- किसान से दो लाख तय कर एक लाख एडवांस भी ले लिए
- बनत बाइपास में अधिगृहित भूमि का नहीं दिलाया मुआवजा
- जमीन के मालिक रिटायर्ड शिक्षक ने एडीएम से की शिकायत
मुख्य संवाददाता |
शामली: अक्सर रिश्वत इसलिए दी जाती है कि आपका काम सौ फीसदी हो जाएगा, लेकिन रिश्वत लेकर भी कार्य न किया जाए और अगर किया भी जाए तो किसी दूसरे के पक्ष में कर दिया ताए तो इसे आप क्या कहेंगे? ऐसा ही एक कारनामा शामली तहसील का सामने आया है।
हलका लेखपाल ने बनत बाइपास में अधिगृहित हुई भूमि का मुआवजा दिलाने के लिए एक रिटायर्ड शिक्षक से दो लाख रुपये रिश्वत तय की। लेखपाल के रिश्तेदार की मौजूदगी में शिक्षक ने एक लाख रुपये लेखपाल को एडवांस दे दिए। फिर भी, लेखपाल ने बाइपास में हुई अधिगृहित भूमि का मुआवजा ऐसे व्यक्ति को दिला दिया जिससे उसका कोई लेना-देना नहीं था। अब पीड़ित ने अपर जिला अधिकारी (वित्त एवं राजस्व) से की है। एडीएम ने प्रकरण में उचित कार्यवाही का भरोसा रिटायर्ड शिक्षक को दिया है।
तहसील शामली के मुख्य द्वार के सामने से महाराजा सूरजमल पब्लिक स्कूल तक बनत बाइपास के लिए किसानों की भूमि अधिगृहित हुई थी। इसमें कस्बा बनत निवासी रिटायर्ड शिक्षक सेवाराम राणा पुत्र रामस्वरूप की ग्राम बनत प्रथम स्थित खसरा नंबर-1111 भी शामिल थी। इस भूमि में सेवाराम राणा सह खातेदार के रूप में दर्ज हैं। खसरा नंबर- 1111 में से बाइपास निर्माण के लिए कुल 2553 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण हुआ है।
ये सेवाराम की भूमि पैतृक सम्पत्ति है। सह खातेदार में सेवाराम राणा के भाई एवं भतीजों के नाम दर्ज हैं। आठ जून 2009 को उप जिलाधिकारी शामली के आदेश पर धारा-143 के अंतर्गत खसरा नंबर-1111 को अकृषक घोषित किया गया। इस अकृषक भूमि में सेवाराम तथा भाईयों ने अकृषक भूमि में प्लाटिंग कर बेच दी थी। इनमें से कुछ प्लाट विनोद पुत्र बाबूराम को विक्रय किए गए थे। विनोद क्रय किए गए प्लाटों की भूमि पर काबिज है।
बुधवार को रिटायर्ड शिक्षक सेवाराम राणा ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) को शिकायती शपथ पत्र देते हुए बताया कि उसकी तथा उसके भाइयों द्वारा की गई प्लाटिंग की भूमि में प्लाटों के बीच रास्ते छोड़े गए थे। इन रास्ते की भूमि को किसी भी व्यक्ति को नहीं बेचा है। जबकि निर्माणाधीन बाइपास में खसरा नंबर- 1111 में से कुछ भूमि प्लाटों तथा कुछ भूमि उनके प्लाटों के बीच छोड़े गए रास्तों से अधिगृहित हुई है। प्लाटों के रूप में अधिगृहीत भूमि का मुआवजा संबंधित प्लाट मालिकों को प्राप्त हो चुका है।
जबकि रास्ते के रूप में अधिग्रहित भूमि का मुआवजा न तो रिटायर्ड शिक्षक सेवाराम राणा को दिया गया, न हीं उनके भाईयों व भतीजों को प्राप्त हुआ है। न ही प्लाटों के बीच के रास्ते की 214.80 वर्ग मीटर भूमि का बैनामा किसी भी व्यक्ति को नहीं किया गया।
रिटायर्ड शिक्षक सेवाराम राणा ने अपर जिलाधिकारी से शिकायत करते हुए बताया कि प्लाटों के बीच रास्ते की अधिगृहीत 214.80 वर्ग मीटर भूमि का मुआवजा दिलाने के लिए उन्होंने तत्कालीन लेखपाल अशोक कुमार से कई बार सम्पर्क किया परन्तु हमें मुआवजा प्राप्त नहीं हुआ। मुआवजे के लिए अनेक प्रार्थना पत्र विभिन्न पटलों पर दिए गए, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।
इसी बीच सह खातेदार से पता चला कि लेखपाल अशोक कुमार उक्त रास्ते की भूमि का मुआवजा उसे देना चाह रहा है। जबकि विनोद ने लेखपाल से कहा रास्ते कि यह भूमि मेरी नहीं है। इस संबंध में विनोद कुमार ने एक शपथ पत्र 13 नवंबर 2020 को तहसीलदार शामली के समक्ष प्रस्तुत किया।
