Thursday, March 19, 2026
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बढ़ा वेस्ट का राजनीतिक तापमान, किसानों की नब्ज टटोल गईं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी

  • पांच दिन में क्रांतिधरा पर भाजपा की दूसरी किसान सभा

रामबोल तोमर |

मेरठ: दिल्ली के सिंधु बॉर्डर पर सर्द माहौल में किसानों का 22 दिन से चल रहे धरने ने अचानक सर्द ऋतु में राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। किसान बैल्ट वेस्ट यूपी में शीतलहर चल रही है, लेकिन ठिठुरन भरे इस मौसम में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब पांच दिन के भीतर मेरठ व बरेली में दो बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किसानों की सभा कर चुके हैं।

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वहीं केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी किसानों की नब्ज टटोलने के लिए पहुंच गई। कड़ाके की ठंड के बीच अचानक भाजपा को किसानों की याद सताने लगी है। दरअसल, जिस तरह से किसान राजनीति हाशिये पर पहुंच गई थी, दिल्ली में चल रहे किसानों के धरने ने सत्ता का रुख फिर से किसानों की तरफ कर दिया है। वेस्ट यूपी में किसान बड़ी ताकत है।

यहां पर गन्ने की राजनीति रही है, लेकिन भाकियू ने दिल्ली के धरने में भागीदारी कर भाजपा की नींद उठा दी है। कृषि बिल को लेकर देश भर का किसान एकजुट हो रहा है। इसमें दो राय नहीं है। किसानों की एकजुटता ने भाजपा शीर्ष नेताओं को दुविधा में डाल दिया है। क्योंकि भाजपा नेताओं ने अब रणनीति यह बनाई है कि कृषि बिल के मुद्दे पर किसानों को बांट दिया जाए।

इसी वजह से भाजपा वेस्ट यूपी में धड़ाधड़ किसान सभा कर रही है। भाजपा नेताओं की ही माने तो दिल्ली के धरने में पंजाब व हरियाणा का किसान है, लेकिन ऐसी स्थिति में वेस्ट यूपी का किसान भी नाराज हो गया तो भाजपा के लिए मुश्किल पैदा हो सकती है।

इसी वजह से भाजपा ने अब वेस्ट यूपी के किसानों पर फोकस किया है। पांच दिन पहले जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कृषि यूनिवर्सिटी आये तो कार्यक्रम का नाम ‘किसान संवाद’ दिया था, लेकिन कार्यक्रम सरकारी था। किसान संवाद कार्यक्रम में भी फोकस दिल्ली धरने पर बैठे किसान ही रहे थे और केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के निशान पर कांग्रेस व दिल्ली में धरना देने वाले किसान ही थे।

बड़ा सवाल यह है कि क्या दिल्ली और मेरठ में जुटने वाले किसान अलग-अलग है। किसान भी भाजपा व अन्य दलों में बट गए हैं। क्योंकि भाजपा के नेताओं ने जिस तरह से जनसभा में दावे किये है कि भाजपा की रैली में आने वाले किसान वास्तविकत है, दिल्ली में बैठे किसान नहीं।

अब देखा जाए तो असली किसान कौन हैं? इसकी लड़ाई शुरू हो गई है। भाजपा की जनसभा में पहुंचने वाले किसान असली है तथा धरने पर बैठने वाले फर्जी? आखिर इस तरह से किसानों के बीच सिर फुटव्वल की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसके परिणाम गंभीर भी हो सकते हैं।

इस बात को भाजपा के शीर्ष नेता भी जानते हैं, मगर फिर भी टकराव के हालात पैदा किये जा रहे हैं। किसान तो किसान ही होता है, लेकिन किसानों को आपस में बांटने का कुचक्र चल रहा है। बरहाल, कुछ भी हो, लेकिन फिलहाल वेस्ट यूपी की किसान बेल्ट पर भाजपा ने फोकस कर दिया है। कृषि बिल के मुद्दे को लेकर किसान भाजपा से छिटकता है या फिर नहीं, यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में हैं।

