- गरीब के लिए अब मुश्किल होती जा रही परिवार को भरपेट रोटी
- मंडी से घर तक पहुंचते पहुंचते प्रति किलो दो से तीन गुना तक बढ़ जाते हैं दाम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आम आदमी की थाली से महंगाई ने सब्जियां गायब कर दीं। सरकार के तमाम दावों के बाद भी महंगाई पर लगाम नजर नहीं आ रही है। कभी नोट बंदी तो कभी जीएसटी और अब लॉकडाउन के नाम पर बच निकलने की कोशिश। जब भी महंगाई की बात की जाती है, उसका ठीकरा फोड़ने या फिर साइड से बच निकलने के लिए अलग-अलग बहाने तलाशे जाते हैं। इस बार का बहाना लॉकडाउन है।
हालांकि लॉकडाउन आम और खास सभी को बेहाल किया है, जेब पर बोझ भी डाला है यह बात काफी हद तक ठीक भी है। कोरोना के नाम पर बगैर तैयारी के लगाए गए लॉकडाउन के साइड इफेक्टों में बड़ा इफेक्ट लोगों काम धंधा छिन जाना और रही सही कसर महंगाई ने पूरी कर दी है। इसकी वजह से अब आम आदमी की थाली में से सब्जियां तेजी से गायब हो रही हैं।
थाली हो रही खाली
यूं महंगाई का असर तमाम चीजों पर पड़ा है, लेकिन यहां आम आदमी की थाली की बात इसलिए की जा रही है, क्योंकि इसके बगैर किसी का भी गुजरा नहीं है। थाली से सब्जियां जिस तेजी से गायब हो रही हैं उसके चलते आशंका जतायी जा रही है कि यदि हालातों पर काबू नहीं पाया गया तो गरीब की थाली रोटी नमक और प्याज ही रह जाएंगे। जिस तरह से मंडी से आम आदमी की रसाई तक पहुंचते पहुंचते दाम बढ़ जाते हैं उसके चलेक प्याज से रोटी खाना भी हर किसी के बूते की बात नहीं होगी।
मंडी से रसोई तक दामों में लगी आग
सब्जी के ही दामों की यदि बात की जाए तो कुछ सब्जियां तो ऐसी हैं जिनके दामों में आग सरीखे हालात है। मंडी से चलकर आम आदमी की रसोई तक पहुंचते पहुंचते कुछ सब्जियों के दाम तो तीन गुना तक बढ़ जाते हैं। ऐसी हालात में थाली से सब्जियों की कटोरियां यदि गायब हो रही हैं तो हैरानी जैसा कुछ नहीं
कारोबार खत्म, कैसे हो गुजारा
लॉकडाउन के बाद काम धंधे की क्या हालत है यह किसी से छिपा नहीं है। एक तो काम धंधा नहीं उस पर महंगाई की इतनी तगड़ी मार। आम आदमी के लिए गुजारा करना परिवार पालना दुश्वार होता जा रहा है। कोई रास्ता भी नजर नहीं आ रहा है कि कैसे घर परिवार का गुजार करें। आसमान छूती महंगाई ने जीना मुहाल कर दिया है। हालात सुधरने की कोई उम्मीद नहीं बाकी रह गयी है।
ये कहना है सब्जी मंडी अध्यक्ष का
सब्जी मंडी के अध्यक्ष भूषण शर्मा का कहना है थाली से सब्जियों की कटोरी गायब होने का मुख्य कारण मंडी और ठेले के दामों में चार गुना इजाफा हो जाना। इसके अलावा पानी मार-मार कर सब्जियों का वजन बढ़ाया जाता है।
छंटाई में ही रेट तीन गुना तक
फल मंडी के अध्यक्ष हाजी इरशाद अहमद बताते हैं कि सेव का रेट मंडी में तो 25 से 30 रुपये किलो तक शुरू होता है और गली कूचो की दुकानों तथा ठेले तक पहुंचते पहुंचते ये 100 से लेकर 120 रुपये किलो तक पहुंच जाता है। दरअसल मंडी से लाकर फलों की छंटाई की जाती है। जिसके कारण रेट बढ़ते हैं।
सब्जी के दामों में फर्क का ब्योरा
- अरबी-35-100
- बीन्स-40-120
- पत्ता गोभी-50-100
- अदरक-40-100
- नींबू-40-120
- मेथी-50-100
- लौकी-18-50
- आलू-34-60
कमोवेश यही स्थिति अन्य सब्जियों की भी है। सब्जी मंडी से आम आदमी की थाली तक उनके दाम दो से तीन गुना तक बढ़ जाते हैं।

