Tuesday, May 5, 2026
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40 हजार सीजीएचएस लाभार्थियों को कब मिलेगी अस्पताल की सुविधा?

  • केन्द्र सरकार के कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए है सीजीएचएस सेवा
  • करीब 13 हजार कार्ड धारक और 40 हजार लाभार्थी है पूरे जिले में

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: केन्द्र सरकार अपने कर्मचारियों को अन्य सुविधाओं के साथ अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं भी देती है। अकेले मेरठ की ही बात करे तो पूरे जिले में इन कर्मचारियों की अच्छी-खासी संख्या है, लेकिन यहां पर एक भी सीजीएचएस हॉस्पिटल नहीं है जिस कारण मरीजों को निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा लेनी पड़ती है, जिसका बोझ केन्द्र सरकार पर पड़ता है। अगर एक सीजीएचएस अस्पताल खुल जाए तो इसका सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा जिसकी बेहद जरूरत है।

मेरठ में केन्द्र सरकार की सेंट्रल गर्वमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के बड़ी संख्या में लाभार्थी रहते हैं। इनके लिए पूरे जिले में अलग-अलग डिस्पेंसरियां है। जिनमें सप्ताह के सभी वर्किंग डेज में ओपीडी सेवा उपलब्ध है, लेकिन इन मरीजों को अगर किसी गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़े तो इसके लिए सरकारी योजना के तहत निजी अस्पतलों का रूख करना पड़ता है। वजह है सीजीएचएस का एक भी अस्पताल मेरठ में नहीं है।

साढ़े बारह से तेरह हजार है सीजीएचएस कार्ड धारक

पूरे जिले में सीजीएचएस कार्ड धारकों की संख्या साढ़े बारह हजार से तेरह हजार के बीच है। साथ ही कार्ड धारकों के परिवारों को मिलाकर कुल लाभार्थियों की संख्या 40 हजार के करीब है। कार्ड धारकों को केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने की सुविधा है। इनके लिए हर तरह की बीमारियों का इलाज व दवाइयां डिस्पेंसरियों में उपलब्ध है। ओपीडी में सभी केन्द्रीय कर्मचारियों व लाभार्थियों का इलाज मुफ्त होता है।

पूरे जिलें में है छह डिस्पेंसरी

सीजीएचएस योजना का लाभ देनें के लिए पूरे जिले में अलग-अलग स्थानों पर कुल छह डिस्पेंसरी है। इन डिस्पेंसरियों में सीजीएचएस कार्ड धारकों को हर तरह की स्वास्थ्य सेवाएं देने की सुविधाएं है, जिनमें अलग-अलग बीमाारियां व जांच भी शामिल है।

जिले में एक भी सीजीएचएस अस्पताल नहीं

केन्द्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवा देने की योजना लगातार चला रही है, लेकिन इस योजना के अंतर्गत किसी भी गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीज को यदि अस्पताल में भर्ती करनें की जरूरत पड़ती है तो उसके लिए यह कर्मचारी आज भी निजी अस्पतालों पर निर्भर है। सीजीएचएस का एक भी अस्पताल मेरठ में नहीं है, जबकि इसकी आवश्यकता लगातार बनी हुई है। सरकार ने कुछ निजी अस्पतालों को अपने पैनल में शामिल कर रखा है, जिनमें जरूरत पड़ने पर केन्द्र सरकार के कर्मचारी को इलाज के लिए भर्ती कराया जाता है।

निजी अस्पतालों का बिल सरकार चुकाती है

निजी अस्पतालों की सुविधा सरकार देती जरूर है, लेकिन इनका मोटा बिल भी सरकार को ही चुकाना पड़ता है। कई बार मरीजों के लिए कौनसी बीमारी का किस अस्पताल मेंंं इलाज है या मरीज किस अस्पताल का लाभ ले सकता है। इसमें समय निकल जाता है और मरीज को गंभीर हालातों का सामना करना पड़ता है।

धांधलेबाजी का भी रहता है डर

सरकार अपने कर्मचारियों के लिए जिन अस्पतालों में इलाज की सुविधा देती है उनके बिलों पर भी संशय बना रहता है। मरीजों के बिल बनते हैं, लेकिन वह लाभ लिया गया है या नहीं इस पर भी शंका रहती है। हालांकि मरीजों के इलाज में यह अस्पताल कोताही नहीं बरतते, लेकिन समय पर निजी अस्पतालों में जगह होती है या नहीं यह भी बड़ा सवाल है। कुल मिलाकर अगर एक भी सीजीएचएस अस्पताल मेरठ में शुरू हो जाए तो केन्द्रीय कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है, साथ ही निजी अस्पतालों पर भी बोझ कम होगा, लेकिन यह कब होगा इसको लेकर आज भी चर्चा जारी है।

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