मगर, इतना अवश्य है कि सर्द मौसम में भाजपा की मुश्किलें किसानों ने बढ़ा दी है। पहली बार ऐसा देखा जा रहा है जब सत्ताधारी पार्टी भाजपा को कृषि बिल के मुद्दे को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा है। जनसभा की जा रही है, अब किसान चौपाल गांव-गांव में लगाई जाएगी। पश्चिमी यूपी के विधायक, संगठन के पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दे दी गई है।

यह सब भाजपा का कृषि बिल को लेकर डर तो दिखाई नहीं दे रहा है। यदि कृषि बिल गलत नहीं है तो फिर भाजपा इतनी डर क्यों रही हैं? विपक्षी समाजवादी पार्टी के नेता कमिश्नरी पर प्रदर्शन करने निकले तो उनको गिरफ्तार कर लिया गया। सपा, रालोद, कांग्रेस व बसपा नेताओं को उनके घरों में पुलिस ने नजर बंद किया। अब तो किसानों को भी नजर बंद किया जा रहा है। आखिर कृषि बिल जब ठीक है तो इतना बवाल क्यों?

अचला, हिमांशी शर्मा समेत कई दिग्गजों ने थामा भाजपा का दामन

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अचला सिंह, पार्षद हिमांशी शर्मा, मेरठ के ब्लाक प्रमुख नितिन कसाना समेत दर्जन भर लोगों ने केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की मौजूदगी में भाजपा का दामन थाम लिया। अचला सिंह समाज सेवी है तथा कंकरखेड़ा से पहले पार्षद का चुनाव भी लड चुकी हैं। हिमांशी वर्तमान में वार्ड-31 से पार्षद है। इसके अलावा मेरठ के ब्लॉक प्रमुख नितिन कसाना ने सपा छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इन सभी का मंच पर भाजपा सांसद राजेन्द्र अग्रवाल व अन्य भाजपा नेताओं ने स्वागत किया तथा पार्टी की नीतियों पर चलने का आह्वान किया। समाज सेवी एवं पार्षद पति पंकज शर्मा ने भी अपने साथियों के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

