Saturday, March 21, 2026
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एसएमएस से मिलने वाली पर्चियों से वंचित हैं 2117 किसान

  • उप गन्ना आयुक्त ने किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेरठ परिक्षेत्र में 2117 किसान ऐसे हैं, जिनको किसी न किसी तकनीक कारण से एसमएस के जरिये मिलने वाली पर्चियों से वंचित होना पड़ रहा है। इसके लिए उप गन्ना आयुक्त की ओर से एक एडवाइजरी जारी की गई है। गन्ना किसानों की आपूर्ति संबंधी व्यवस्था को सुगम बनाये जाने के दृष्टिगत गन्ना विकास विभाग पेराई सत्र 2022-23 में एसएमएस के माध्यम से पर्ची किसानों के मोबाइल पर प्रेषित की जा रही है।

इस सन्दर्भ में परिक्षेत्र-मेरठ के उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र ने बताया कि वर्तमान में 363 किसानों के मोबाइल में इनकमिंग सेवा उपलब्ध नहीं है। 120 गन्ना किसानों के मैसेज इनबाक्स खाली नहीं है, 102 किसानों के मोबाइल नम्बर कार्यशील नहीं है। इसी तरह 521 किसानों का मोबाइल नेटवर्क में नहीं है तथा 144 गन्ना किसानों के मोबाइल नम्बर अमान्य/गलत है। वहीं 735 गन्ना किसानों के मोबाइल नम्बर स्वीच आॅफ पाया गया, जबकि 132 किसानों के मोबाइल रिचार्ज नहीं है। जिसके कारण एसएमएस गन्ना पर्ची फेल हो रहीं हंै।

उपरोक्त ऐसे कृषकों से उप गन्ना आयुक्त, मेरठ ने अपील किया है कि समस्त गन्ना कृषक बन्धु अपना मोबाइल इनबाक्स खाली रखें, मोबाइल रिचार्ज कराकर नेटवर्क में रहें, मोबाइल बन्द न करें, अगर मोबाइल नम्बर गलत है तो अपने गन्ना पर्यवेक्षक व समिति सचिव से मिलकर अपडेट करा लें। अन्यथा डीएनडी एक्टिवेट होने पर एसएमएस पर्ची का सन्देश 24 घंटे बाद स्वत: निरस्त हो जायेगा।

जिसके कारण किसानों को अपने गन्ना पर्ची की जानकारी नहीं प्राप्त हो पायेगी। इसलिए सभी किसान भाइयों से पुन: अनुरोध है अपनी समय से पर्ची प्राप्त करने के लिए मोबाइल को अपडेट रखें। उप गन्ना आयुक्त मेरठ ने परिक्षेत्र के समस्त किसानों से अनुरोध किया है कि कृषक स्मार्ट गन्ना किसान पर अपने पंजीकृत मोबाइल नम्बर को घर बैठे आॅन लाइन जांच कर लें। जिससे एसएमएस गन्ना पर्ची समय से प्राप्त हो सके।

यदि मोबाइल नम्बर गलत है तो उसे अवश्य ठीक करा लें। उन्होंने बताया कि गन्ना किसानों की समस्त सूचनाएं आॅन लाइन गन्ना विकास के पोर्टल पर उपलब्ध हैं। किसान आॅन लाइन के माध्यम से घर बैठे जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में परिक्षेत्र-मेरठ में लगभग पांच लाख किसान गन्ना आपूर्ति कर रहे हैं। इन किसानों को गन्ना माफियाओं से निजात मिल रही है। अब किसानों की पर्ची फटने, पर्ची धुलने/गलने आदि की समस्याओं से छुटकारा मिल गया है। परिक्षेत्र के किसान इस तकनीक का भरपूर लाभ उठाए।

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