Wednesday, March 18, 2026
- Advertisement -

हमारा प्रजातंत्र सर्वश्रेष्ठ क्यों है?

सुबह-सुबह की गुनगुनी धूप में दयारामजी के पड़ोसी साधुरामजी ने चाय की चुस्कियां लेते हुए यूं ही पूछ लिया कि हमारे और विश्व के प्रजातन्त्र में क्या अंतर है? दयारामजी ने बड़ी गंभीरता से उत्तर देते हुए कहा – प्रजातन्त्र अर्थात वह शासन जो जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा ही संचालित होता है। यूं तो दुनिया में कई प्रजातांत्रिक देश हैं जैसे अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलेंड आदि किंतु हमारे देश के नेता कहते हैं कि हमारा देश ना केवल प्रजातन्त्र का जनक है बल्कि यहां एक परिपक्व प्रजातांत्रिक व्यवस्था भी है और इसीलिए भारतीय प्रजातन्त्र दुनिया में श्रेष्ठतम है।

हमारे नेताओं को क्यों लगता है कि हमारा प्रजातन्त्र सर्वश्रेष्ठ है? साधुरामजी ने प्रश्न उछाला। दयारामजी मुस्कुरा कर बोले-वो इसलिए कि हमारी उच्च प्रजातांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत एक चपरासी की नौकरी के लिए भी व्यक्ति का पढ़ा लिखा होना अनिवार्य है किंतु किसी राज्य का मुख्यमंत्री होने के लिए जरूरी नहीं कि व्यक्ति शिक्षित ही हो, चौथी पास या फेल भी मुख्यमंत्री बन सकता है। और हमारे प्रजातंत्र कि ब्यूटी देखिये कि ऐसे अनपढ़ नेता की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सलाहकार मंडल में देश के सर्वोच्च शिक्षित आईएएस, आईपीएस अधिकारी दिन-रात उनकी अर्दली में लगे रहते है। आम-आदमी नौकरी में साठ साल के बाद सेवानिवृत हो जाता है किन्तु नेताजी को अस्सी साल की उम्र में भी बूढ़ा नहीं माना जाता और वे सत्ता पर काबिज रह सकते है। यही नहीं नेताजी को हर पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए एक पेंशन मिलती है जबकि सामान्य नागरिक को 30-35 वर्ष की नौकरी के बाद भी कोई पेंशन सुविधा नहीं है।
साधुरामजी बोले-नहीं, नहीं ये सब तो अन्य देशों में भी होता है, क्या केवल इन्ही कारणों से हमारे प्रजातन्त्र को दुनिया में श्रेष्ठतम माना जा सकता है?

साधुराम जी! हमारा प्रजातन्त्र इसलिए भी सर्वोत्तम है क्योंकि हमारे देश के कानून अनुसार एक छोटा-सा नौकरीपेशा आदमी, यदि चौबीस घंटे भी जेल में रह जाए तो उसकी नौकरी से छुट्टी हो जाती है किंतु कोई भी नेता,कितना ही बड़ा घोटाला कर ले, उस पर चोरी लूट डकैती भ्रष्टाचार, दुष्कर्म, हत्या के मुकदमे ही क्यों न चल रहे हों, और वह एक घोषित आतंकवादी ही क्यों ना हो,चुनाव लड़कर जीत सकता है, अदालती कार्यवाही जारी रहने के बावजूद भी वह मंत्री अथवा मुख्यमंत्री बन सकता है,और संसद या विधानसभा में देश के लिए महत्वपूर्ण कानून भी बना सकता है। यह सब एक परिपक्व और उच्चकोटि की प्रजातांत्रिक व्यवस्था में ही तो संभव है।
साधुरामजी कोई और प्रश्न करते उसके पहले ही दयारामजी एक नेता की तरह बोलने लगे-हमारे देश में जो अभिव्यक्ति की आजादी है वह भी हमारे प्रजातन्त्र को दुनिया के प्रजातंत्र से उच्चतर स्थिति में ले जाती है क्योंकि यहां कोई भी नेता किसी भी सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति के लिए चोर-उच्चका और इसी तरह की निम्न स्तर की शब्दावली उपयोग कर सकता है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Saharanpur News: पुलिस मुठभेड़ में लूट के आरोपी दो बदमाश घायल अवस्था में गिरफ्तार

जनवाणी संवाददाता । सहारनपुर: जनपद में अपराधियों के खिलाफ चलाए...

Saharanpur News: सहारनपुर में बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी

जनवाणी संवाददाता । सहारनपुर: जनपद में मौसम का मिजाज बदलने...

Iran- Israel: इस्राइली हमले में ईरान को बड़ा झटका, लारीजानी और सुलेमानी की मौत

जनवाणी ब्यूरो । नई दिल्ली: ईरान ने मंगलवार देर रात...

Fire In Indore: इंदौर में दर्दनाक हादसा, घर में लगी भीषण आग, सात लोगों की जलकर मौत

जनवाणी ब्यूरो। नई दिल्ली: इंदौर के ब्रजेश्वरी एनेक्स इलाके में...
spot_imgspot_img