रिटायर्ड शिक्षक ने आरोप लगाए कि लेखपाल से सम्पर्क करने पर उसके द्वारा मुआवजा दिलाने के लिए दो लाख रुपये की मांग की गई। जिनमें से एक लाख रुपये लेखपाल के रिश्तेदार समेसिंह के समक्ष लेखपाल अशोक कुमार को दे दिए गए। इतना ही नहीं, समेसिंह ने 28 दिसंबर को 2021 को लेखपाल अशोक कुमार द्वारा एक लाख रुपये अग्रिम लिए जाने स्के संबंध में एक शपथ पत्र भी दिया।
रिटायर्ड शिक्षक सेवाराम राणा ने प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर जालसाजी एवं धोखााड़ी के आरोप में लेखपाल अशोक कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के साथ-साथ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। साथ ही, भूमि का न्यायसंगत मुआवजा भी मांगा है।
इस मामले में अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार सिंह ने पीड़ित रिटायर्ड शिक्षक सेवाराम राणा को उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया है।
भूमि अधिगृहित नहीं फिर भी दिलाया मुआवजा
रिटायर्ड शिक्षक सेवाराम राणा को प्लाटों के बीच रास्ते की भूमि का मुआवजा लेखपाल अशोक कुमार द्वारा किसी अन्य को दिलाने का पता भी नहीं चलता लेकिन सेवाराम राणा ने सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत भूमि अध्यप्ति अधिकारी, सहारनपुर से प्रपत्र 11 की प्रति प्राप्त की। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त प्रपत्र 22 की प्रति में खुलासा हुआ कि विनोद पुत्र बाबूराम को 3 लाख, 86 हजार, 802 रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। जबकि विनोद की कोई भूमि बाइपास में अधिगृहित नहीं हुई है।
256 वर्गमीटर जमीन के मुआवजा का दिया था भरोसा
कस्बा बनत निवासी समेसिंह पुत्र मुख्तयारा ने रिटायर्ड शिक्षक सेवाराम राणा के साथ अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संतोष कुमार सिंह को एक शपथ पत्र दिया। 28 दिसंबर 2021 के इस शपथ पत्र में बताया गया कि सेवाराम व आस करण पुत्रगण रामस्वरूप की खसरा नंबर-1111 में 2553 वर्ग मीटर भूमि भूमि बाइपास में अधिगृहण की गई थी।
लेकिन भूमि 2553 मीटर से अधिक ले ली गई। इस बढ़ी भूमि का मुआवजा दिलाने के लिए लेखपाल बनत प्रथम अशोक कुमार ने सेवाराम व आस करण से 2 लाख रुपये तय किए। इसमें एक लाख रुपये फरवरी 2021 में नगद प्राप्त किए। साथ ही, एक लाा रुपये मुआवजा मिलने के बाद देने का वादा किया। अब लेखपाल अशोक कुमार न तो मुआवजा दिला रहा है, न ही एक लाख रुपये वापस लौटा रहा है।
सेवाराम के आरोप बेबुनियाद और झूठें: अशोक
तत्कालीन हलका लेखपाल अशोक कुमार का कहना है कि जिस वक्त उनको चार्ज मिला, तब बाइपास के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य चल रहा था। खसरा-1111 भी अधिग्रहण में प्रभावित हुई। इस खसरा नंबर में मौके पर जिन लोगों के प्लाट थे, उनको एनएचएआई ने मुआवजा दिया।
सेवाराम को भी 238 वर्ग मीटर का मुआवजा मिला। इसी तरह उनके भाइयों को भी मुआवजा दिया गया। इसी बीच प्रधानमंत्री आवास योजना में सेवाराम राणा अपना मकान बनवाना चाहता था। इसकी जांच डूडा से उनके पास आई थी। जांच में सेवाराम को अपात्र पाया गया। पीएम आवास योजना में मकान न बनने पर सेवाराम उन पर बेबुनियाद और झूठे आरोप लगा रहे हैं। इससे उनका मानसिक उत्पीड़न हो रहा है।

