- पांच दिन से वन विभाग कर रहा निगरानी, ट्रैपिंग कैमरा लगाया
- बीती रात एक साही कैमरे में हुई कैद, तेंदुए के नहीं मिले निशान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ऐसा लगता है क्रांतिधरा से तेंदुए का नाता गहराता जा रहा है। अभी पल्लवपुरम में आये तेंदुए को लोग भूल भी नहीं पाये थे कि रुड़की रोड के एक सैन्य क्षेत्र में 10 मई को तेंदुए की दस्तक के संदेह ने लोगों की नींद उड़ा दी। वन विभाग ने ऐहतियात के तौर पर पांच दिन से पिंजरा लगाया हुआ है। इसके अलावा ट्रैपिंग कैमरा भी लगाया गया है, लेकिन कहीं से भी तेंदुए के निशान या संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि डीएफओ का दावा है कि तेंदुए के बजाय फिशिंग कैट भी हो सकती है।
डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि मिलिट्री स्टाफ द्वारा वन विभाग को सूचना दी गयी कि छठी वाहिनी पीएसी के आसपास तेंदुआ दिखायी दिया है। इस सूचना पर 10 मई की रात्रि में ही वन विभाग की टीम द्वारा उक्त क्षेत्र में तेंदुए उपलब्धता की जानकारी एवं सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से क्षेत्र की सघन काम्बिंग करायी गयी तथा क्षेत्र में ट्रैपिंग पिंजरा एवं कैमरा ट्रैप लगवाये गये।

10 मई से निरन्तर उक्त क्षेत्र में सेना एवं वन विभाग के स्टाफ द्वारा तेंदुए की निगरानी की जा रही है। परन्तु उक्त क्षेत्र में अभी तक भी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से तेंदुए की मौजूदगी के कोई चिन्ह नहीं मिले है। विभागीय कर्मियों द्वारा सघन कोम्बिंग के उपरान्त यह निष्कर्ष निकाला गया है कि सम्भवत 10 मई को दिखायी दिये जाने वाला जीव जंगली बिल्ली हो सकती है।
वन विभाग द्वारा सेना के कर्मचारियों एवं आसपास निवास करने वाली जनता को गाइड लाइन के अनुसार क्या करें एवं क्या न करें के सम्बन्ध में भली भांति अवगत करा दिया गया है तथा अफवाहों पर ध्यान न दिये जाने का अनुरोध भी किया गया है। तेंदुआ मिलने के पांच दिन बाद शहर में इस जंगली जानवर को लेकर चर्चा फिर शुरू हुई। हालांकि वन विभाग ने जो पिंजरा लगाया है।
उसमें बीती रात एक साही कैद हो गई। पिंजरे के अंदर बंद कुत्ते को भी चार दिन हो चुके हैं, लेकिन उसके आसपास कोई जानवर नहीं फटक रहा है। गत दिनों वन विभाग मेरठ की टीम ने नोएडा में एनटीपीसी आवास से एक फिशिंग कैट पकड़ा, जिसे तेंदुआ बताया जा रहा था। डीएफओ ने बताया कि जंगल कैट की स्किन पर भी तेंदुए की तरह स्पाट होते हैं। पांच दिन तक सर्च आपरेशन चलाने के बाद फिर इसे बंद कर दिया जाएगा। इससे पहले गत दिनों पल्लवपुरम एवं किठौर में तेंदुआ मिला था।
क्या है फिशिंग कैट?
फिशिंग कैट यानि मछली पकड़ने वाली बिल्ली है। हालांकि फिशिंग कैट भी तेंदुआ प्रजाति की है। हालांकि इसका स्वभाव तेंदुआ से बिल्कुल अलग है। फिशिंग कैट काफी शर्मिला जानवर है। आमतौर पर यह इंसान को देख छुप जाता है। हालांकि यह मांसभक्षी होता है और छोटे जानवर मसलन, मुर्गी, छोटे आकार की बकरी को अपना शिकार बनाता है। वैसे इसका मुख्य आहार मछली है।

यह नदी व तालाब में आसानी से तैरकर मछली का शिकार कर लेता है। फिशिंग कैट दक्षिण व दक्षिणपूर्व एशिया में मध्यम आकार की जंगली बिल्ली है। भारत के पश्चिम बंगाल में फिशिंग कैट काफी संख्या में मिलता था। 2016 में इसे विलुप्त प्राय जानवर की श्रेणी में रखा गया है।

