- छात्राओं ने शोहदों की चप्पलों से की धुनाई, शोहदे मौके से हुए फरार
- दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, परिजनों के पहुंचने से पहले पब्लिक ने छोड़ाकर भगाया, नहीं पहुंची पुलिस
जनवाणी संवाददाता |
मवाना: महानगर में छेड़छाड़ को लेकर बड़े बड़े बवाल हो चुके हैं। इसके अलावा रोज कहीं कहीं इसे लेकर कोई न कोई गंभीर घटना घटती है, बावजूद पुलिस की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। न तो वह ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगा पा रही है और न ही शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई करती है। पीड़ित परिवार के अनुसार पुलिस को महिला हेल्पलाइन के माध्यम से इस प्रकरण की जानकारी ने दे चुके थे, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बहरहाल, बेटी को तो न्याय नहीं मिला, पिता को भी जान से हाथ धोना पड़ा।
महानगर में कन्या डिग्री कालेज, मुख्य बाजार या ऐसा कोई सार्वजनिक नहीं है, जहां महिलाओं व छात्राओं के साथ छेड़खानी न होती हो। पुलिस कई बार महिलाओं की सुरक्षा के लिए अभियान चलाने का दावा करती है, इसके बाद भी इन घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है। महिला हेल्प लाइन पर ही औसतन रोज सात से 10 शिकायतें दर्ज होती है, पर कार्रवाई एक-दो में ही मुश्किल से होती है, जिस कारण घटनाएं लगातार बढ़ रही है।
शोहदों पर टूट पड़ी बेटियां
देहात क्षेत्र से नगर में स्थित स्कूल-कालेज एवं कोचिंग सेंटरों में भविष्य को संवारने के लिए आ रही युवतियों को अकेला पाकर देख शोहदों का गुट आये दिन अश्लील फब्तियां कसने के साथ छेड़छाड़ करने में पीछे नही है। शोहदों से परेशान होकर सैकड़ों युवतियों ने कालेज भी जाना भी छोड़ दिया है। मंगलवार को कालेज से घर लौट रही दो छात्राओं को फलावदा रोड स्थित तालाब के पास अकेला पाकर देख शोहदों ने फब्तियां कस छेड़छाड़ कर दी। युवतियों ने छेड़छाड़ होती देख उनका गुस्सा फूट पड़ा और बहादुरी का परिचय देते शोहदों पर चप्पलें लेकर टूट पड़ी।
इस दौरान छात्राओं ने शोहदों की जमकर धुनाई करते हुए सड़क पर गिरा दिया। युवतियों को शोहदों से भिड़ते देख आसपास के लोग मौके पर दौडेÞ और बीचबचाव कराते हुए पब्लिक ने भगा दिया। छेड़छाड़ की जानकारी मिलते ही परिजन भी मौके पर पहुंच गए और घटना की जानकारी ली। आरोप है कि कंट्रोल रूम को सूचना देने के बाद भी पुलिस ने मौके पर जाना तक गवारा नहीं समझा, जिसके चलते पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
कहां है एंटी रोमियो अभियान?
भाजपा सरकार ने महिलाओं एवं युवतियों की सुरक्षा के लिए भले ही एंटी रोमियो अभियान चलाने के पुलिस को दे रखे हो, लेकिन मवाना पुलिस का एंटी रोमियो अभियान थाने में ही दम तोड़ रहा है। मंगलवार को कालेज से घर लौट रही युवतियों को अकेला पाकर देख शोहदों ने फब्तियां कस दी। अश्लील फब्तियां कसती देख युवतियों का गुस्सा फूट पड़ा ओर शोहदों का पीछा कर दबोच लिया और जमकर चप्पलें बरसाकर आशिकी का भूत उतार कर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। छात्राओं ने पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खडे करते हुए कप्तान प्रभाकर चौधरी से शिकायत करने की बात कही है।
…ताकि स्कूल-कॉलेजों में सुरक्षित रहें बेटियां
आशंकाओं के घेरे के बीच ‘डर’ बढ़ने लगा है। घर की दहलीज पार कर स्कूल जाने वाली बच्चियां महफूज नहीं हैं। कमोबेश यही हाल कॉलेज छात्रा और नौकरी पेशा महिला का है। शहर और देहात क्षेत्र में इनके सुरक्षा इंतजाम नाकाफी हैं। स्कूल-कॉलेज की छात्राओं की सुरक्षा के लिए साधारण गाइड लाइन घिस गई है। ऐसी वारदातों को रोकने का सिस्टम बनाया ही नहीं जा रहा। न स्कूल-कॉलेज कोशिश कर रहे हैं न ही बड़े स्तर पर कोई विभाग। डर के पहरे में अपने राज्य में स्कूली बच्चियों की आखिर हिफाजत हो कैसे? ऐसे में भी मेरठ पुलिस की जारी विशेष गाइडलाइन को तो यहां किसी को पता ही नहीं है। यह विशेष गाइड लाइन स्कूलों में मासूमों के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए ही अमल में लाई गई है।
यहां भगवान भरोसे
शहर और देहात के गिने-चुने स्कूलों को छोड़ दें तो अन्य सरकारी और निजी स्कूलों में सुरक्षा भगवान भरोसे हैं। स्कूल-कॉलेजों में छात्राओं के लिए शिकायत पेटी तक भी नहीं है। स्कूली वाहनों वाहनों की हालत तो वैसे ही खराब है। कई चालक मासूम छात्राओं को अपने पास बैठाकर ले जाते देखा जा सकता है। चालक-परिचालक के साथ स्कूल के कुछ कर्मचारियों पर भी कई बार इस तरह के आरोप लग चुके हैं। स्कूल संचालकों को पता ही नहीं कि कौन-से वाहन में बच्चे आ रहे हैं। अधिकतर स्कूलों के लिए परिवहन का साधन प्राइवेट स्तर का है। ऐसे में वे इससे बचे रहना चाहते हैं। यहां तक की उन वाहन चालकों की कोई पहचान अथवा मोबाइल नंबर तक उनके पास नहीं होते।

