Saturday, March 14, 2026
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जमीन पर कब्जे को लेकर बवाल

  • एमडीए टीम वापस लौटी, भाजपा विधायक अमित अग्रवाल किसानों के पक्ष में कूदे
  • विरोध करने वाले चार किसान हिरासत में लिये

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) गंगानगर आर-यू पॉकेट में जमीन पर कब्जा लेने के लिए पहुंची तो बवाल हो गया। किसानों ने मेरठ विकास प्राधिकरण की टीम का भारी विरोध कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने विरोध करने वाले किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने चार किसानों को भी हिरासत में लिया है। इसके बाद मेरठ विकास प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण अभियान चलाया।

किसान की ट्यूबवेल को प्राधिकरण की जेसीबी ने ध्वस्त कर दिया। किसानों के खेतों में खड़ी धान की फसल पर एमडीए ने ट्रैक्टर चला दिया। इसी बीच मौके पर पहुंचे भाजपा के कैंट विधायक अमित अग्रवाल भी किसानों के पक्ष में आ गए। उन्होंने कहा कि पहले किसानों का मुआवजा दीजिए, उसके बाद जमीन पर कब्जा होगा।

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दरअसल, पिछले दो दशक से मेरठ विकास प्राधिकरण ने किसानों को मुआवजे के रूप में फूटी कौड़ी नहीं दी और जमीन पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। इससे पूर्व भाजपा विधायक अमित अग्रवाल और किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल प्राधिकरण के सचिव से भी मिला और उनके समक्ष किसानों ने अपना पक्ष रखा। ध्वस्तीकरण तथा खेतों पर चलाए जा रहे ट्रैक्टरों को रोकने की मांग की।

जब विधायक मौके पर पहुंचकर आक्रामक हुए उसके बाद ही प्राधिकरण की टीम वापस लौटी। दरअसल, 246 एकड़ जमीन का 1990 में मेरठ विकास प्राधिकरण ने धारा (4) के तहत अधिग्रहण किया था, लेकिन तब प्राधिकरण ने किसानों को इसका कोई मुआवजा नहीं दिया। मेरठ विकास प्राधिकरण ने 1998 में डीएम के माध्यम से एक पत्र प्रदेश शासन को भेजा, जिसमें कहा कि जो जमीन 246 एकड़ है, ये प्राधिकरण के उपयोग की नहीं है।

42 एकड़ जमीन इसके बराबर में फेज-वन में थी, जिसे अर्जन मुक्त कर दिया गया था। अर्जन मुक्त की गई जमीन श्रीपाल की थी। वर्ष 2002 में फिर से अचानक मेरठ विकास प्राधिकरण ने इस जमीन पर दावेदारी कर दी, जिसके विरोध में किसान न्यायालय की शरण में चले गए।

2007 में मेरठ विकास प्राधिकरण ने किसानों के खाते में 30 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से मुआवजा न्यायालय में जमा करा दिया, जबकि जो 42 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हुआ था, उन किसानों को 690 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से जमीन का मुआवजा दिया गया, लेकिन किसानों को 30 रुपये का मुआवजा न्यायालय में जमा कराया गया। इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

दरअसल, 17 वर्ष से किसानों को कोई मुआवजा नहीं दिया और जमीन का अधिग्रहण प्रक्रिया भी नहीं हुई। विजयपाल और आहुजा परिवार के अलावा श्रीपाल और विजयपाल दोनों सगे भाई हैं, जिसमें से श्रीपाल की जमीन तो 42 एकड़ प्राधिकरण ने अधिग्रहण से मुक्त कर दी,लेकिन विजयपाल की जमीन को नहीं छोड़ा गया। धारा 24 (2 )के तहत श्रीपाल की जमीन छोड़ दी गई थी।

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इसी जमीन पर कब्जा लेने के लिए प्राधिकरण की टीम सुबह से ही तमाम इंजीनियर और स्टाफ के साथ दलबल के साथ गंगानगर अब्दुल्लापुर के पास पहुंची। प्राधिकरण की जेसीबी और ट्रैक्टर खेतों में चालू किए गए, तभी इसकी भनक किसानों को लग गई। किसानों की भीड़ यहां मौके पर पहुंच गई। किसानों ने प्राधिकरण अधिकारियों का भारी विरोध कर दिया। प्राधिकरण इंजीनियरों के साथ पुलिस भी व्यापक स्तर पर थी।

पुलिस ने देखते ही देखते किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया। हाजी छंगा किसान के चार परिजनों को पुलिस उठा कर थाने ले गई। काफी हंगामा इस बीच चलता रहा। प्राधिकरण की जेसीबी लगाकर किसानों की खेतों की सिंचाई करने वाली ट्यूबवेल को क्षतिग्रस्त कर दिया। बिजली का मीटर भी तोड़ दिया। इसी बीच भाजपा विधायक अमित अग्रवाल भी किसानों के बीच पहुंच गए अमित अग्रवाल ने पूछा कि क्या इसका मुआवजा बट चुका है?

यदि बट चुका है तो कब्जा लिया जाएगा। यदि नहीं बटा है तो कैसा कब्जा? इसको लेकर प्राधिकरण ने कोई जवाब नहीं दिया। कहा कि पहले किसानों को जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है तो मुआवजा दिया जाए। इसके बाद ही दूसरी कब्जे की कार्रवाई करने दी जाएगी। किसान भी इसके बाद तो प्राधिकरण अफसरों पर भड़क गए। भाजपा विधायक के किसानों के पक्ष में खड़े होने के बाद प्राधिकरण के अफसर इधर-उधर देखने लगे, तभी प्राधिकरण की जेसीबी और ट्रैक्टर किसानों के खेतों से बाहर निकलवाए गए और इस तरह से मेरठ विकास प्राधिकरण की टीम बैरंग ही लौट गई।

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