Saturday, March 7, 2026
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Vishwakarma Jayanti 2025: श्रमिकों और कारीगरों के लिए क्यों खास है विश्वकर्मा जयंती? जानिए महत्व

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। आज पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ विश्वकर्मा जयंती मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार यह पर्व कन्या संक्रांति के दिन आता है, जब सूर्यदेव अपनी स्वराशि सिंह से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का प्रथम शिल्पकार और ब्रह्मांड का दिव्य वास्तुकार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्वर्गलोक, लंका, द्वारका और जगन्नाथ मंदिर का निर्माण उन्हीं ने किया था। इस अवसर पर देशभर के कारखानों, फैक्ट्रियों, कार्यशालाओं और प्रतिष्ठानों में विशेष पूजा का आयोजन किया जा रहा है। श्रमिक, कारीगर, इंजीनियर और व्यापारी अपने औजारों, मशीनों और वाहनों की विधिवत पूजा कर भगवान विश्वकर्मा से सुरक्षा, उन्नति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

विश्वकर्मा पूजा का महत्व

विश्वकर्मा जयंती पर फैक्ट्री, कारखानों और औद्योगिक संस्थानों में काम आने वाली मशीनों और औजारों की पूजा होती है। इसके अलावा इस दिन लोग अपनी कार और मोटर साईकिल की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं साथ ही व्यापार में तरक्की और उन्नति प्राप्त होती है। विश्वकर्मा जयंती के दिन व्यापार और निर्माण आदि जैसे कार्यों में आने वाली मशीनों और औजारों की पूजा करने से इसमें किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं आती है।

भगवान विश्वकर्मा कौन है?

हिंदू धर्म में विश्वकर्मा जयंती पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के सबसे बड़े और अद्भुत शिल्पकार और प्रजापति ब्रह्मा जी के सातवें पुत्र भगवान विश्वकर्माजी का प्राकट्य दिवस हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाता है। विश्वकर्मा जी को दुनिया का पहले शिल्पकार, वास्तुकार और इंजीनियर थे। ऐसी मान्यता है कि जब ब्रह्राा जी ने सृष्टि की रचना की तो भवनों और महलों के निर्माण का कार्य इन्हें सौपा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार विश्वकर्माजी ने इंद्रपुरी, त्रेता में लंका, द्वापर में द्वारिका और हस्तिनापुर, कलयुग में जगन्नाथपुरी आदि का निर्माण किया था।इसके अलावा श्रीहरि भगवान विष्णु के लिए सुदर्शन चक्र,शिव जी का त्रिशूल,पुष्पक विमान, इंद्र का व्रज को भी भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया था। विश्वकर्मा जयंती पर विशेष तौर पर निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, दुकानों, कारखानों आदि की पूजा की जाती है।

विश्वकर्मा पूजाविधि

कन्या संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर करके साफ और अच्छे कपड़े धारण करते हुए औजारों, मशीन आदि की सफाई करके विश्वकर्मा जी की प्रतिमा या चित्र लगाकर रोली,अक्षत,फल-फूल आदि से उनकी पूजा करें। सभी औजारों और मशीनों के कलावा बांधें एवं मिठाई से पूजा करते हुए उनकी आरती करें। पूजा के दौरान “ॐ विश्वकर्मणे नमः” मंत्र का उच्चारण करें।

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