- सभी वार्डों में काफी संख्या में सरकारी मार्का हैंडपंप खराब,
- प्रत्येक वार्ड में लगाये जाने हैं 15 से 25 हैंडपंप
- एक वार्ड में भी नहीं लग पाये सरकारी हैंडपंप, नहीं कराए रीबोर भी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भीषण गर्मी शुरू हो चुकी हैं, पारा 42 डिग्री के ऊपर पहुंच चुका है, लेकिन शहर के 90 वार्डों में से अधिकांश वार्ड अब भी ऐसे हैं जहां सरकारी मार्का हैंडपंपों के हलक सूखे पड़े हैं। कुछ वार्डों में जहां 20 से 25 हैंडपंप लगाये जाने थे। वहां हैंडपंप लगाये तक नहीं गये हैं और कुछ वार्ड ऐसे हैं, जहां हैंडपंप खराब हैं तो उन्हें अभी तक रिबोर तक नहीं कराया गया है। शहर में एक या दो नहीं बल्कि अधिकांश वार्डों के ऐसे ही हाल हैं। 90 वार्डों में दो हजार से अधिक हैंडपंप हैं। जिनमें आधे से ज्यादा खराब पड़े हैं और अभी तक भी निगम की ओर से उन्हें सही कराने की सुध नहीं ली गई है।
नगर निगम पार्षदों का कार्यकाल दिसंबर 2022 में खत्म हो जायेगा। शहर में कई वार्डों में कार्य हुए तो कई वार्ड ऐसे भी हैं। जहां कार्य नहीं हुए। कई वार्डों में कुछ क्षेत्र में कार्य किये गये, लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं। जहां पर एक बार भी कोई कार्य नहीं हुआ। नगर निगम की सीमा में कुल मिलाकर 90 वार्ड हैं। यहां प्रत्येक वार्ड में हर साल खराब नलों को रिबोर कराने का कार्य किया जाता है और हर बार निगम के पार्षद अपने वार्डों में नल लगाये जाने के दावे करते हैं, लेकिन वह नल कितने सही चल रही हैं।

इस विषय में कुछ नहीं सोचा जा रहे हैं। निगम के इस सत्र की बात की जाये तो अभी तक अधिकांश वार्डों में नल लगवाये ही नहीं गये हैं। जबकि निगम के पार्षद कई कई नल लगाये जाने के दावे कर रहे हैं, लेकिन अभी तक यहां नल सूखे पड़े हैं। पार्षदों के दावे भी झूठे नजर आ रहे हैं। ऐसे ही कुछ वार्डों में वार्ड चार और वार्ड 33 भी शामिल हैं। यहां पार्षदों की ओर से नल लगवाने के दावे किये जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर वह नल दिखाई ही नहीं पड़ रहे हैं।
वार्ड चार के पार्षद का दावा है कि उनकी ओर से क्षेत्र में 25 नल लगवाये गये, लेकिन सबसे अधिक 10 से अधिक नल उनके वार्ड में ही खराब पड़े हैं। नलों से पानी आना ही बंद हो चुका है। यही हाल वार्ड-33 का है। वार्ड-33 में भी पार्षद की ओर से एक या दो जगहों पर ही नल लगवाया गया है, जो नल लगे हैं, वह खराब हो चुके हैं, लेकिन उनके सुधार के लिये कुछ नहीं किया जा रहा है।
हजारों की संख्या में खराब पड़े हैंडपंप
पूरे शहर के वार्डों की बात की जाये तो नगर निगम के पार्षद प्रत्येक वार्ड में नल लगाये जाने के दावे कर रहे हैं, लेकिन शहर में सभी वार्डों में करीब एक हजार से अधिक नल खराब पड़े हैं। लोगों के बार बार कहने के बाद भी इन नलों की हालत को सुधारा नहीं जा रहा है। कई बार पार्षद खुद निगम के अधिकारियों को बता चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद हालात नहीं सुधरे हैं। जबकि हर साल नलों के सुधार के लिये लाखों रुपये का बजट खर्च किया जाता है, लेकिन वह रुपये कहां खर्च किये जाते हैं। इस विषय में कह पाना मुश्किल है क्योंकि हैंडपंप तो खराब है।
भीषण गर्मी में पानी को तरसेंगे लोग
शहर में अधिकांश पानी की टंकियों की सफाई नहीं हो पाई थी, जिसके कारण कई जगहों पर पानी की टंकी के मोटर तक खराब हो जाते हैं। ऐसे में इन दिनों में नलों के पानी से ही लोग काम चलाते हैं। अब गर्मी अपने उग्र रूप में है और अब भी इन नलों को सही नहीं कराया जा रहा है। ऐसे में लोगों को पानी की टंकी से पानी न आने पर नल से भी पानी नहीं मिल पाता। जिस कारण लोगों को पानी के लिये परेशान होना पड़ रहा है।
लगातार कम हो रहा जलस्तर
अधिकांश क्षेत्रों में पानी का जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है। इस पानी के जलस्तर के कम होने के कारण ही नलों में पानी नहीं चढ़ता और वह खराब हो जाते हैं। पहले जहां 50 से 60 फीट तक पानी होता था। वहीं, अब 100 फीट तक भी पानी नहीं मिल पाता। मेरठ की बात करें तो मेरठ के छह ब्लॉक तो पहले ही डार्क जोन में है। इनमें से अधिकांश में नलों की हालत खराब है। यहां पानी का गिरता जलस्तर नलों के खराब होने की वजह बनता जा रहा है।

