- सिद्धचक्र महामंडल विधान का सातवां दिन
- गुजरात के मुख्यमंत्री ने की प्रशंसा
जनवाणी संवाददाता |
बिनौली: श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र बरनावा की तपोभूमि में अष्टह्निका महापर्व के उपलक्ष्य में चल रहे नो दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान के सातवें दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर भगवान को 512 श्रीफल समर्पित किये।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पत्र भेजकर 131 फुट ऊंचे उतुंग शिखर एवं मंदिर जीर्णोद्धार का कार्य की प्रशंसा की।
ब्रह्मचारी पंडित प्रदीप पीयूष शास्त्री ने कहा कि अहिंसा,सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य,परिग्रह
इन पांच सिंद्धान्तों में तीसरा अचौर्य धर्म है
किसी के गढ़े हुए, मकान,घर आदि में रखी अमानत, गली बाजार सड़क पर पड़े व किसी के घर मे भूल वश रही अमानत, गलती से हिसाब किताब में भूल चूक हो जाना, रूपए पैसे वस्त्र आभूषण अधिक थोड़े या अधिक धन को बिना दिए ना तो आप ग्रहण करें और ना उस धन को उठाकर किसी और को देवे।
इस प्रकार स्थूल चोरी का त्याग अचार्य अनुव्रत कहलाता है चोरी के माल को थोड़े मूल्य में खरीदना, किसी को चोरी करने की प्रेरणा देना, उत्तेजना देना ,चोरी डांके आदि कार्यों की प्रशंसा करना सर्वथा अनुचित है।
वस्तुओं को नाजायज दबाव डालकर धोखा देकर या बहला कर प्राप्त कर लेना अचौर्य व्रत के विरुद्ध है। सुख शांति की प्राप्ति के लिए अचौर्य व्रत का पालन करना जरूरी है। विधान में बादामी जैन, कृष्णा जैन, सरिता जैन, पूनम जैन, संदीप जैन आदि उपस्थित रहे।

