Monday, March 16, 2026
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Dharm News: क्या होता है सावन के महीने में मनाए जाने वाले मंगला गौरी व्रत का महत्व, यहां जाने पूजा सामग्री और उद्यापन विधि

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन हैं।सनातन धर्म में मंगला गौरी व्रत को बहुत महत्व दिया जाता हैं। यह व्रत माता पार्वती को स​मर्पित होता हैं। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं और कुंवारी लड़कियां करती हैं। आइए जानते है इस व्रत का महत्व, पूजा सामग्री और उद्यापन विधि…

मंगला गौरी व्रत का महत्व

  • धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन के महीने में मनाए जाने वाला मंगला गौरी व्रत विशेष और मंगलकारी माना जाता है। इस व्रत को करने से जीवन मे आ रही सभी बाधा प्रकार की बाधा दूर होती हैं। सावन के हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत किया जाता है।
  • इस व्रत को सुहागिन महिलाएं आपने वेवाहिक जीवन में खुशहाली, पति की लंबी उम्र और संतान प्राप्ति के लिए करती हैं वहीं कुंवारी लड़कियां मनचाहा वर पाने की इच्छा से करती है।
  • अगर किसी महिला हो पुरुष पर किसी भी प्रकार का कोई भी दोष हो जैसे या विधवा दोष हो, या मंगलदोष हो, या विवाह दोष हो, या विवाह में देरी हो रही है, तो उस व्यक्ति को मंगलागौरी व्रत अवश्य करना चाहिए।

मंगला गौरी व्रत पूजा सामग्री

  • मंगला गौरी व्रत में पूजन के लिए विशेष सामग्री की तैयारी की जाती है।इसमें मां की पूजा षोडशोपचार से की जाती है और प्रत्येक सामग्री भी 16 की मात्रा में अर्पित करना होता है।
  • जैसे माला 16 मिठाई, 16 चूड़ीयां, 16 श्रृंगार सामग्री, लॉन्ग, इलायची, सुपारी, पान, सभी 16 की मात्रा में हो। पांच प्रकार के मेवे , सात प्रकार के अनाज , मां के लिए नए वस्त्र और आटे का दीपक जिसमें 16 बत्तियां आ सके।

मंगला गौरी व्रत उद्यापन विधि

  • मंगला गौरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठें स्नान के बाद लाल वस्त्र पहने। उद्यापन के दिन व्रत भी रखें और साथ में पूजा भी करें।
  • एक लकड़ी का खंभा स्थापित करें और उसके चारों ओर केले के पत्ते बांध दें। कलश स्थापित करें और उस पर मंगल गौरी की मूर्ति रखें।
  • मां पार्वती को सुहाग का सामान, वस्त्र, नथ आदि चढ़ाकर पूजा करें। हमेशा की तरह मंगला गौरी के व्रत की कथा सुनें।
  • पूजा के दौरान भगवान गणेश का ध्यान करें, ‘श्रीमंगलगौरीयै नम:’ मंत्र का जाप करें और अंत में सोलह दीपकों से आरती करें। उद्यापन के बाद पुजारी और 16 विवाहित महिलाओं को भोजन कराएं।
  • सावन में आखिरी बार मंगला गौरी का व्रत करने के बाद उस दिन अपने जीवनसाथी के साथ मिलकर हवन व्रत करें। कुंवारी लड़कियां अपने माता पिता के साथ बैठकर हवन करें।
  • मंगला गौरी व्रत में पूजन के लिए विशेष सामग्री की तैयारी की जाती है।इसमें मां की पूजा षोडशोपचार से की जाती है और प्रत्येक सामग्री भी 16 की मात्रा में अर्पित करना होता है।
  • जैसे माला 16 मिठाई, 16 चूड़ीयां, 16 श्रृंगार सामग्री, लॉन्ग, इलायची, सुपारी, पान, सभी 16 की मात्रा में हो। पांच प्रकार के मेवे , सात प्रकार के अनाज , मां के लिए नए वस्त्र और आटे का दीपक जिसमें 16 बत्तियां आ सके।
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