- जनपद में अब तक 44009 पॉजिटिव, 475 की हुई मौत
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोरोना के वायरस ने लोगों की जिंदगी तेजी से छीननी शुरू कर दी है। सोमवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक 5550 लोगों की टेस्टिंग हुई जिसमें 750 लोग संक्रमित निकले और तीन लोगों की जिंदगी खत्म हो गई। जनपद में कोरोना से अब तक 44009 लोग संक्रमित हो चुके हैं। जबकि मरने वालों की संख्या बढ़कर 475 पहुंच गई है।
सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बताया कि कोरोना के कोरोना की जांच में थोड़ी कमी आयी है। 1890 एडमिट किये गए। वहीं 5090 लोगों को होम आइसोलेट किया गया। जबकी काफी लोग कोरोना से ठीक होकर घर जा रहे है। दरअसल स्वास्थ्य विभाग मौतों के आंकड़े कम दे रहा है।
जबकि मेडिकल कालेज में रोज मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं, सूरजकुंड में शवों के अंतिम संस्कार के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं, जो प्रशासन के आंकड़ों को मुंह चिढ़ा रहे है। मेडिकल कालेज और अन्य अस्पतालों में 10 से अधिक लोगो की मौत हुई है। हैरानी की बात यह है कि निजी अस्पताल मरीजों की मौत की जानकारी सीएमओ को नहीं दे रहे हैं। इस कारण मौत के आंकड़े खुल कर सामने नहीं आ रहे है।
दौराला में 14 कोरोना संक्रमित मिले
सीएचसी दौराला में आयोजित कैंप में सोमवार को कोरोना जांच में 14 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। वहीं, जिलाधिकारी ने सीएचसी का निरीक्षण किया और वैक्सीन व अन्य दवा के स्टॉक की जांच की। इस दौरान उनकी पत्नी ने सीएचसी पर कोरोना वैक्सीन का टीका लगवाया। दौराला सीएचसी प्रभारी डा. आशुतोष ने बताया कि सोमवार को सीएचसी पर आयोजित कैंप में 170 लोगों की कोरोना जांच की गई।
जांच में दौराला से दो, एटूजेड से एक समेत 14 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले। टीकाकरण के दौरान जिलाधिकारी के बालाजी भी निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने कोरोना वैक्सीन व अन्य दवाई का स्टॉक देखा। सीएचसी पर टीकाकरण की रफ्तार सही देख उन्होंने खुशी जाहिर की।
इस दौरान उनकी पत्नी ने भी सीएचसी पर टीकाकरण कराया। डा. आशुतोष ने बताया कि कोरोना संक्रमित लोगों को होम क्वारंटीन कर दिया गया है। इस मौके पर डा. बीपी शर्मा, नीता शर्मा, शहबाज खान, हरगोविंद, राजकमल, अतुल यादव, कुलदीप व मधुबाला का सहयोग रहा।
पति की मौत पर मेडिकल कॉलेज स्टाफ पर लापरवाही का आरोप
मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती स्टाफ नर्स के कोरोना संक्रमित पति की मौत हो गई। जिसके बाद स्टाफ नर्स ने कॉलेज प्रशासन पर समय से वेंटिलेटर उपलब्ध न कराने का आरोप लगाया है।
स्टाफ नर्स के कॉलेज प्रशासन पर लगाए गए गंभीर आरोप का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मेडिकल कॉलेज में पिछले कई दिनों से एक स्टाफ नर्स का पति कोरोना संक्रमण से जिंदगी की जंग लड़ रहा था। आरोप है कि लगातार हालत बिगड़ने पर वेंटिलेटर की मांग की गई।
लेकिन कागजी कार्यवाही में कई दिन लग गए, जैसे ही स्टाफ नर्स के पति को वेंटिलेटर मुहैया कराया गया, तभी कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया। जिसके बाद स्टाफ नर्स ने पति के शव पर विलाप करते हुए कॉलेज प्रशासन पर लापरवाही करने का आरोप लगाया। स्टाफ नर्स का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया।
वहीं इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि नर्स का पति संदिग्ध कोरोना मरीज था। जिसे बचाने का भरसक प्रयास किया गया था, हालात बिगड़ने पर वेंटिलेटर पर भी रखा गया, लेकिन उसको बचाया नहीं जा सका। नर्स का स्टाफ पर लगाया गया लापरवाही का आरोप निराधार हैं।
पति की मौत पर महिला ने चिकित्सकों पर फेंके पत्थर
मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में भर्ती पति की मौत होने पर महिला बौखला गई और चिकित्सकों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। इसी के साथ अन्य मरीजों के तीमारदारों ने भी लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर मेडिकल पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने महिला व अन्य लोगों को समझाकर शांत किया। इसके बाद पुलिस ने कोविड वार्ड के बाहर खड़ी भीड़ को फटकार कर तितर-बितर किया।
नोएडा सेक्टर-45 की रहने वाली सुनीता शर्मा ने बताया कि एक सप्ताह पहले उनके पति सुनील की तबियत खराब हुई थी। वह पति को मेडिकल कॉलेज में लेकर आ गई। तीन दिन तक बेड नहीं मिलने की वजह से वह इमरजेंसी के बाहर पति को लेकर बैठी रही। बामुश्किल रविवार को बेड की व्यवस्था हो पाई। जिसके बाद चिकित्सकों ने सुनील को मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में भर्ती कर लिया।
रविवार तड़के गार्ड को पचास रुपये देकर उन्होंने पति को दूध भेजा था। फोन पर भी पति से सही बात हुई थी। रात में मेडिकल कॉलेज से फोन आया कि उनके पति की उपचार के दौरान मौत हो गई। जिसे सुनकर सुनीता के होश उड़ गए। आनन- फानन में महिला अपने भाई के साथ देर रात को मेडिकल कॉलेज पहुंची और लापरवाही का आरोप लगाते हुए महिला ने चिकित्सकों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए।
जिसके बाद वहां हंगामा हो गया। यही नहीं अन्य मरीजों के तीमारदारों ने भी डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर मेडिकल थाना इंस्पेक्टर प्रमोद गौतम कोविद वार्ड पहुंचे और महिला को समझाकर शांत किया।

