जनवाणी संवाददाता |
मोरना: तीर्थनगरी शुकतीर्थ स्थित ध्यान योग आश्रम एवं आयुर्वेद शोध संस्थान में तीन दिवसीय योग शिविर के समापन अवसर पर योगाभ्यास कराया गया व सुन्दर भजन संध्या के उपरांत जीवन रहस्यों के बारे में विस्तार प्रकाश डालकर सफलता के मार्ग बताये गये। साधु सन्तों द्वारा कथा व्यास का सम्मान किया गया तथा भाजपा के क्षेत्रीय मन्त्री अमित राठी द्वारा आश्रम में नवनिर्मित औषधालय का लोकार्पण किया गया।
हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन से आए योगऋषि ब्रह्ममूर्ति योगतीर्थ महाराज ने कहा कि अधिक ज्ञान से अच्छा है, अधिक प्रयोग करना चाहिये। अधिक जानकारी प्राप्त कर बुद्धि क्षीण हो जाती है। मन भ्रमित हो जाता है। योग अधिक ज्ञान को नहीं कहता। प्रयोग से अनुभव प्राप्त होता है।
मनुष्य को आन्तरिक खोज करनी चाहिये। स्वयं की खोज कर उसके विकार दूर होंगें। मनुष्य परिधि से जुड़ा है तो वह स्वतन्त्र नहीं है। स्वतंत्र होकर ही सुखी होगा जो शिक्षा मनुष्य को मुक्त नहीं करती वह व्यर्थ है। सीमाओं में बंध जाना दुख का कारण है। योग सीमाओं से मुक्त करता है। योग साधना जीवन के रहस्य को खोलती है। पथभ्रष्ट व्यक्ति केवल अपने लाभ व दूसरों की हानि के बारे में ही सोचना है।
सूर्य का प्रकाश घर-घर दस्तक नहीं देता, वह केवल प्रकट होता है तो चारों ओर प्रकाश फैल जाता है। योग साधक का जीवन भी उसी प्रकार है। योग की सारी खोज ठहरने की है, जो ठहरा हुआ है। उसी के पास ऊर्जा का भण्डार है। आज जीवन का नहीं मृत्यु का विस्तार हो रहा है।
अनेक अनावश्यक विषयों पर खोज की जारी है। जो मृत्यु की ओर ले जा रहे हैं। योग साधना अध्यात्म की ओर ले जायेगी और अध्यात्म शांति लायेगा। मृत्यु से दूर करेगा। धन मेरा है, इस भावना से धन अपना नहीं होता है। धन को पराया मानने से ही वह आनन्द देगा। दूसरों को झुकाने वाले खतरनाक होते हैं। जो झुकने की राह पर हैं वह ही आनन्द में होगा। शिष्य का अर्थ है जो स्वेच्छा से झुकने को राजी हो गया।
स्वयं को जानना कि तुम किस श्रेणी में हो, झुकने वाली श्रेणी में या झुकाने वाली श्रेणी में हो। शिविर को मां पूर्णा गिरी मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी गोपाल महाराज, स्वामी ओमदेव महाराज, स्वामी योगव्रत महाराज ने भी संबोधित किया। शिविर में श्रद्धालुओं को योगाभ्यास भी कराया गया।
कार्यक्रम में हरप्रसाद सैनी, आचार्य ओमेंद्र देव, भीमनाथ, प्रो. सतेन्द्र आर्य, सुमनपाल आर्य, सुरजीत सिंह हिसार, विक्रम करनाल, सोमानन्द, जयप्रकाश वर्मा, जितेन्द्र आर्य, विपिन कुमार, आदित्य महाराज, बबलू, वेदपाल, ओमपाल आदि मौजूद रहे।