बीना वाधवा के भाजपा ज्वाइन करने के मायने अलग

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भाजपा को कैंट में बीना वाधवा के रूप में मजबूत चेहरा मिल गया है। बीना कैंट बोर्ड की उपाध्यक्ष रह चुकी है तथा वर्तमान में सभासद भी है। बीना वाधवा के पति सुनील वाधवा जो लंबे समय से बसपा से जुड़े रहे हैं। एक बार बीना कैंट बोर्ड की उपाध्यक्ष रह चुकी है, जबकि दो बार उनके पति सुनील वाधवा। तीन बार सुनील वाधवा के बडे भाई महेन्द्र वाधवा भी कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। सुनील वाधवा व उनकी पत्नी बीना वाधवा की राजनीति कैंट के इर्द-गिर्द ही रही है, लेकिन दो बार सुनील वाधवा मेरठ कैंट से बसपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं।
बीना ने शुक्रवार को केन्द्रीय मंत्री स्मीता ईरानी की मौजूदगी में भाजपा का दामन थाम लिया। उनके नाम का जैसे ही ऐलान हुआ, लोग हतप्रभ रह गए। हालांकि बीना के पति सुनील वाधवा इस दौरान मौजूद नहीं थे, लेकिन यह साफ हो गया है कि इस परिवार ने बसपा को अलविदा कहकर कमल को थाम लिया है। सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, विधायक डा. सोमेन्द्र तोमर, महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल ने भी स्वागत किया। बीना वाधवा के भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने से कैंट बोर्ड की राजनीति में तूफान आ गया है। क्योंकि अचानक ही बीना वाधवा का भाजपा को ज्वाइन करना राजनीतिक गलियारे में बड़ा हलचल पैदा करने वाला निर्णय है। लोग नहीं समझ पा रहे हैं कि बीना वाधवा हाथी से उतरकर कमल के फूल को कैसे थाम लिया?
भाजपा में उनकी यह धमाकेदार एंट्री महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल व जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन मनिंदरपाल सिंह ने कराई है। क्योंकि भाजपा कैंट को लेकर दो खेमों में बटी हुई है। एक खेमा महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल का है तो दूसरा खेमा कैंट विधायक सत्य प्रकाश अग्रवाल का। पर्दे के पीछे दोनों भाजपा नेताओं के बीच तलवारें खिंची हुई हैं। दूसरे ग्रुप को मात देने के लिए मुकेश सिंघल ने अपना राजनीतिक पासा चला है, जिसके तहत ही बीना वाधवा को भाजपा की सदस्यता ग्रहण कराई गई हैं। हालांकि पहले भी बीना की भाजपा में एंट्री की चर्चा तो चली थी, लेकिन भाजपा के ही कुछ लोगों ने इसका विरोध कर दिया था।
अब महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल ने उनकी एंट्री कराते हुए नया दांव खेला है। क्योंकि मुकेश सिंघल कैंट विधानसभा से टिकट के खुद दावेदार है। बीना का परिवार विधानसभा चुनाव में उनका मददगार हो सकता है। कहा जा रहा है कि बीना व उसके परिवार का कोई सदस्य सिर्फ और सिर्फ कैंट बोर्ड की राजनीति करेगा। बता दें, इससे पहले बीना कैंट बोर्ड की उपाध्यक्ष थी, लेकिन इसी भाजपा ने बीना का तख्ता पलट करते हुए उन्हें कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष की कुर्सी से उतारकर विपिन सोढी को उपाध्यक्ष के पद पर ताजपोशी कर दी थी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल की भूमिका रही थी, लेकिन इस पूरे प्रकरण से महानगर भाजपा अध्यक्ष मुकेश सिंघल खफा हो गए थे। यही वजह है कि इस पूरे राजनीतिक उठकपटक के चलते ही बीना वाधवा की भाजपा में एंट्री कराई गयी।
राजधानी दिल्ली में 22 दिन से कृषि बिल के खिलाफ किसानों का धरना चल रहा है। तापमान बेहद ठंडा हो गया है, लेकिन किसान बेल्ट वेस्ट यूपी की राजनीति का तापमान अचानक बढ़ गया है। किसानों की नब्ज टटोलने के लिए शुक्रवार को केन्द्रीय वस्त्र एवं महिला बाल कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी पहुंची।

कृषि बिल के विरोध के बीच केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने जहां गांधी परिवार पर निशाना साधा, वहीं कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी है तो कृषि क्षेत्र में भी प्रगति मुमकिन है। उन्होंने गांधी परिवार की घेराबंदी करते हुए कहा कि अमेठी में 50 साल गांधी परिवार ने राज किया।

इस दौरान किसानों की जमीनें हड़पी है। अब गांधी परिवार किसान हित की बात कर रहा है। ये परिवार किसानों को कैसे इंसाफ दिला सकता है। 22 मिनट के उनके संबोधन में अमेठी फोकस रहा। कहा कि विश्वास के साथ ही अमेठी की जनता ने उन्हें जिताया है।

राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि 40 इंच का आलू बताने वाले राहुल गांधी संसद में मिर्च का रंग तक नहीं बता सके थे। ऐसे में किसानों हित की बात कैसे कर सकते हैं। केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी क्रांतिधरा पर संस्कृति रिसोर्ट में आयोजित किसान सभा को बतौर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थी।

उन्होंने कहा कि जिस राहुल गांधी ने पार्टी को खत्म कर दिया हो, वह किसानों का भला कैसे कर सकता हैं? 50 वर्ष कांग्रेस की सत्ता रही है, इस बीच किसान हितों का बिल क्यों पेश नहीं किया? कृषि बिल किसानों के हित में है, सिर्फ भ्रम पैदा किया जा रहा है।

11 करोड़ लोगों को टॉयलेट बनाकर दिया। आप कह रहे होंगे कि इन बातों का किसान सभा में उल्लेख क्यों, लेकिन ये आवश्यकता है कि विकास से जुड़ी बातों पर चर्चा की जाए। हर घर को विकास छुएं, यह किसानों की अभिलाषा है। बीमारी के बाद किसान को खेत बेचना पड़ता था।

