Thursday, March 19, 2026
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आज अर्द्ध रात्रि में जन्म लेंगे बाल गोपाल

  • 19 अगस्त को सूर्योदय अष्टमी तिथि में व्रत करना उत्तम
  • इस बार दोनों ही तिथियों में नहीं है रोहिणी नक्षत्र

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत का पर्व स्मार्त और वैष्णव भेद से दो दिन आ रहा है। परंपरा अनुसार इस व्रत के संबंध में दो मत प्रचलित हैं। स्मार्त लोग यानि सामान्य गृहस्थी अर्द्धरात्रि का स्पर्श होने पर सप्तमीयुता अष्टमी में उपवास करते हैं। जबकि वैष्णव मतालंबी अर्द्धरात्रि अष्टमी की उपेक्षा करके नवमी विदा अष्टमी में व्रतादि करने में विश्वास रखते हैं।

ज्योतिषाचार्य आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि इस वर्ष गुरुवार 18 अगस्त को व्रत का अर्धरात्रि व्यापिनी अष्टमी, भरणी नक्षत्र कालीन श्री कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत के संकल्प, जपानुष्ठान व जन्म अभिषेक का माहात्म्य होगा। स्मार्त भक्त (सामान्य गृहस्थी) इसी दिन व्रत का आरंभ करके आगामी दिवस शुक्रवार 19 अगस्त को व्रत का पारण एवं जन्मोत्सव मनाएंगे जो कि श्रेष्ठ एवं उत्तम रहेगा।

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जबकि वैष्णव मतालंबी (संन्यासी आदि) शुक्रवार 19 अगस्त को उदयकालीन अष्टमी जो कि प्रात: सूर्योदय से लेकर रात्रि 11 बजे तक ही रहेगी तदुपरांत अर्द्धरात्रि व्यापिनी नवमी तिथि, कृतिका नक्षत्र, वृष राशि के चंद्रमा में व्रत, जपानुष्ठान एवं जन्मोत्सव मनाएंगे। जन्माष्टमी और कृष्ण जन्मोत्सव में एक चीज सर्वमान्य होती है और वह है रोहिणी नक्षत्र।

क्योंकि रोहिणी नक्षत्र में ही भगवान का जन्म हुआ था। रोहिणी नक्षत्र में उत्सव मनाने की परंपरा है, लेकिन इस बार दो तिथियों में अष्टमी तिथि होने के बाद भी 18 और 19 को रोहिणी नक्षत्र नहीं पड़ रहा है। रोहिणी नक्षत्र 20 को 1 बजकर 53 बजे प्रवेश कर रहा है।

18 को रात्रि में 9 बजकर 21 मिनट पर शुरू हो रही अष्टमी

अगर आप श्रीकृष्ण जन्म अर्द्धरात्रि में मनाते हैं तो 18 अगस्त गुरुवार को निशीथकालीन अष्टमी में (जिस प्रकार शिवरात्रि में रहते हैं) जन्माष्टमी व्रत रहें और अगर आप सूर्योदय अष्टमी तिथि युक्त में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाते हैं तो 19 अगस्त 2022, शुक्रवार को जन्माष्टमी व्रत रहें ।

दो दिन क्यों मनाई जाएगी जन्माष्टमी?

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की रात्रि के सात मुहूर्त निकल जाने के बाद आठवें मुहूर्त में हुआ था। उस दौरान आधी रात थी। अगर आठवें मुहूर्त की बात करें तो वह 19 अगस्त को रहेगा और आधी रात की बात करें तो वह 18 अगस्त को होगी ।

18 को अर्द्ध रात्रि में इस प्रकार करे पूजा

अर्द्धरात्रि अष्टमी को ही बाल गोपाल का पूजन, शृंगार, भोग लगाना, झूला झूलाना व जन्म के समय अभिषेक की पुष्टि की है। श्रीमद्भागवत, श्री विष्णु पुराण, वायु पुराण, भविष्य पुराण आदि में भी तो अर्द्धरात्रि युक्ता अष्टमी में ही श्री भगवान के जन्म की पुष्टि करते हैं।

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