Monday, March 30, 2026
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राशन कार्ड सरेंडर करने के आदेश देने वाले अफसर फंसे

  • खाद्य आयुक्त ने दी सफाई, सरेंडर करने के नहीं दिये आदेश

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: राशन कार्ड सरेंडर करने के आदेश देने वाले अफसर फंस गए हैं। आखिर राशन कार्ड सरेंडर करने के आदेश क्यों दिये गए? अब इस मामले में जनपद के अफसर फंस गए हैं। इस मामले में अफसरों ने कहा था कि राशन कार्ड सरेंडर करें और जिनके घरों में बाइक व कार है, ऐसे लोगों को राशन नहीं मिलेगा। राशन नहीं मिलने की बात तो समझ में आ रही थी, लेकिन राशन कार्ड सरेंडर क्यों कराया जा रहा था? यह किसी के भी समझ में नहीं आ रहा था।

जनपद में करीब दस हजार से ज्यादा राशन कार्ड सरेंडर हो चुके हैं। अब यह मामला शासन स्तर पर पहुंचा तो शासन ने भी हाथ झाड़ लिये हैं। शासन ने राशन कार्ड सरेंडर करने वाली बात को भ्रामक बताया हैं। सरेंडर करने के आदेश दिये ही नहीं गए तो फिर क्यों राशन कार्ड सरेंडर कराये जा रहे थे। अब कहा जा रहा है कि राशन कार्ड निरस्त भी नहीं होगा। इस तरह के शासन ने कोई आदेश नहीं दिये।

जनपद स्तर पर जिन अधिकारियों ने राशन कार्ड सरेंडर के आदेश दिये, उनकी गर्दन फंस गई हैं। उन पर जल्द ही कार्रवाई हो सकती हैं। राज्य के खाद्य आयुक्त सौरभ बाबू ने लखनऊ में सफाई दी है कि राशन कार्ड सत्यापन एक सामान्य प्रक्रिया है, जो समय-समय पर चलती रहती हैं। मेरठ, बागपत, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर ऐसे जनपद है, जहां पर जनपद स्तर के अधिकारियों के आदेश पर राशन कार्ड सरेंडर कराये गए। अपात्र कार्ड धारकों से पीछे लिये गए राशन की वसूली करने के भी आदेश दिये गए थे।

ऐसा करने से लोगों में दहशत का माहौल पैदा हो गया था। अब शासन इस मुद्दे को लेकर बैकफुट पर आ गया हैं। खाद्य आयुक्त सौरभ बाबू ने राशन कार्ड को सरेंडर करने को लेकर मीडिया संस्थानों पर प्रसारित हो रही भ्रामक खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि राशन कार्ड सरेंडर करने और पात्रता की नई शर्तों के संबंध में आधारहीन प्रचार हो रहा है। सत्यता यह है कि पात्र गृहस्थी राशन कार्डों की पात्रता/अपात्रता के संबंध में सात अक्टूबर 2014 के शासनादेश के मानक निर्धारित किए गए थे

जिसमें वर्तमान में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। खाद्य आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं के अंतर्गत आवंटित पक्का मकान, विद्युत कनेक्शन, एक मात्र शस्त्र लाइसेंस धारक, बाइक स्वामी, मुर्गी पालन/गो पालन होने के आधार पर किसी भी कार्ड धारक को अपात्र घोषित नहीं किया जा सकता है। इसी प्रकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 तथा प्रचलित शासन आदेशों में अपात्र कार्ड धारकों से वसूली जैसी कोई व्यवस्था भी निर्धारित नहीं की गई है, जबकि जनपद स्तर के अधिकारियों ने बाकायदा आदेश जारी किये थे कि अपात्र कार्ड धारकों ने राशन लिया है तो उनसे वसूली भी जाएगी।

इससे लोग घबरा गए थे तथा अपने राशन कार्ड सरेंडर कर दिये थे। रिकवरी के संबंध में शासन स्तर से अथवा खाद्य आयुक्त कार्यालय से कोई भी निर्देश निर्गत नहीं किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि खाद्य विभाग सदैव पात्र कार्ड धारकों को नियमानुसार उनकी पात्रता के अनुरूप नवीन राशनकार्ड जारी करता है और एक अप्रैल 2020 से अब तक प्रदेश में कुल 29 लाख 53 हजार नवीन राशन कार्ड विभाग द्वारा पात्र लाभार्थियों को जारी किए गए।

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