जनवाणी ब्यूरो |
यूपी: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हुए कर्मचारियों के हिंसक प्रदर्शन पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे श्रमिकों पर अत्याचार बताते हुए कहा कि नोएडा की सड़कों पर कल जो हुआ, वह देश के श्रमिकों की “आखिरी चीख” थी।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि नोएडा में काम करने वाले मजदूरों की तनख्वाह लगभग ₹12,000 है, जबकि किराया ₹4,000-7,000 तक है। उन्होंने कहा कि तनख्वाह में मामूली वृद्धि भी महंगाई को कम नहीं कर पाती, और मजदूर कर्ज की गहराई में धकेल दिया जाता है।
वैश्विक ऊर्जा संकट का भी दिया उदाहरण
उन्होंने प्रदर्शन कर रही महिला कर्मचारी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि गैस और ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन मजदूरों की तनख्वाह स्थिर है। राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया में संघर्ष और उसके कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक महंगाई और टूटती सप्लाई चेन का सबसे बड़ा असर गरीब मजदूर पर पड़ा है, न कि उद्योगपतियों पर।
मजदूरों के हक की मांग पर दबाव और अत्याचार
राहुल गांधी ने कहा, “जो मजदूर शांतिपूर्वक काम करता है और अपना हक मांगता है, उसे दबाव और अत्याचार का सामना करना पड़ता है।” उन्होंने मोदी सरकार के चार श्रम कानूनों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि नवंबर 2025 से लागू इन कानूनों ने काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया, जिससे मजदूरों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
नोएडा मजदूर की मांग– ₹20,000
राहुल गांधी ने कहा कि नोएडा का मजदूर ₹20,000 मासिक वेतन मांग रहा है, जो लालच नहीं बल्कि उसका अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया, “मैं हर उस मजदूर के साथ हूं, जो इस देश की रीढ़ है और जिसे सरकार ने बोझ समझ लिया है।”

