Tuesday, March 24, 2026
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दुखद: बालक आया चाइनीज मांझे की चपेट में

  • भूमिया के पुल पर छात्र के गले में मांझा फंसा
  • पुलिस के दावे खोखले, खूब बिक रहा चाइनीज मांझा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चाइनीज मांझे से मोह तोड़ पाने में न तो पुलिस की कोई रुचि हैं और न पतंगबाजों को। हालात यह है कि पुलिस भले खानापूर्ति करके अभियान चला रही हो और दो चार दर्जन मांझे की चरखी बरामद की हो, लेकिन जब तक यह सामाजिक बुराई बनकर सामने नहंी आएगी तब तक मांझे पर रोक लगना असंभव है।

26 जनवरी को बसंत पंचमी है और लोग अभी से मांझे का स्टाक बनाना शुरु कर दिया है। ताजा घटनाक्रम में भूमिया से इन्द्रप्रस्थ अस्पताल के आगे चाइनीज मांझा और 12 साल के बच्चे के गर्दन में फंस गया। मामूली जख्म बनने से पहले छात्र सादिक ने शोर मचाया तो लोगों ने गर्दन से मांझा निकाला और उसको प्राथमिक उपचार दिलवाया।

पुलिस की मिलीभगत से बाजारों में चीनी मांझा तेजी से बिक रहा है और पुलिस पूरी तरह से नजरअंदाज कर रही है। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद पुलिस अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नही की है। यही कारण है कि बुधवार को भी लोग चाइनीज मांझा खरीदते हुए देखे गए। कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं तो कई लोग घायल हो चुके हैं। पुलिस चीनी मांझे की बिक्री रोकने के लिए बार-बार अभियान चला रही है।

पछले छह महीने में चीनी मांझे की चपेट में आने से 20 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। चीनी मांझा बेचने वालों के खिलाफ पुलिस द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं होने पर यह जानलेवा मांझा लगातार बाजारों में बेचा जा रहा है। हालांकि, पिछले महीने कबाड़ी बाजार में अर्जुन का हाथ मांझे से कट गया था।

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पिछले महीने पुलिस ने मांझा बेचने वालों के खिलाफ अभियान चलाया था। इसमें देहलीगेट, लिसाड़ीगेट और कोतवाली पुलिस ने दो दर्जन से अधिक मांझे की चरखियां बरामद की थी। पुलिस ने कई लोगों को पकड़ा और पैसा लेकर छोड़ दिया था। शुक्रवार को गोलाकुआं, खैरनगर और मोहल्लों की दुकानों में चाइनीज मांझा छुपाकर बेचा जा रहा है।

पहले भी हुए हादसे

टीपीनगर थाना क्षेत्र के सरस्वती विहार कॉलोनी के रहने वाले निर्मल (42) पुत्र ओमप्रकाश राज मिस्त्री का काम करता था। निर्मल स्कूटी पर सवार होकर घर लौट रहा था। रोहटा रोड स्थित जवाहर नगर के पास पहुंचते ही निर्मल चाइनीज मांझे की चपेट में आ गया। जिस कारण उसकी गर्दन पूरी तरह कट गई। जिससे उसकी मौत हो गई थी। जिस वक्त उसे उपचार के लिये उठाया गया मांझा उसकी गर्दन में फंसा हुआ था।

मोदीपुरम क्षेत्र में रुड़की रोड पर 23 सितंबर 2022 को मुजफ्फरनगर खतौली के रसूलपुर निवासी अजय की चाइनीज मांझे की चपेट में आने से मौत हो गई थी। लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के ढवाई नगर गली नंबर चार निवासी वाजिद की घर में ही पावरलूम फैक्ट्री है। वह बाइक से किसी काम से हापुड़ अड्डा चौराहे की ओर जा रहे थे। जैसे ही ग्रीन हास्पिटल के पास पहुंचे तो चाइनीज मांझा उनकी गर्दन में लिपट गया और गर्दन कट गई।