अब प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत की शुरूआत की, जिससे किसान को अपना खेत बेचना नहीं पड़ा। किसान को लेकर विपक्षी राजनीतिक रोटिया सेकते हैं। किसानों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। यूपीए की सरकार में किसान का बुरा हाल था। 36 हजार करोड़ का कर्ज किसानों का सरकार ने माफ किया।

किसान को सम्मान निधि से छह हजार रुपये दिया जा रहा है। डेढ़ साल में 93 हजार करोड़ केन्द्र सरकार ने बैंकों में दिये। 20 वर्ष की चर्चाओं के बाद छह माह पहले कृषि मंत्री ने डेढ़ लाख आनलाइन किसानों से चर्चा की, फिर यह कृषि बिल सदन में पेश किया।

विपक्ष के बहकावे में नहीं आये। किसानों को विचलित होने की आवश्यकता नहीं। वचन जो वचन देते है, उसे पूरा करते हैं। बिल को लेकर भ्रम फैलाया। इस कानून के तहत किसान की जमीन जबरन नहीं खरीदी जा सकती, नहीं कब्जाई जा सकती। 50 वर्ष में अमेठी की सीट पर किसान को धोखे में रखा।

किसान की गांधी परिवार ने बुरी गत की है। राहुल ने कहा जमीन दे दो, हम नौकरी देंगे। किसान ने राहुल व कांग्रेस पर विश्वास कर जमीन दे दी, लेकिन कांग्रेस ने जमीन हड़प ली। अब वो किसान दरबदर की ठोकरे खा रहा है, ताकि अपनी जमीन वापस ले सके। जो अपनी लोकसभा क्षेत्र के किसानों की जमीन खा गए, वो देश के किसानों के क्या खाक हो पाएंगे?

दोगलापन देखिये इस पार्टी का। दोगलापन ऐसा कि अमेठी से भागकर वायनॉड गए। वहां पर एपीएमसी का ऐक्ट नहीं लगा है। वहां पर मंडी व्यवस्था राहुल गांधी ने सुदृढ़ नहीं की है। अरे, दोगलापन तो इतना जब बिल संसद में आया था तो चर्चा के लिए तो वो विदेश यात्रा पर गए थे। जो किसान भ्रम में है कि राहुल गांधी तारणहार बनेंगे उनसे कहना चाहती हूं, जिस राहुल गांधी के सामने कांग्रेस डूब रही है, वो राहुल गांधी अपनी पार्टी को नहीं बचा सके, वो देश के किसानों का क्या खाक कल्याण कर पाएंगे।

किसान भाइयों से कहने आयी हूं कि नये भारत के निर्माण में किसान का योगदान व भूमिका अहम् है। मंडियों को नवीनतक तकनीक से जोड़ा है। पशु टीकाकरण के लिए साढ़े 13 हजार करोड़ मुहैय्या कराया। डेयरी के किसानों के लिए 20 हजार करोड़ मुहैय्या कराया। ये सब काम केन्द्र सरकार ने किया है। सभा की अध्यक्ष जिलाध्यक्ष अनुज राठी ने की तथा संचालन महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल ने किया।

ये रहे मौजूद

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किसान सभा में केंद्रीय मंत्री डा. संजीव बालियान, सांसद राजेंद्र अग्रवाल, बागपत के सांसद सतपाल सिंह तोमर, सह संगठन महामंत्री कर्मवीर, प्रदेश के कैबिनेट गन्ना मंत्री सुरेश राणा, भाजपा विधायक डा. सोमेंद्र तोमर, जितेंद्र सतवाई, प्रदेश मंत्री चंद्रमोहन, प्रदेश के उपाध्यक्ष देवेंद्र चौधरी, प्रदेश राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल, राज्यमंत्री विजय कश्यप, राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल, विधायक संगीत सोम, सत्यप्रकाश अग्रवाल, सत्यवीर त्यागी, संजय त्रिपाठी, छात्र नेता विभोर चौधरी, जिलाध्यक्ष अनुज राठी, मीडिया प्रभारी गजेन्द्र शर्मा आदि मंच पर मौजूद रहे।

