
यूरोपीय यूनियन के अनेक राष्ट्रों ने प्रारम्भ में भारत से बड़ी कूटनीतिक उम्मीद लगाई थी कि भारत वस्तुत: यूक्रेन युद्ध का समुचित निदान निकालने के लिए कोई सार्थक कूटनीतिक पहल अंजाम देगा। इस उम्मीद का सबसे अहम प्रस्थान बिंदु रहा कि भारत के रूस के साथ अत्यंत मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं और दूसरी तरफ नॉटो राष्ट्रों के साथ भी भारत के मधुर कूटीतिक संबंध कायम रहे हैं। अत: भारत को एकमात्र ऐसा देश समझा गया, जोकि विश्व पटल पर किसी सैन्य गुटबंदी में कभी शामिल नहीं रहा। दुर्भाग्य से यूक्रेन युद्ध पर भारत द्वारा केवल शांति और सौहार्द का पैगाम तो दिया जाता रहा, किंतु भारत द्वारा यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की खातिर कोई कारगर कूटनीतिक पहल कदापि अंजाम नहीं दी गई। भारत को विश्वगुरु बन जाने का ख्वाब दिखाने वाली नेरेंद्र मोदी हुकूमत, वस्तुत: यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने की कोई कूटनीतिक पहल करने की हिम्मत तक नहीं जुटा सकी।