Saturday, May 25, 2024
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पैसे खर्च करने में अव्वल, रैंकिंग में फिसड्डी

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  • देश के स्वच्छ सर्वेक्षण में निगम को मिला 108वां स्थान
  • सफाई व्यवस्था के नाम पर निगम का खजाना खाली
  • स्वच्छ सर्वेक्षण में गत वर्षों में लगातार गिरती जा रही नगर निगम की रैंकिंग

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: केंद्र सरकार द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 की गुरुवार को घोषणा कर दी। जिसमें नगर निगम को स्वच्छता की इस रैंकिंग में 108वां स्थान मिला। वहीं, प्रदेश के 61 शहरों में 17वां स्थान मिला, जबकि पिछले वर्ष प्रदेश में दूसरा स्थान मिला था। इस बार इतनी खराब रैंकिंग को लेकर शहर के प्रथम नागरिक महापौर ने भी दुख जताया।

केंद्र सरकार ने गुरुवार को स्वच्छ सर्वेक्षण का परिणाम घोषित कर दिया। स्वच्छ सर्वेक्षण में इंदौर को जहां एक तरफ लगातार सातवीं बार प्रथम स्थान मिला। प्रदेश में नोएडा को प्रथम व गाजियाबाद नगर निगम को द्वितीय स्थान मिला। नगर निगम 10 लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में शामिल होने के साथ ही केंद्र के स्वच्छ सर्वेक्षण परिणाम में 108वां एवं प्रदेश में 17वां स्थान मिला। जोकि प्रदेश में गत वर्ष दूसरा स्थान मिला था।

इस स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर की सफाई व्यवस्था एवं कूड़ा निस्तारण समेत कई बिंदुओं पर जांच टीम द्वारा अंक प्रदान किये जाते हैं। नगर निगम द्वारा सफाई व्यवस्था के लिए खरीदे गये वाहन एवं डिपो से डीजल खर्च एवं कूड़ा निस्तारण पर करोड़ों रुपये खर्च कर निगम का खजाना खाली किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर सफाई व्यवस्था को लेकर सड़कों पर पसरी गंदगी एवं चोक नालों की दशा देखकर हालत लगतार खराब होते जा रहे हैं।

जोकि स्वच्छ सर्वेक्षण के गुरुवार को जो परिणाम घोषित हुआ उससे शहर की सफाई व्यवस्था कितनी खराब है। उसकी पोल खोलने के लिये इससे बडेÞ और किस परिणाम की अपेक्षा की जा सकती है। नगर निगम में ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब पार्षद या सफाई कर्मचारी सफाई मुद्दे को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप न लगाते हों। उधर, नगरायुक्त एवं प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा आरोप प्रत्यारोपों की जांच के नाम पर सफाई कर्मचारियों के अनुपस्थित मिलने पर उनके वेतन में कटौती कर निगम के खजाने में राजस्व तो बढ़ाया जाता है,

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लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था किस तरह से बेहतर बनाई जाये उसके लिये कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। महापौर हरिकांत अहलूवालिया को भी शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर लगातार नगर निगम के अधिकारियों से दो-चार होते देखा गया है, लेकिन उसके बावजूद हालात जस के तस बने हुये हैं।

कूड़ा कलेक्शन से लेकर निस्तारण तक खामियां

नगर निगम के अधिकारियों द्वारा नगर निगम के खजाने से शहर की सफाई व्यवस्था पर जहां एक तरफ करोड़ों रुपये खर्च का खजाना खाली किया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर जो रुपये सफाई व्यवस्था पर खर्च किया जा रहा है। उससे शहर की सफाई व्यवस्था कितनी सुधरी उस पर शायद फोकस नहीं किया जा रहा है। तभी तो गत वर्षों की अपेक्षा इस बार सफाई व्यवस्था के लिये बजट बढ़ाया गया और खर्च भी किया गया, ल्ेकिन स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार नगर निगम फिसड्डी होता जा रहा है।

डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन से लेकर निस्तारण तक कितनी अव्यवस्था फैली है। जिसमें बीवीजी कंपनी को घरों से सूखा व गीला कूड़ा अलग-अलग कलेक्शन के लिये टेंडर दिया गया है। वहीं, उसके निस्तारण के लिये लोहिया नगर के कूड़ा निस्तारण को चिन्हित किया गया है, लेकिन न तो सूखा व गीला कूड़ा अलग-अलग एकत्रित किया जाता है। न ही शहर के कूडेÞ को कूड़ा निस्तारण प्लांट तक पहुंचाया जाता है। जिसमें खामियां ही खामियां हैं।

स्वच्छ सर्वेक्षण में कौन-सी मिली रैंकिंग

उत्तर प्रदेश के 61 शहरों में पश्चिमी यूपी के नोएडा को सबसे अच्छे शहर के रूप में स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान में पहली बार चुना गया। इसमेें यदि पश्चिमी यूपी के 10 शहरों को देखा जाये तो नगर निगम मेरठ टॉपटेन की सूची से भी बाहर हो गई है। जिसमें नगर निगम को केंद्र में 108 व प्रदेश में 17वीं रैंकिंग मिली है।

शहर का नाम                                   केंद्र की रैंकिंग                                  प्रदेश की रैंकिंग

नोएडा                                                14वीं                                               प्रथम

गाजियाबाद                                           38वीं                                               द्वितीय

सहारनपुर                                             76वीं                                               10वीं

मेरठ                                                   108वीं                                             17वीं

सहारनपुर पालिका                                     181वीं                                            31वीं

मुजफ्फरनगर                                           202वीं                                            35वीं

हापुड़                                                    203वीं                                            36वीं

बागपत                                                  224वीं                                            45वीं

बुलंदशहर                                               225वीं                                            46वीं

मोदीनगर                                                231वीं                                           48वीं

लोनी                                                      232वीं                                           49वीं

मुजफ्फरनगर पालिका                                    264वीं                                          56वीं

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