Monday, March 16, 2026
- Advertisement -

कहां गुजारे सुकून के दो पल, जब क्रांतिधरा के पार्क ही बदहाल

  • करोड़ों खर्च, फिर भी पार्कों के हाल बेहाल, टूटे पड़े झूले
  • सूख चुकी घास, जुआरियों व शराबियों का बने अड्डे

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कहां गुजारे सुकून के दो पल, जब क्रांतिधरा के पार्कों का हाल बेहाल है। प्रदेश सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी क्रांतिधरा के पार्क बदहाल ही है। इन पार्कों में लगाये गये बेशकीमती झूले गायब हो गये हैं। कहीं हैं तो टूटे पड़े हैं। पार्क में लगाए झूले में लगा समान गायब है। वहीं, रखरखाव के अभाव में घास सूखी पड़ी है। अव्यवस्था का आलम ये है कि पार्कों में अब नशेड़ियों और जुआरियों का अड्डा जम गया है।

05 16

स्मार्ट सिटी क्रांतिधरा का स्मार्ह तर्ज पर विकसित करना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल है, लेकिन नगर निगम प्रशासन सरकार की प्राथमिकताओं को तिलांजलि दे रहा है। इन पार्कों में बच्चों के लिए झूले, फव्वारे, फुलवाड़ी, सरोवर बनाए गए थे। ताकि वहां आने वाले नागरिक वहां पर रुककर आराम कर मनोरंजन के साधनों का आनंद ले सकें, लेकिन अनदेखी के चलते आज तक भी लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल सका है। पार्क में झाड़ियों की भरमार है,क्यारियां गंदगी से अटी पड़ी हैं।

इन पार्को में लाखों रुपये की लागत से लगे झूले और बच्चों के मनोरंजन के साधन जंग खा रहे हैं। प्रदेश सरकार के पार्कों में हर साल करोड़ों खर्च करने के बाद भी हरियाली दूर तक दिखाई नहीं दे रही हैं। शहरवासी लगातार नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि नगर निगम हर साल पार्कों के रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये शुल्क अदा करने का दावा करता है। जबकि मौके पर पार्क की स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है। देखरेख के अभाव में कभी शहर की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाले यह पार्क इन दिनों शहर वासियों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं।

01 17

अधिकारियों की अनदेखी से पार्क की स्थिति बदहाल है। पार्क को नशेड़ियों ने अपना अड्डा बना लिया है। पार्षदों का आरोप है कि पार्क के सुंदरीकरण की मांग को लेकर पूर्व में कई बार नगर निगम प्रशासन से लिखित व मौखिक शिकायत की जा चुकी है। उसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरी है। शहरवासियों ने अब पार्कों में आना ही छोड़ दिया है। पार्कों की चारदीवारी, पैदल पथ, बैठने के लिए कुर्सी टूटी पड़ी है, लेकिन नगर निगम ने उसके मरम्मत की जहमत नहीं उठाई है।

शहर में पार्कों की हालत खस्ताहाल है। नगर निगम की ओर से शहर में महिला पार्क, बच्चा पार्क, सूरजकुंड पार्क, सेक्टर-4 शास्त्रीनगर, माधव पुरम आदि क्षेत्रों के पार्कों का रखरखाव किया जाता है, लेकिन यह पार्क बदहाली का शिकार हैं। महिला पार्क व बच्चा पार्क में इस पार्क में काफी झूले भी लगाने के साथ ही रेस्टोरेंट भी बनाये गए थे, लेकिन अब सब कुछ बेकार हो चुका है।

02 18

नगर निगम के एआईएमआई एम पार्षद फजल करीम का कहना है कि पार्कों के रखरखाव को लेकर अधिकारी बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं। पिछले तीन सालों से पार्कों की उपेक्षा की जा रही है। सूरजकुंड पार्क की खूबसूरती के लिए कभी ग्रेनाइट पत्थर लगाए गए थे। जिन्हें लोग उखाड़कर अपने घर ले जा रहे हैं।

ओपन जिम बनवाने का दिया था प्रस्ताव

03 21

समाजवादी पार्टी की पार्षद नाजरीन शाहिद अब्बासी ने ऐतिहासिक टाउन हॉल में ओपन जिम बनवाने के लिए नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्ताव दिया था। नाजरीन ने कहा था कि टाउन हॉल सबसे मेरठ का सबसे ऐतिहासिक पार्क है। इसलिए नगर निगम प्रशासन को इस पार्क के सभी टूटे झूले सही करवाने चाहिए। साथ ही यहां पर ओपन जिम खुलवाना चाहिए। ताकि दूरदराज से आने वाले लोगों को सुविधा मिल सके।

