Tuesday, May 26, 2026
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कुट्टू क्या है, व्रत में क्यों इसे खाने की है परंपरा?

  • कुट्टू एक फल है जो हिमालय की पहाड़ियों पर उगता है, यह काफी पौष्टिक होता है

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आमतौर पर वृत के दौरान खाए जाने वाले कुट्टू का आटा काफी पौष्टिक होता है। इस वजह से शरीर में पोषक तत्वों की पूर्ती करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। लेकिन वृत के समय कीमत व मांग ज्यादा होने की वजह इसमें मिलावट होने की संभावना ज्यादा रहती है।

कुट्टू एक फल है जो हिमालयी क्षेत्र के पहाड़ों में ही पाया जाता है। यह भारत के जम्मू-काश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड व दक्षिण के नील गिरी में जबकि नॉर्थ ईस्ट राज्यों में उगाया जाता है। यह अन्न नहीं होता इसलिए भारत में इसे वृत के दौरान खाया जाता है। इसका फल तिकोने आकार का होता है और यह पोलीगोनेसिएई परिवार का पौधा है।

इसके फल को पीसकर आटा जैसा पदार्थ मिलता है इसी वजह से इसे कुट्टू का आटा (बकव्हीट) कहा जाता है। यह काफी पौष्टिक होता है और इसमें मैग्नीशियम, विटामिन-बी, आयरन, कैल्शियम, फॉलेट, जिंक, कॉपर, मैग्नीज व फासफोरस काफी मात्रा में पाया जाता है। इसी वजह से वृत के दौरान अन्न की कमी से शरीर में आने वाली ऊर्जा की कमी को इसके द्वारा पूरा करने का चलन है।

मिलावट से यह शरीर के मुख्य अंगों को करता है प्रभावित

मेडिकल के फिजिशियन डा. अरविंद कुमार का कहना है कुट्टू के शुद्ध आटे से कभी नुकसान नहीं होता। लेकिन इसमें मिलावट होने के बाद यह शरीर के कई मुख्य अंगों को प्रभावित कर सकता है। लेकिन इसमें क्या मिलाया गया है इसपर ही निर्भर करता है कि यह कितना घातक हो सकता है।

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मिलावटी कैमिकल्स को टॉक्सिन कहा जाता है इसकी जांच होने पर ही पता चलता है कि कौन सा कैमिकल मिलाया गया है। कई टॉक्सिन ऐसे होते है जो किडनी को डैमेज कर सकते है, कुछ ऐसे है जो लंबे समय के बाद दिल के दौरे की वजह बन सकते है। किसी भी मिलावटी पदार्थ का सेवन करने से दो तरह का असर होता है एक होता है 24 घंटे के भीतर ही असर करना

जिसमें उल्टी-दस्त, जी मिचलाना, पेट में दर्ज, डिहाइड्रेशन, बीपी लो होना व नर्वसनेस आदि। जबकि दूसरा असर वह होता है जिसका असर लंबे समय बाद सामनें आता है जिसे क्रॉनिक साइड इफेक्ट कहा जाता है। इस वजह से ही किडनी, लीवर व दिल को खतरा पैदा होता है। शरीर के यही तीन मुख्य अंग है जिनपर असर पड़ता है जो काफी घातक है।

मरीज को तरल पदार्थ देनें चाहिए, शहद होता है रामबाण

मशहूर वैद्य व आयुर्वेदाचार्य बृज भूषण शर्मा प्रादेशिक महामंत्री आयुर्वेद उप्र का कहना है रखे हुए कुट्टू के आटे का सेवन घातक हो सकता है। कुट्टू के फल को पीसते समय यदि कोई भी मिलावट हो जाती है तो वह भी हानिकारक है। इसका सीधा असर इंसान के पेट पर पड़ता है जिससे उल्टियां लगती है, लूज मोशन होने लगते है।

इसके साथ ही यदि कोई भी बैक्टीरिया कुट्टू के आटे में चला जाता है तो भी यह खाने लायक नहीं होता। यदि अलग-अलग घरों में रहने वाले लोग बीमार हुए है तो सौ प्रतिशत आटे में ही इंफैक्शन हुआ है। लेकिन यदि एक घर में बने खाद्य पदार्थो को अन्य घरों में भी बांटा गया है तो यह खाद्य सामाग्री बनाने में लापरवाही हो सकती है। मिलावट करने वाले कई बार गेंहू में रखनें वाली गोली को भी इसमें रखते है जो खतरनाक है।

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कई बार कुट्टू के फल को पीसते समय उसके साथ पत्थर को भी पीस दिया जाता है यह जांच का विषय है। कुट्टू के आटे का सेवन करने के बाद मरीज को एक-एक घूंट तरल पदार्थ देना चाहिए, सॉलिड खाद्य पदार्थ बिल्कुल नहीं देने चाहिए। साथ ही मरीज को अस्पताल में भर्ती करने के बाद नसों द्वारा आइवी फ्लूट दिया जाता है।

क्योंकि इसका असर सीधा खून पर पड़ता है तो तरल पदार्थ ही देनें चाहिए जैसे गुनगुना पानी, पानी में ग्लूकॉन-डी, इलेक्ट्राल व ओआरएस का घोल देना चाहिए। शहद का काफी अच्छा प्रभाव रहता है, इसे आयुर्वेद में अमृत कहा गया है कोशिश करें कि मरीज को ताजा शहद दिया जाए लेकिन कम मात्रा में।

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