Saturday, March 14, 2026
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अब मधुमेह के मरीज भी खा सकेंगे ‘मसूरी’

  • बासमती धान की प्रजाति में है गुणों का समावेश
  • प्रोटीन लगभग 14 प्रतिशत, फाइबर की मात्रा भी अव्वल

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान मनीला फिलीपींस के वैज्ञानिक नेसे श्रीनिवासनुलु द्वारा व्याख्यान दिया गया। कृषि महाविद्यालय के सभागार में शोध छात्रों बीएससी एमएससी के छात्रों तथा वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए डा. श्रीनिवासनुलु ने कहा इस पूरे विश्व में देखा गया है कि चावल में स्टार्ट अधिक होने के कारण मधुमेह से पीड़ित रोगी चावल नहीं खाते हैं या फिर बहुत कम खाते हैं, क्योंकि चावल खाना उनके लिए हानिकारक होता है।

भोजन लेने के 20 मिनट के अंदर रक्त के अंदर ग्लूकोज की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। किसी भी अनाज के इस गुड को अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स कहा जाता है। क्योंकि पूरे विश्व में चावल पर निर्भरता सबसे अधिक है और यह बहुत अधिक मात्रा में उपलब्ध भी है। इसलिए लोग चावल का अधिक से अधिक सेवन करते हैं, लेकिन वही यह चावल मधुमेह रोगियों के लिए हानिकारक साबित होता है और लोग इसको नहीं खाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान मनीला फिलीपींस के वैज्ञानिक नेसे श्रीनिवासनुलू द्वारा भारत में प्रचलित बासमती धान की प्रजाति मसूरी के अंदर इस प्रकार के गुणों का समावेश किया गया है कि उसमें प्रोटीन लगभग 14% फाइबर की मात्रा भी अधिक है। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. केके सिंह ने कहा कि मनीला द्वारा चावल के क्षेत्र में सराहनीय शोध किए जा रहे हैं। इसका लाभ भारत के किसानों को भी मिल रहा है।

उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि वह ऐसी प्रजाति का विकास करें जो कम पानी में तथा क्लाइमेट चेंज के दौरान भी अच्छा उत्पादन कर सके। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान मनीला के परामर्शदाता डा. यूएस सिंह ने कहा कि यह संस्थान भारत में भी अच्छा कार्य कर रहा है। भविष्य में किसानों को बासमती धान की और अधिक गुणवत्ता युक्त प्रजातियां मिल सकेंगी।

इस प्रशिक्षण के संयोजक प्रो. रामजी सिंह ने कहा कि छात्रों को चाहिए कि अपने शोध कार्यों में ऐसी तकनीकी और कार्यों को तूने जिस से पश्चिम उत्तर प्रदेश के ही नहीं पूरे देश के किसानों के लिए शोध कार्य उपयोगी हो। इस दौरान निदेशक ट्रेनिंग प्लेसमेंट प्रो. आरएस सेंगर अधिष्ठाता हॉर्टिकल्चर डा. विजेंद्र सिंह, डा. यूपी शाही, डा. पूरन चंद, डा. वैशाली, डा. मुकेश कुमार, मनोज यादव, डा. कमल खिलाड़ी, डा. गोपाल सिंह आदि मौजूद रहे।

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