चिकित्सकों ने 18 टांके लगाए। पूठ गांव निवासी गौरव पुत्र शेर सिंह किसी काम से बाइक से मेरठ आया था। वह छावनी क्षेत्र के के पास से गुजर रहा था, तभी अचानक चाइनीज मांझा उसकी गर्दन से लिपट गया, इससे पहले की वह कुछ समझ पाता चाइनीज माझें ने उसकी गर्दन काट दी।

सुखद शुरुआत: सीएबी स्कूल से हुई मांझा त्यागो अभियान शुरू

एनवायरमेंट क्लब द्वारा वन विभाग मेरठ के सहयोग से चलाए जा रहे मांझा त्यागो अभियान के तहत सीएबी इंटर कॉलेज में शुक्रवार को एक जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें छात्रों को मांझे से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक व शिक्षित किया गया। इस अवसर पर क्लब संस्थापक सावन कनौजिया ने पीपीटी के माध्यम से छात्रों को दिखाया कि कैसे मांझा मासूम पक्षियों और मनुष्य की जान ले रहा है। क्लब के द्वारा पिछले वर्ष बनाई गई मौत का मांझा फिल्म भी छात्रों को दिखाई गई, जिसके माध्यम से सभी को पतंग उड़ाने में मांझा प्रयोग ना करने का आह्वान किया गया।

इस अवसर पर प्रधानाचार्य नरेंद्र यादव द्वारा बच्चों को सामाजिक कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया। अंत में क्लब द्वारा छात्रों को मांझा त्यागने की शपथ ग्रहण कराई गई। सेमिनार में वन विभाग से रीना चौधरी, संगीता, एनसीसी अधिकारी विजयपाल, विधि, हर्ष राय, आशीष बिष्ट, शिवांगी, अंकित, अजय, हरमेश, दिव्यांशी, रचित, याशिका, सुरभि, अमराह, सुहानी आदि मौजूद रहे।

एसएसबी के जवान की नेपाल बॉर्डर पर हार्ट अटैक से मौत

मेरठ: इंडो-नेपाल सीमा के रक्सौल बॉर्डर पर तैनात एसएसबी के जवान की शुक्रवार को हार्ट अटैक से मौत हो गई। मरने वाला जवान सुदेश जानी आईसीपी की सुरक्षा में तैनात थे। जवान सुदेश मेरठ के अफजलपुर पावटी के मूल निवासी हैं। 5 साल पहले सुदेश एसएसबी में भर्ती हुआ था। सुदेश के परिजन को जब इसकी खबर मिली तो परिवार में कोहराम मच गया।

सुदेश के चाचा रामवीर सिंह ने बताया कि इस हादसे की सूचना उनसे उन्हें मिली। सुदेश के बड़े भाई सुभाष के पास फोन आया था। शनिवार को सुदेश का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचेगा। बताया गया कि 12 जनवरी की रात में अचानक ड्यूटी के दौरान ही सुदेश को हार्ट अटैक आया। अस्पताल ले जाने से पहले ही रास्ते में सुदेश ने दम तोड़ दिया। ड्यूटी के दौरान सुदेश की मौत की पुष्टि जिला प्रशासन ने भी की है।

सुदेश की मृत्यु के बाद गांव के लोग शोक में डूब गए हैं तथा परिवार में कोहराम मचा है। बताया गया है कि सुदेश के चार भाई हैं, उनके बड़े भाई सुभाष है, जो इलेक्ट्रिक दुकान चलाते हैं। सुदेश दूसरे नंबर का है तथा छोटा भाई संजय हैं, जोकि रेलवे में तैनात है। सबसे छोटा भाई कमल सीआईएसएफ में तैनात है। परिजनों ने बताया कि शनिवार को सुदेश के पार्थिव शरीर को एसएसबी की टीम लेकर उनके गांव में आएगी।

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