- बसों की खस्ताहाली में बदलाव की थी उम्मीद, लेकिन नहीं मिला बदलाव
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: वाइपर खराब होने के चलते जुगाड़ करके खराब मौसम में बस को गंतव्य तक ले जाने वाले संविदाकर्मी चालक परिचालक की सेवा समाप्त किए जाने की पुष्टि होने के बाद सोहराब गेट डिपो की बसों की खस्ताहाली में बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन कहीं कोई बदलाव नहीं मिला। सोहराब गेट डिपो की ज्यादातर बसों की हालत ऐसी है, कि उनमें बरसात के दौरान पानी साफ करने के लिए वाइपर ही नहीं लगे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिम है कि बसों की इस बदहाली के लिए अधिकारी किन-किनको बर्खास्त करेंगे।
मंगलवार शाम को जनवाणी संवाददाता ने सोहराब गेट डिपो का जायजा लिया, जहां सामने ही नजर आई सोहराब गेट डिपो की तीनों बसें ऐसी दिखी, जिनमें से किसी में भी वाइपर नहीं थे। इस बारे में मौके पर मिले चालकों-परिचालकों ने बताया कि डिपो की बसों की हालत किसी से छिपी नहीं है। हर तीसरी-चौथी बस ऐसी है, जिसमें वाइपर ही नहीं हैं। 60 प्रतिशत से अधिक बसें 10 लाख या इससे कहीं अधिक का सफर पूरा कर चुकी हैं,

जिन्हें नियमानुसार कंडम घोषित करके नीलाम किया जाना चाहिए, लेकिन अधिकारी इस बारे में कोई ध्यान देने के बजाय स्थिति को छिपाने और लीपापोती के प्रयास में लगे रहते हैं। उनका यहां तक कहना है कि डिपो की वर्कशॉप में बसों की मरम्मत के लिए जरूरी उपकरण और कल-पुर्जे तक मौजूद नहीं हैं। अधिकारी हर बस में आॅटो वेदर बल्ब लगाने के दावे नोडल अधिकारी के सामने कर चुके हैं, लेकिन ज्यादातर बसों में अभी तक साधारण लाइट बल्ब ही लगे हुए हैं।