एनजीटी की सुनवाई में फंसी गंगनहर पटरी पर सड़क निर्माण की परियोजना

मेरठ: गंगनहर की दायीं पटरी पर रोड निर्माण के लिए शुरू हुई परियोजना एक बार फिर खटाई में पड़ती नजर आ रही है। एनजीटी में इस मामले को लेकर सुनवाई शुरू की गई है। दरअसल, गंग नहर की बायीं पटरी चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग के नाम से दशकों पहले बनाई जा चुकी है। कुछ साल पहले करीब 702 करोड़ रुपये की लागत से दायीं पटरी पर सड़क निर्माण को लेकर कार्य योजना बनी। उसके अनुसार मुजफ्फरनगर से मेरठ होते हुए मुरादनगर तक 111.49 किलोमीटर गंगनहर पटरी के निर्माण में लगभग 38 हजार पेड़ों को हटाया जाना है।

इस कार्य के प्रथम चरण में गंगनहर पटरी पर 223 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है। साथ ही उपरोक्त भूमि पर लगाए गए करीब 38000 पेड़ पौधों की कटाई के संबंध में केंद्र सरकार की बनाई हुई समिति के माध्यम से अनुमति भी प्रदान की जा चुकी है। अभी गंग नहर की दायीं पटरी पर रोड निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने वन विभाग की देखरेख में पेड़ों की कटाई काम शुरू ही किया था, कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) मैं इस बाबत लोक निर्माण विभाग और वन विभाग समेत तमाम संबंधित विभागों को नोटिस भेज दिए। जिनके अनुक्रम में ट्रिब्यूनल के समक्ष एक दिन पहले ही विभागों की ओर से अपना पक्ष दिल्ली जाकर रखा गया है।

Untitled 1 copy 2

जब तक ट्रिब्यूनल से कोई निर्णय नहीं आ जाता तब तक रोड निर्माण का यह कार्य है खटाई में पड़ता दिखाई दे रहा है। इस संबंध में एक अधिकारी ने जानकारी दी कि बुधवार को दिल्ली में ट्रिब्यूनल के समक्ष कई विभागों की ओर से अपना पक्ष रखा गया है जिसमें यह भी बताया गया है कि ऐसी बड़ी योजना के लिए और बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के लिए राज्य स्तर से नहीं बल्कि केंद्र सरकार के स्तर पर गठित की गई कमेटी से अनुमति लेना आवश्यक होता है इस परियोजना के संबंध में भी केंद्र सरकार की उपरोक्त कमेटी अपनी अनुमति दे चुकी है। एनजीटी के नियम के अनुसार किसी भी कार्य के लिए पेड़ों के कटान की स्थिति में दोगुनी संख्या में पेड़ लगाए जाने का प्रावधान है।

गंग नहर की दाहिनी पटरी पर सड़क निर्माण के संबंध में एक पेंच यह फंस रहा है कि पेड़ों को लगाने के लिए इस क्षेत्र में भूमि ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मिजार्पुर समेत दूसरे जिलों में उपलब्ध भूमि पर प्लांटेशन का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग की ओर से दिया गया है। यह बात एनजीटी में कितनी चल पाएगी यह देखने वाली बात होगी। अब गंगनहर की दाहिनी पटरी पर रोड निर्माण कब शुरू हो पाएगा, यह सब कुछ एनजीटी से आने वाले निर्णय पर ही निर्भर करेगा।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

सिलेंडर बिन जलाए रोटी बनाने की कला

मैं हफ्ते में एक दिन आफिस जाने वाला हर...

सुरक्षित उत्पाद उपभोक्ता का अधिकार

सुभाष बुडनवाला हर वर्ष 15 मार्च को विश्व भर में...

पुराना है नाम बदलने का चलन

अमिताभ स. पिछले दिनों, भारत के एक राज्य और कुछ...

IAF Agniveer Vayu: खिलाड़ियों के लिए एयरफोर्स भर्ती, जानें आवेदन शुरू होने की तारीख

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना ने अग्निवीर...

Delhi Fire: दिल्ली के नेचर बाजार में भीषण आग, 40 दुकानें जलकर खाक

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: रविवार सुबह दिल्ली के अंधेरिया...
spot_imgspot_img