Wednesday, May 6, 2026
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यात्रा के बाद कितने बदले राहुल

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himanshu joshiराहुल गांधी के जीवन को अब हम दो भागों में बांट सकते हैं, भारत जोड़ो यात्रा से पहले और बाद के राहुल गांधी। राहुल गांधी में हुए बदलावों को पूरा देश देख रहा है और भारतीय लोकतंत्र के लिए यह सही भी है। 7 फरवरी को हुए लोकसभा के बजट सत्र में राहुल गांधी ने लम्बा भाषण दिया था और भाजपा सरकार पर कई निशाने साधे। उन्होंने अडानी को लेकर सरकार को घेरा तो अपनी भारत जोड़ो यात्रा से मिले अनुभवों का भी हवाला दिया। इसके छह दिन बाद अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड में राहुल गांधी ने कहा कि इस देश में क्या हो रहा है, जानने के लिए हर किसी के लिए संसद की कार्यवाही देखना महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने संसद पर बोले अपने शब्दों के बारे में यह भी कहा कि मुझे उम्मीद नहीं है कि मेरे शब्दों को रिकॉर्ड पर जाने दिया जाएगा। राहुल अब पहले से एकदम अलहदा व्यक्ति हैं। अपनी बात को इतनी मजबूती से रखते हुए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को देश की जनता ने शायद ही पहले कभी देखा था।

भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल में यह बदलाव देखने को मिला है। यह यात्रा अन्याय के खिलाफ भारत के लोगों की आवाज को एकजुट करने का आंदोलन था, जिसमें राजनीतिक दलों, सामाजिक कार्यकतार्ओं, लेखकों, कलाकारों व आम लोगों द्वारा महंगाई, बेरोजगारी के खिलाफ आवाज उठाई गई। राहुल गांधी में इस यात्रा के दौरान एक नेता के तौर पर काफी निखार देखने को मिला। इस यात्रा में चलते हुए राहुल गांधी ने क्षेत्रीय लोगों की समस्याओं को जाना और उन पर चर्चा भी की।

मीडिया के साथ भी राहुल गांधी का नया संबंध देखने को मिला। हालांकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर राहुल गांधी की इस यात्रा की कवरेज बहुत कम हो रही थी, लेकिन न्यूज वेब पोर्टल और यूट्यूब चैनल चला रहे कई सारे पत्रकार राहुल गांधी की इस यात्रा को जोर शोर से कवर कर रहे थे।

यात्रा में राहुल गांधी ने अपनी ऐसी छवि बनाई कि पत्रकार उनसे खुलकर बात कर सकते हैं, कई पत्रकार उनके साथ चलते हुए साक्षात्कार ले रहे थे। हरियाणा में राहुल गांधी ने कहा भी कि मुझसे जो भी सवाल पूछना चाहते हैं पूछ सकते हैं, उन्होंने एक सवाल पर यह भी कहा कि ‘ऐसा सवाल मोदी से पूछने की हिम्मत है।’

चुनाव की राजनीति करने वाले सभी दलों का एक ही चरित्र है और कांग्रेस उससे कतई जुदा नहीं है। कहा जाए तो कांग्रेस और भाजपा में कोई विशेष अन्तर नहीं रह गया है। भ्रष्टाचार के मामले में दोनों एक जैसे हैं। कहने को भाजपा अंध राष्ट्रवाद वाली पार्टी है और कांग्रेस धर्म निरपेक्ष। मगर यदि सचमुच ऐसा है तो क्यों इन दो दलों में लोग इतने सहज ढंग से एक दूसरे में आना-जाना करते रहते हैं? क्या आजादी के आंदोलन की विरासत संभालने का दावा करने वाली कांग्रेस से अंध राष्ट्रवाद वाली भाजपा में जाने वालों को जरा भी अटपटा नहीं लगता। इसके उलट भी कहा जा सकता है कि भाजपा से कैसे लोग इतने आराम से कांग्रेस में आ सकते हैं।

राहुल गांधी के निजी जीवन पर लोगों की इतनी रुचि कभी नहीं रही, जितनी इस यात्रा के दौरान देखने को मिली। यात्रा में उनके रहने की जगह, उनके कपड़े, उनका खाना, रंग रूप चर्चा का विषय बना रहा। ‘कर्ली टेल्स’ को अपने निजी जीवन पर दिया गया राहुल गांधी का इंटरव्यू यूट्यूब पर अब तक लगभग नौ लाख बार देखा जा चुका है। गांधीवादी कनक तिवारी भारत जोड़ो यात्रा पर बेहद करीब से नजर बनाए हुए थे।