ट्रैक्टर-ट्राली से किसान आते तो अलग छाप छूट जाती

भाजपा की किसान रैली में यदि ट्रैक्टर ट्राली से किसान आते तो अलग ही छाप छूट जाती। क्योंकि, किसानों का रैला ट्रैक्टर ट्रालियों में ही चलता है, लेकिन भाजपा की रैली में किसानों को बसों से लाया गया। किसान भी ज्यादातर युवा दिखाई दे रहे थे। बुजुर्ग किसान रैली में कम ही दिखाई दिये। जींस भी किसान पहने हुए थे। किसान भी हाईटेक हो गया है, लेकिन ट्रैक्टर ट्रालियों से किसान आमतौर धरने-प्रदर्शनों में आते रहे हैं। यही इतिहास रहा है, लेकिन यहां बसों से किसान लाए गए।

सीएए आता है तो विपक्ष को दर्द होता है : सुरेश राणा

प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि जब सीएए आता है तो विपक्षियों को दर्द होता है। धारा 370 हटती है तो भी दर्द होता है। अयोध्या में राम मंदिर बनता है तो भी दर्द होता है। अब कृषि बिल आया है तो भी दर्द हो रहा है। कृषि बिल के नाम पर किसानों को गुमराह करने के अलावा और दूसरा काम नहीं किया जा रहा है, लेकिन किसान समझदार है कि उनका हितैषी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी है या फिर विपक्ष।

यदि विपक्ष हितैषी हुआ होता तो 50 साल के कांग्रेस के राज में किसानों के हित को देखते हुए बिल क्यों नहीं लाया गया। प्रधानमंत्री ने किसानों से वार्ता के विकल्प खुले रखे हैं। एमएसपी जारी है और जारी रहेगी। इसमें कोई रद्दोबदल होने वाला नहीं है। ये आश्वासन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दे चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा साढे तीन हजार करोड़ की गन्ना किसानों को सब्सिडी दी है, ये तोहफा प्रधानमंत्री ने ही किसानों को दिया है। विपक्ष चीनी मिल बंद करने का काम कर रहा था और हम बंद चीनी मिलों को चलाने का काम कर रहे हैं। इसका उदाहरण है रमाला व मोहिउद्दीनपुर चीनी मिलें।

कार्यक्रम क्षेत्रीय का, कब्जा महानगर का

यह किसान जनसभा क्षेत्रीय था, लेकिन मंच पर महानगर का कब्जा था। मेरठ व सहारनपुर मंडल के सात जनपदों की यह रैली थी। इसमें नहीं तो पश्चिम के भाजपा अध्यक्ष मोहित बेनवाल ही नजर आये और नहीं उनके क्षेत्रीय पदाधिकारियों की टीम। मंच पर महानगर की टीम काबिज दिखी। इस क्षेत्रीय कार्यक्रम का संचालन महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल कर रहे थे।

हालांकि जिला अध्यक्ष ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, लेकिन क्षेत्रीय सम्मेलन होने के बावजूद क्षेत्रीय पदाधिकारी नदारद रहे। वजह क्या रही, इस पर भाजपा नेता कोई टिप्पणी नहीं कर पा रहे हैं। कहा जा रहा है कि क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई है।

सत्यप्रकाश, सत्यवीर को मंच से नहीं मिला बोलने का मौका

यह किसान सभा कैंट विधानसभा क्षेत्र में आयोजित की गई, लेकिन यह दुर्भाग्य कहें कि कैंट विधायक को ही मंच से बोलने का मौका नहीं दिया गया। हालांकि अग्रिम पंक्ति में कैंट विधायक सत्य प्रकाश अग्रवाल बैठे हुए थे, मगर उन्हें क्यों नहीं बोलने दिया? क्या वजह रही? ये कहना मुश्किल होगा। किठौर के भाजपा विधायक सत्यवीर त्यागी ने इस बात पर एतराज किया कि उन्हें और कैंट विधायक को मंच से नहीं बोलने दिया। इसको लेकर भाजपा के किठौर विधायक ने मंच पर हंगामा भी कर दिया था।

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