Friday, April 3, 2026
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भ्रष्टाचार में लिप्त क्लर्क पर क्यों नहीं होती कार्रवाई?

  • आय से अधिक संपत्ति की शिकायत ठंडे बस्ते में
  • मलाईदार पटल पर रहते हुए जमा की अकूत संपत्ति

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है, नियमों को ताक पर रखते हुए विभाग की साख को दांव पर लगाने वाले वरिष्ठ सहायक लिपिक की शिकायत शासन तक हो चुकी है। लेकिन न तो इनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई होती है न ही प्रशासन कोई कदम उठाता है। वरिष्ठ लिपिक के खिलाफ शिकायतों का अंबार है लेकिन रसूख के चलते इन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

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ऐसे में क्या योगी सरकार की जीरो टालरेंस नीति को पलीता लगाने का काम नहीं किया जा रहा है। आखिर क्यों वरिष्ठ लिपिक पर कार्रवाई नहीं की जाती। प्रदीप बंसल के विरुद्ध डा. राधेश्याम गौड़ निवासी 117 मोरीपाड़ा निकट कोतवाली द्वारा भी कार्यालय में भ्रष्टाचार व विद्यालय के शिक्षकों से धन की वसूली संबंधी शिकायत डीएम से की गई है। जिसकी जांच भी अपर नगर मजिस्ट्रेट के द्वारा की जा रही है।

पटल पर भी उठते रहे सवाल

शासनादेश के अनुसार प्रति वर्ष स्थानांतरण नीति अनुसार समूह ‘ग’ के कर्मचारी के 3 वर्ष के अंतराल पर पटल परिवर्तन के निर्देश दिए गए हैं। प्रदीप बंसल द्वारा वर्ष 2015 से अशासकीय सहायता प्राप्त बेसिक स्कूल में कार्यरत कर्मचारी की नियुक्ति, जी.पी.एफ. पेंशन व कोर्ट केस आदि का कार्य संपादित किया जा रहा है। इस अवधि में अशासकीय सहायता प्राप्त बेसिक स्कूल में लगभग 120 नियुक्तियां जिसमें प्रधानाचार्य, सहायक अध्यापक व लिपिक

एवं चपरासी सम्मिलित हैं हुई हैं। जिनमें इनके द्वारा भ्रष्टाचार में लिप्त रहकर अटूट धनराशि अर्जित की गई है। दिनांक 12-03-2022 को इनके द्वारा मात्र अशासकीय सहायता प्राप्त स्कूल में प्रबंधन का कार्य एक अन्य लिपिक को दिया गया है। जबकि कोई पटल परिवर्तन शासनादेश के अंतर्गत यहां नहीं हुआ है। दिनांक 30-08-2013 से अभी तक प्रदीप बंसल प्राथमिक एवं उच्च स्तर की मान्यता संबंधी पटल लगातार संपादित कर रहे हैं।

टाइपिंग टैस्ट पास नही

शिकायतकर्ता ने अपने शिकायती पत्र में प्रदीप बंसल परिषद कर्मचारी की नियुक्ति मृतक आश्रित के रूप में शासनादेश 22-10-1999 के अनुसार टंकन अर्हता उत्तीर्ण नहीं होने पर नियुक्ति अवैध है। परिषदीय कर्मचारी होने कारण आदेश 12-03-1997 व शासनादेश के अंतर्गत इनकी तैनाती ब्लॉक संसाधन केंद्र पर की जानी चाहिए। प्रदीप बंसल (परिषदीय कर्मचारी) कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के संबंध में

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फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने वाली शिक्षिका के बचाव में निलंबित होने व जांच में दोषी पाए जाने मात्र चेतावनी जारी करने और बीमारी का बहाना बनाकर स्वैच्छिक त्यागपत्र देने व 1 माह बाद ही स्वास्थ्य लाभ दशार्ते हुए स्वैच्छिक त्यागपत्र वापस लेने लेकर बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के स्वत: त्यागपत्र वापस मांग कर कार्य करते रहना संबंधी शिकायत की गई।

शिकायतों का मजमून

मोरीपाड़ा के रहने वाले राधे श्याम गौड़ ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, डीआइजी एंटी करप्शन ब्यूरो, आयकर आयुक्त लखनऊ व सचिव बेसिक शिक्षा परिषद् प्रयागराज से लिखित शिकायत की है जिसका मजमून इस प्रकार है। कृपया उपरोक्त विषयक शिक्षा निदेशक (बेसिक शिक्षा) उत्तर प्रदेश, लखनऊ के पत्रांक शि.नि. (बेसिक) / 2022-23 / दिनांक 03-02-2023 का अवलोकन करने का कष्ट करें। जिसके द्वारा वरिष्ठ सहाकय प्रदीप बंसल परिषदीय की आय से अधिक धनराशि से अर्जित चल/अचल संपत्ति की मेरे शिकायती पत्र दिनांक 05-01-2023 संलग्न कर आपसे जांच कर आवश्यक कार्यवाही किए जाने की अपेक्षा की गई है।

नियुक्ति पर सवाल

प्रदीप बंसल की परिषदीय कनिष्ठ लिपिक के रूप में जनपद मेरठ में नियुक्ति के बाद इनके द्वारा दिनांक 19-04-2001 को योगदान किया है। शासनादेश संख्या 22-10-1999 के अनुसार उत्तर प्रदेश सेवाकाल में मृतक सरकारी सेवकों के आश्रित की भर्ती नियम नियमावली 1974 (संशोधित) के नियम 5 में अन्य के रूप में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान है कि सेवायोजन के लिए आवेदनकर्ता आश्रित पद के लिए निहित शैक्षणिक योग्यता रखता हो।

साथ ही आवेदित पद के लिए टंकण जरूरी है जबकि उसमें अपेक्षित स्तर की गति अनिवार्य है, इसमें छूट नियम अनुसार नहीं है। एक लिपिक पद पर नियुक्ति के लिए टाइपिंग टैस्ट पास करना अनिवार्य है। जबकि प्रदीप बंसल द्वारा टंकण परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की गई। वर्तमान में भी प्रदीप बंसल को टंकण व कंप्यूटर का ज्ञान नहीं है। शासनादेश दिनांक 22 अक्टूबर 1999 के अनुसार इस प्रकार नियुक्ति नियमों के विरुद्ध है।

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