- सिर्फ भैंसाली मैदान के बाहर खिलौनों और गुब्बारों की दुकानों को अनुमति
- हर साल गुलजार रहने वाला दिल्ली रोड और सूरजकुंड में सन्नाटा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोरोना ने लोगों की उम्मीदों पर भले ही ब्रेक लगाया है लेकिन उनकी खुशियों को भी तहस नहस करके रख दिया है। अनलॉक-5 में तमाम राहतें दी गई, लेकिन रामलीला और रावण दहन को लेकर जिस तरह से प्रशासन ने हाथ खींचे उससे बच्चों और दुकानदारों के सपने चकनाचूर हो गए।
इस बार दिल्ली रोड और सूरजकुंड पर सड़कों पर लगने वाला मेला नहीं लगा वहीं भैंसाली मैदान के पास पुलिस ने जरुर गुब्बारों और खिलौने वालों को छूट दे दी थी।
जीमखाना में रामलीला होने के बाद दशमी के दिन रामलीला मैदान में रावण दहन का कार्यक्रम भव्य तरीके से आयोजित होता था। इस मौके पर मेले का आयोजन किया जाता था।

मंडी से लेकर दिल्ली चुंगी तक सड़क के दोनों तरफ खिलौनों, खाने पीने के सामान, गुब्बारों, झूलों और रोजमर्रा के सामानों की सैकड़ों दुकानें लगती थी।
पुलिस को शाम चार बजे से ही रुट डायवर्ट करना पड़ता था। परतापुर, टीपी नगर, शताब्दीनगर, मोदीनगर, ब्रह्मपुरी, माधवपुरम आदि इलाकों के लोग मेले का आनंद लेने आते थे।
इसी तरह सूरजकुंड में रावण दहन के मौके पर फूलबाग कालोनी रोड पर दुकानों की भरमार लग जाती थी। ऐसे ही रजब बाजार, शास्त्रीनगर में के ब्लाक और डी ब्लाक तथा जेल चुंगी पर मेला नदारद रहा। दिल्ली रोड पर सुबह से शाम तक सन्नाटा रहा।
प्रशासन ने रामलीला मैदान में 50 लोगों को अनुमति दी थी। इस कारण सड़क पर दुकान लगाने की अनुमति नहीं दी गई। कोरोना से बचने के लिये उठाये गए प्रशासनिक कदमों के कारण उन सैंकड़ों दुकानदारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया जो मेले के लिये काफी समय से तैयारी करके बैठे हुए थे। उन बच्चों के भी सपने टूटे जो हर साल अपनी पसंद के खिलौने और स्वादिष्ट खाना खाने के लिये सुबह से प्लानिंग में लग जाते थे।

