
भारतीय परिवारों में गोल्ड (सोना) को एक महत्वपूर्ण एसेट के रूप में देखा जाता रहा है। अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोने की कीमतें, मांग और आपूर्ति, आर्थिक स्थिति और प्रचलित ब्याज दरों के आधार पर निर्धारित होती हैं। ऐसे कारकों में बदलाव, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, सोने की कीमतों को प्रभावित करते हैं। सोने की कीमत ग्लोबल मार्केट फोर्स, और स्थानीय कारकों के मिश्रित प्रभाव से निर्धारित की जाती है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमत लंदन और न्यूयॉर्क जैसे प्रमुख मार्केट में ट्रेडिंग गतिविधियों द्वारा निर्धारित की जाती है जहां मांग और आपूर्ति, दरों को निर्धारितकरतीं हैं। लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन गोल्ड प्राइस, और कमोडिटी एक्सचेंज इंक वायदा गतिविधि जैसे प्रमुख मापदंड दिन भर इस कीमत को प्रभावित करते हैं।
भारत या किसी भी अन्य देश में सोने की कीमत को प्रभावित करने वाले कारकों में मांग और आपूर्ति, मुद्रास्फीति और वैश्विक बाजार की स्थितियां शामिल हैं। लंदन का ओवर-द-काउंटर बाजार ऐतिहासिक रूप से सोने के व्यापार का केंद्र रहा है और अनुमानों के अनुसार आज वैश्विक सांकेतिक व्यापार मात्रा का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा इसी बाजार में होता है। लंदन का बाजार दुनिया भर के प्रतिभागियों को आकर्षित करता है, और सोने के लिए दिन में दो बार निर्धारित वैश्विक संदर्भ मानक, छइटअ गोल्ड प्राइस, को निर्धारित करता है।
भारत में सोने की कीमत रोजाना इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन तय करता है, जो ग्लोबल मार्केट और स्थानीय फैक्टर पर आधारित होता है। अन्य सभी केंद्रीय बैंकों की तरह, भारतीय रिजर्व बैंक भी भविष्य के लिए सोने का भंडार रखता है, जिसका सोने की दर पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। यदि आरबीआई सोने के भंडार को बनाए रखने का निर्णय लेता है, तो बाजार में सोने की आपूर्ति कम होने के कारण सोने की कीमतें बढ़ जाएंगी।
भारत में सोने चांदी की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है। आम नागरिक की पहुंच से सोना और चांदी दोनों बाहर हो गए हैं। चांदी इतिहास में पहली बार सोने से ज्यादा महंगी चल रही है। वैश्विक अनिश्चितता और मजबूत सुरक्षित निवेश की मांग के चलते सोने ने वर्ष 2025 में असाधारण उछाल दर्ज किया, जिसमें 70 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई और यह 10 ग्राम के लिए 1.3 लाख से ऊपर पहुंच गया। नए वर्ष में भी सोने की कीमतों का बढ़ना जारी है। आज सोने की कीमतें जहां 1 लाख 46000 प्रति 10 ग्राम है तो वहीं, चांदी की कीमत 2 लाख 75000 प्रति किलो के करीब चल रही है। दस साल पहले जनवरी 2016 में 24 कैरेट सोने का औसत भाव 26,343 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
आज इसकी कीमत लगभग 1,46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच चुकी है। यानी लगभग 454 प्रतिशत की वृद्धि। इसका अर्थ है, अगर आपने एक दशक पहले सोने में 1,000 रुपये का निवेश किया होता, तो आज इसकी कीमत लगभग 5540 रुपये से अधिक होती। सोने की कीमतों में यह तेजी बढ़ती मुद्रास्फीति और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारकों से प्रेरित है। सोने-चांदी की कीमतें फॉरेन करेंसी यानी विदेशी मुद्रा के हिसाब से तय होती हैं। जैसे भारत का रुपया डॉलर के हिसाब में क्या भाव पड़ता है। भारत में सोने और चांदी की कीमतें सीधे सरकार तय नहीं करती है, बल्कि ये कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों के जोड़ से बनती हैं। जैसे अंतरराष्ट्रीय कीमत में सोना-चांदी की वैश्विक कीमत अमेरिकी डॉलर में तय होती है। आसान भाषा में समझें तो भारत में, सोने-चांदी की कीमत = अंतरराष्ट्रीय भाव + डॉलर रेट+आयात शुल्क+जीएसटी+ स्थानीय खर्च इन सबसे तय होता है। आने वाले समय में सोना और चांदी सस्ते होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब से भारत के ऊपर टैरिफ दर बढ़ा दिए हैं, तब से सोना-चांदी लगातार महंगा होता जा रहा है। एक कारण यह भी है कि लोगों का विश्वास अब डॉलर से उठ रहा है तथा सोने चांदी में लोगों का विश्वास ज्यादा बढ़ रहा है। सोना-चांदी किसी भी देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने में बहुत मदद करता है। जितने भी देश हैं, चाहे चीन हो, भारत हो, या दूसरे देश, सभी ने अपने देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए सोना-चांदी बड़े पैमाने पर खरीद कर रख लिया है। इस वजह से भी सोने और चांदी के भाव बढ़ गए हैं।
इन 3 प्रमुख कारणों की वजह से नए वर्ष 2026 में सोने की कीमत में वृद्धि जारी रह सकती है:
- भू-राजनीतिक तनाव-सोने को निवेशकों द्वारा हमेशा से ही एक सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। इसलिए यदि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव या टैरिफ युद्ध जारी रहते हैं, या टैरिफ को लेकर आपसी सम्बन्ध बिगड़ते हैं, तो लोग अपनी संपत्ति की रक्षा के लिए ‘सुरक्षित’ सोने की ओर अधिक रुख करेंगे। इससे सोने की मांग ऊंची बनी रहने और इसकी कीमतों में लगातार वृद्धि होने की उम्मीद है।
- अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना-वर्ष 2025 अमेरिका के लिए अपने सबसे बुरे वर्षों में से एक रहा है। इस वर्ष की पहली छमाही में ही अमेरिकी मुद्रा 10 प्रतिशत से अधिक गिर गई थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों में इसमें थोड़ी रिकवरी हुई है, लेकिन 2026 के लिए माहौल सकारात्मक नहीं है, बल्कि कमजोर बना हुआ है। दरअसल, सोने का मूल्य अमेरिकी डॉलर में तय होता है। इसलिए जब भी डॉलर कमजोर होता है, सोना खरीदना सस्ता हो जाता है। इससे निवेशकों की मांग बढ़ती है और इसी वजह से सोने की कीमतें ऊपर जाती हैं।
- ब्याज दरों में और कटौती की उम्मीदें- भारत में सोने की दर में बदलाव को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में से एक मुद्रा का प्रदर्शन है। पिछले वर्ष 2025 में आरबीआई और अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा कई बार ब्याज दरों में कटौती से फिक्स्ड डिपॉजिट की दरें और नए बॉन्ड पर मिलने वाला लाभ कम हो गया है। यह भी एक कारण है कि निवेशक अपने फंड को सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा, ब्याज दरों में और कटौती की उम्मीद ने वर्ष 2026 के लिए सोने में निवेश के प्रति आशावादी रुख को बढ़ावा दिया है।
फिर भी अनिश्चितताओं से घिरे वैश्विक वातावरण (ग्लोबल वर्ल्ड आर्डर) के बीच वर्ष 2026 में सोने की तेजी जारी रह पाएगी या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। निवेश के लिए किसी भी अन्य विकल्प की भांति सोने में निवेश करने में भी जोखिम हमेशा बना रहता है। यदि भू-राजनीतिक तनाव अपेक्षा से अधिक तेजी से कम होते हैं, ब्याज दरें बढ़ती हैं, या अमेरिकी डॉलर में तेजी से मजबूती आती है, तो सोने की कीमतें कम हो सकती हैं। यही कारण है कि सोने को आमतौर पर अल्पकालिक निवेश के बजाय पोर्टफोलियो में निवेश के जोखिम को कम करने के साधन के रूप में देखा जाता है।

