जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत, रूस और चीन को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि “लगता है हमने भारत और रूस को सबसे गहरे और अंधकारमय चीन के हाथों खो दिया है। ईश्वर करे कि उनका भविष्य एक साथ लंबा और समृद्ध हो!”
ट्रंप की स्पष्टीकरण भरी प्रतिक्रिया
हालांकि शुक्रवार को व्हाइट हाउस में एएनआई से बातचीत में ट्रंप ने अपने ही बयान पर सफाई देते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि हमने भारत को खोया है।”
उन्होंने भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने पर निराशा जताई और कहा,”मैं इससे बहुत निराश हूं कि भारत रूस से इतना तेल खरीदता है। मैंने भारत को यह बात स्पष्ट तौर पर बता दी है।”
टैरिफ विवाद: ट्रंप ने किया 50% टैक्स का बचाव
भारत-अमेरिका व्यापारिक तनाव पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ इसलिए लगाया क्योंकि, “भारत की कुछ व्यापारिक नीतियों से अमेरिकी नौकरियों पर असर पड़ा है।” उन्होंने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छे रिश्तों का ज़िक्र करते हुए कहा, “मेरे प्रधानमंत्री मोदी से बहुत अच्छे संबंध हैं। वह कुछ महीने पहले यहां आए थे, हम रोज गार्डन भी गए थे और प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।”
भारत पर तीखा हमला
पीटर नवारो, ट्रंप के व्यापार सलाहकार ने भारत पर रूसी तेल से मुनाफाखोरी का आरोप लगाया और कहा कि इससे अमेरिकियों की नौकरियां जा रही हैं। वहीं, व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने भी कहा कि अमेरिका भारत के रूसी तेल आयात से निराश है, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि, “हमें आगे चलकर सकारात्मक प्रगति की उम्मीद है।”
भारत का जवाब: ‘हम स्वतंत्र नीति अपनाते हैं’
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने ट्रंप की टिप्पणियों पर सीधे प्रतिक्रिया देने से इंकार किया। हालांकि मंत्रालय ने यह दोहराया कि, “भारत अपने संबंध किसी भी देश से उसकी अपनी योग्यता के आधार पर तय करता है, न कि किसी तीसरे देश के दबाव में।”
MEA ने यह भी पुष्टि की कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मुद्दों पर लगातार बातचीत चल रही है।
तेल विवाद की जड़ में क्या है?
रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना भारत के लिए एक आर्थिक ज़रूरत है, जिसे पश्चिमी देशों की आलोचना का सामना करना पड़ा है। अमेरिका ने इस पर 25% का अतिरिक्त शुल्क भी लगाया है।
नज़र में रखें
ट्रंप के दोहरे बयान – ट्रुथ सोशल पर आक्रामक, लेकिन प्रेस में नरमी।
भारत की कूटनीतिक सतर्कता–बयानबाज़ी से दूर रहना।
रूस-भारत-चीन समीकरण–पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय।

