Wednesday, May 6, 2026
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‘घूस’ की अजीब समस्या ने खोखला कर दिया समूचा वार्ड

वार्ड-66: पार्षद का रिपोर्ट कार्ड

  • जमीन को खोदने वाले प्राणी की करतूत से वरदान के बजाय अभिशाप बन जाता है विकास कार्य

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: वार्ड-66 के लोग एक अजीब जानवर से त्रस्त हैं। घूस नाम का यह मांसाहारी और खूंखार प्राणी नर्म मिट्टी को खोदकर उसमें रहता है, और मिट्टी में पैदा होने वाले कीड़े मकोड़ों को खाकर जिंदा रहता है। इस जानवर ने पूरे वार्ड के नाले-नालियों और सीवर लाइन समेत निर्माण के लिए खोदी गई जमीन को खोखला कर दिया है। जिसके कारण कहीं से भी मिट्टी खिसक जाती है, और निर्माण गड्ढे में तब्दील हो जाता है।

वार्ड-66 के अंतर्गत सराय बहलीम, पूर्वा अब्दुल्ला वाली, पूर्वा निहाल सिंह, नौगजा, शाहघासा आदि इलाके आते हैं। इस वार्ड में नाला मकाचीन अवरुद्ध होने और जगह-जगह से सड़कों और गलियों के धंस जाने के नजारे देखने को मिले। हापुड़ बस स्टैंड से शाहपीर गेट की ओर से आते हुए यह नाला देखा जा सकता है। इस नाले की स्थिति यह है कि सफाई के लिए हर दूसरे तीसरे दिन मशीन को लगाना पड़ता है।

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क्योंकि नाले के किनारे दोनों और मकान बने हुए हैं, जिसके कारण नाले की सफाई के लिए अंदर किसी भी सफाई कर्मचारी को उतारना या मशीन को वहां तक ले जाना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में अकसर सिरे पर जमा होने वाले सिल्ट और कूड़ा करकट को हटाते हुए जलनिकासी का प्रयास निरंतर किया जाता है।

वार्ड वासी संजीव कुमार, शुऐब कुरैशी, मोहम्मद आदिल नौगजा निवासी, मोहम्मद इकराम, हाजी मोहम्मद जाहिद अंसारी, मोहम्मद फारूक, कारी दीन मोहम्मद आदि से जो जानकारी मिली, उसके मुताबिक इस वार्ड के लोग एक बहुत ही अजीब समस्या से जूझ रहे हैं। चूहे और नेवले के आकार का एक प्राणी होता है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में घूस कहा जाता है।

लोगों का कहना है कि यह जानवर जमीन के अंदर ही अंदर मिट्टी को काटता रहता है। घूस नाम का यह जानवर इतना खतरनाक बताया गया है कि लगभग पूरे वार्ड की गलियों और घरों के नीचे से जमीन को खोखला कर चुका है। जिसके कारण जहां जहां नया निर्माण कराया जाता है, वहां की सड़कें खड़ंजा सब धंस जाते हैं। जिसके कारण इस वार्ड कराए जाने वाले विकास कार्य वरदान के बजाय अभिशाप बन जाते हैं।

वार्ड के लोग बताते हैं कि जब से यह सीवर सिस्टम शुरू हुआ है, तब से घूस नामक यह जानवर जमीन के अंदर ज्यादा पैदा हो गया है। क्योंकि सीवर लाइन बिछाने के लिए जमीन की मिट्टी को खोदा जाता है। जिसके बाद सीवर लाइन बिछा दी जाती है। खुदाई के समय नरम हो चुकी मिट्टी इस जानवर के लिए एक आसान जरिया बन जाती है।

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शुऐब कुरैशी बताते हैं कि उनके घर के आसपास नालों से लेकर खड़ंजों तक में इस जानवर ने बहुत सारे गड्ढे कर रखे हैं। हद तो यह है कि घूस नाम का यह मांसाहारी जानवर लाठी-डंडे या किसी शोर-शराबे से डरकर भागने के बजाय सामना करने के लिए तैयार रहता है। वार्ड के लोगों का कहना है कि पांच साल पहले हुए परिसीमन में यह वार्ड-66 भाटवाड़ा से अलग करके बनाया गया है।

जिसमें पहली बार पार्षद के रूप में चुनी गर्इं सलमा मलिक और उनके पति सलीम मलिक ने नगर निगम की विभिन्न योजनाओं को अपने वार्ड में लागू कराने का प्रयास किया है। वार्ड में पहली बार पेयजलापूर्ति के लिए तीन नलकूप लगाए गए हैं, नाली खड़ंजा और स्ट्रीट लाइट के काम को लेकर भी वार्डवासी संतोष जताते दिखे, लेकिन इनके जगह-जगह से बैठ जाने की समस्या के स्थायी समाधान के लिए घूस जैसे जानवर से निजात दिलाने के लिए विशेषज्ञों की टीम से सर्वे कराने की मांग भी उन्होंने प्रमुखता से उठाई है।

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