- जाटों के नाम पर गैर बिरादरियों को साधने की जुगत में भाजपा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट राग अलाप कर भाजपा ने अपनी चुनावी बिसात बिछा दी है। इस समय यहां की राजनीति पूरी तरह जाट मतदाताओं पर केन्द्रित हो गई है। इसके पीछे भाजपा के चाणक्य ने एक सधी हुई चाल चली है, जिससे वेस्ट यूपी में चुनावी लड़ाई को जाट बनाम नॉन जाट बनाने की कोशिश की गई है। भाजपा के राष्ट्रीय नेता जाट बहुल क्षेत्र में जाटों के नाम पर गैर बिरादरियों के वोटों को साधने की जुगत में लगे हैं। यही वजह है, जो वेस्ट यूपी से दिल्ली तक जाट-जाट अलापा जा रहा है।
विधानसभा के पहले चरण का चुनाव वेस्ट यूपी की जिन 58 सीटों पर है, वहां जाट मतदाताओं की अपनी एक बड़ी ताकत है। इसी ताकत के दम पर यूपी से दिल्ली तक जाट नेताओं ने अपनी चौधराहट देश की राजनीति में स्थापित की है। जाट बहुल इस क्षेत्र में इस बिरादरी के वोटों के दम पर ही भाजपा 2014 के लोकसभा, 2017 के विधानसभा और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष पर बड़ी जीत हासिल कर चुकी है। इस बार किसान आंदोलन के चलते किसान मतदाताओं में भाजपा को लेकर नाराजगी पनपी है।
भाजपा वोटरों की इस नाराजगी को अभी तक दूर करने में नाकाम दिख रही है। भाजपा के चाणक्य ने किसानों के आंदोलन से हो रहे डैमेज को वेस्ट में कंट्रोल करने के लिए चुनाव को जाट बनाम गैर जाट की लड़ाई में बदलने के प्रयास प्रारंभ कर दिए है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व का प्रयास है कि जाटों के नाम पर वह गैर जाट बिरादरी के मतों का पार्टी के पक्ष में ध्रुवीकरण हो जाए। अपनी इस मुहिम में भाजपा कितनी कामयाब होती है, यह तो समय बताएगा, मगर इतना जरुर है कि भाजपा की इस सधी हुई चाल ने विपक्षी दलों को अपनी रणनीति पर फिर से सोचने को मजबूर कर दिया है। जाट नेताओं के साथ गृह मंत्री अमित शाह की दिल्ली में बैठक ने वेस्ट यूपी की सियासत में हलचल तेज कर दी है।
रालोद-सपा गठबंधन का प्रयास जहां जाटों को साधे रखना है, वहीं भाजपा जाट-जाट खेलकर इस बेल्ट में गैर जाट मतदाताओं को अपने पाले में लाने की जुगत में शिद्दत से जुट गई है।
मिहिर भोज के अपमान पर गुर्जर हो रहे एकजुट
जाट ही नहीं, बल्कि गुर्जर समाज के लोग भी भाजपा से खफा चल रहे हैं। जाटों के बाद यदि देखा जाए तो वेस्ट यूपी में गुर्जर समाज भी बड़ी अहमियत रखता हैं। गाजियाबाद के दादरी में मिहिर भोज के अपमान के मामले को गुर्जर समाज प्रतिष्ठा से जोड़कर चल रहा हैं।
इसको लेकर पिछले दिनों अवतार भड़ाना ने भी बयान देकर गुर्जर समाज द्वारा भाजपा को मुंह तोड़ जवाब देने का ऐलान किया था। गुर्जर गांव स्तर पर मिहिर भोज के अपमान के मामले को लेकर खफा हैं, इसको भाजपा के खिलाफ विरोधी दल हवा भी खूब दे रहे हैं, ताकि गुर्जर, जाट और मुस्लिम एकजुट हो जाए। यदि ये तीनों जातियां एकजुट हुई तो भाजपा को भारी नुकसान की संभावनाएं बनी हुई हैं।

