में 8 हजार 800 पौधे रोपित किए गए थे, लेकिन देखभाल के आभाव में हजारों पौधे दम तोड़ चुके हैं।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2019-20 में अगस्त माह में वृक्षारोपण महाकुंभ अभियान में 22 करोड़ पौधे एक ही दिन में रोपकर वर्ल्ड रिकार्ड कायम किया था। वृक्षारोपण महाकुंभ अभियान के तहत उसी दौरान जनपद शामली में 08 हैक्टेयर क्षेत्रफल में पूर्वी यमुना नहर पटरी, नवीन विकास भवन के समीप गांधी उपवन की नींव रखते हुए उसमें 08 हजार 800 पौधे रोपे गए थे। इन पौधों के रखरखाव का नैतिक और विभागीय दायित्व पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग यानी वन विभाग का बनता था लेकिन विभाग पौधारोपण के बाद अपने दायित्व को भूल गया।
देखरेख और रखरखाव के अभाव में हजारों की संख्या में पौधे नष्ट हो चुके हैं। आवारा पशुओं ने भी बड़ी संख्या में पौधों को बर्बाद कर दिया। आज स्थिति ऐसी है कि अगर ट्री गार्ड है तो उसमें पौधा नहीं है और पौधा है तो फिर ट्री गार्ड का कोई अता-पता नहीं है। हालांकि वन विभाग नष्ट हुए कुछ पौधों के स्थान पर दोबारा पौधारोपण का दावा किया है। लेकिन पौधों की देखरेख और रखरखाव के सवाल पर विभागीय अधिकारी बजट का रोना रोते हैं। हालांकि पर्यावरण सुरक्षा के लिए पौधे रोपण जितना महत्वपूर्ण है, उससे अधिक महत्वपूर्ण उनकी देखभाल और रखरखाव करना है।
डीएफओ कहिन——————————–

प्रभागीय वन अधिकारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि वर्षा काल में पूर्वी यमुना नहर के किनारे आठ हैक्टेयर का पौधारोपण किया गया था। जिसमें नवीन विकास भवन के पास गांधी उपवन समेत 8800 पौधें लगाए थे, गांधी उपवन में अधिक रकबा नहीं था, गांधी उपवन भी 8800 पौधों में समाहित था। उन्होंने कहा कि पौधों के रखरखाव के वाचक रखा जाता है, जो पौधे सूख, मर जाते हैं उनके स्थान पर दूसरे पौधे लगाए जाते हैं। विभागीय कर्मचारी भी नियमित रूप से गश्त करते हैं।