उन्होंने ‘शतदल रेडियो’ से अपनी बातचीत में राहुल गांधी के प्रति बढ़ रहे आकर्षण के कारणों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि ‘राहुल गांधी के अंदर पद का लालच नहीं दिखता। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ा और फिर उसे पाने का प्रयास नहीं किया। अपने पिता के हत्यारों को माफ करना बहुत बड़ी बात है, जिस पर लोगों का ज्यादा ध्यान नहीं गया।

’ भारत जोड़ो यात्रा से हुए बदलाव पर कनक तिवारी कहते हैं कि ह्यराहुल गांधी पैदल चलकर लोगों से मिलने वाली खत्म होती राजनीतिक प्रथा पर वापस लौटे हैं। दिन में चार बार कपड़े बदलने की जगह पच्चीस किलोमीटर पैदल चलने को कोई भी दिखावा नहीं कह सकता है। उन्होंने मतदाताओं को सम्मान देते हुए ह्यस्पर्शह्ण को महत्व दिया। राजनीति में स्पर्श बहुत महत्व रखता है, आजकल आप विधायकों को भी स्पर्श नहीं कर सकते पर मतदाता यहां पर राहुल गांधी जैसे बड़े नेता को स्पर्श कर रहे थे।

यह यात्रा जनतांत्रिक भावना से की गई यात्रा थी, जो किसी पार्टी के खिलाफ नहीं थी, इसमें जनता के मुद्दे सड़क पर उठाए गए। जिसमें बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा पर बात की गई। इस यात्रा का शायद वोट बैंक पर कोई असर न पड़े लेकिन लोकतंत्र में वोट बैंक महत्व नहीं रखता, लोकतंत्र में लोकतंत्र की भावना बढ़ने का महत्व है। इस यात्रा के चलते समय और इस यात्रा के बाद भी सत्तापक्ष को राहुल गांधी के बयानों का जवाब ढूंढते नहीं मिल रहा है।

यात्रा के दौरान सत्ताधारी पार्टी राहुल गांधी की टीशर्ट के बारे में सवाल करती रही तो उसके जवाब में राहुल गांधी ने जम्मू कश्मीर में कहा कि सफेद शर्ट का रंग बदल दें, लाल कर दें। संसद में भी राहुल गांधी की भ्रष्टाचार पर की गई ठोस बातों का भी सत्तापक्ष के पास कोई जवाब नहीं रहा जबकि वह राहुल गांधी पर निजी तौर पर हमला करते रहे। यह सब राहुल गांधी के अंदर इस यात्रा से उत्पन्न हुए नए नजरिए का परिणाम दिखता है।

रंगमंच, हिंदी फिल्मों और वेब सीरीज के जानेमाने कलाकार अरुण कालरा से भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी के इस नए नजरिए पर बात की गई, साथ ही उनसे भारत जोड़ो यात्रा के समर्थन का कारण भी पूछा गया।
इस पर अरुण कालरा ने कहा कि ‘मुझसे कुछ लोग बोलते हैं कि आप भारत जोड़ो यात्रा का समर्थन करते हैं तो आप कांग्रेसी हैं और ये यात्रा महज एक मजाक भर है।

यात्रा से भला क्या देश जुड़ेगा और इस यात्रा से राहुल गांधी ने कुछ नहीं सीखा है, वो तो वैसी ही अजीबोगरीब बातें कर रहे हैं, जैसे पहले करते थे। कालरा कहते हैं कि मेरी समझ में भारत जोड़ो यात्रा आज की मतलब परस्ती की राजनीति से अलग होकर एक ऐसा संदेश देशवासियों तक पहुंचाने की चेष्टा है, जिसे कुछ दल हमारे जहन से मिटाना चाहते हैं और वो संदेश है भाईचारे का। इस देश में रहने का असली मजा यही है कि इसमें अनेकता में एकता है और सब साथ मिलकर रहते हैं।

यह बात चाहे राहुल गांधी करें या कोई भी अन्य व्यक्ति, मैं उसके साथ डट कर खड़ा हूं।’ राहुल गांधी ने इस यात्रा या अपने पिछले अनुभवों से कुछ सीखा हो या ना सीखा हो पर उन्होंने मीडिया का सामना करना तो सीख ही लिया है। जरूरी नहीं कि उनके पास सब सही जवाब हों पर कम से कम मुश्किल प्रश्नों का सामना करने की दिलेरी तो अब उनमें दिखती ही है। उनकी यही दिलेरी और नया नजरिया ही सत्ताधारी दल के लोगों के बीच परेशानी का कारण है।


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