Saturday, March 14, 2026
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छह माह में भी जांच प्रक्रिया फाइलों में कैद

  • गांधी आश्रम की बेशकीमती जमीन को कब्जाने की चल रही थी नूराकुश्ती

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: गांधी आश्रम की सम्पत्ति विवाद को लेकर प्रशासन ने एक जांच छह माह पहले चालू की थी। जांच फाइलों में चल रही हैं, लेकिन अभी तक पूरी नहीं हो पाई। आखिर कहां अटकी है जांच के नाम पर फाइल? दरअसल, गांधी आश्रम की करोड़ों की जमीन हैं, जो शहर के बीच में आ चुकी हैं।

इस जमीन को लेकर कुछ लोगों की गिद दृष्टि लगी हुई हैं, जिसको लेकर विवाद खड़ा हुआ हैं। यही नहीं, गांधी आश्रम से जुड़े कुछ पदाधिकारी इस जमीन को नीलाम करने की कई बार कोशिश कर चुके हैं। इसके बाद एफआईआर भी हुई, लेकिन जमीन कब्जाने की कोशिश में लगे लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई। एफआईआर दर्ज जिनके खिलाफ हुई, उनकी गिरफ्तारी भी नहीं हुई।

तत्कालीन एसडीएम को गांधी आश्रम की जमीन को लेकर जांच सौंपी गई थी। जांच छह माह पहले सौंपी गई, लेकिन जांच अभी तक पूरी क्यों नहीं हुई? यह बड़ा सवाल हैं। करोड़ों की सम्पत्ति को लेकर बार-बार कब्जाने के प्रयास भी हुए, फिर भी प्रशासन मौन साधे हुए हैं। ऐतिहासिक जमीन को क्षति भी पहुंचाई गयी। बिल्डिंग की एक मंजिल को खुर्द-बुर्द भी कर दिया गया, लेकिन इस पूरे ड्रामे को प्रशासन आंख मूंदकर देखता रहा।

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कोई कार्रवाई प्रशासन नहीं कर पाया। प्रशासन के बाद कई पत्र जब लखनऊ स्तर से आये तो इसके बाद ही इसकी जांच एसडीएम को सौंपी गई। जांच फाइलों में चल रही हैं, लेकिन मौके पर कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई। जिम्मेदारों पर कार्रवाई करते हुए आखिर प्रशासन क्यों बच रहा हैं? आरोपियों पर शिकंजा क्यों नहीं कसा जा रहा हैं, ये बड़ा सवाल हैं। एक मंजिल को क्षतिग्रस्त करने वालों पर प्रशासन ने कार्रवाई क्यों नहीं की?

आयोग की तरफ से भी जांच के नाम पर पूरे प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आखिर इसमें आयोग सख्ती क्यों नहीं दिखा रहा हैं। गांधी आश्रम की करोड़ों की सम्पत्ति पर जिन लोगों की निगाहें लगी हुई, उन पर कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही हैं। इसमें कहीं न कहीं खादी आयोग भी जिम्मेदार हैं, तभी तो आरोपियों के हौंसले बुलंद हैं, जिसके चलते जमीन पर कब्जे के कई बार प्रयास किये जा चुके हैं।

डिप्टी रजिस्ट्रार पर भी इस मामले में आरोप लग चुके हैं। गांधी आश्रम समिति के चुनाव को लेकर भी खेल किया जा रहा हैं। डिप्टी रजिस्ट्रार ने पहले समिति भंग कर दी, लेकिन फिर चुनाव कराये जा रहे हैं, लेकिन जिन लोगों पर घालमेल करने का आरोप लगा हैं, उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया गया। उनको भी मतदान करने की छुट दे दी गई हैं, इसको लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति व्यक्त की हैं।

उनका कहना है कि समिति के जिम्मेदारों को अयोग्य घोषित किया जाए। उनको समिति चुनाव से दूर रखा जाए, लेकिन डिप्टी रजिस्ट्रार इसको लेकर मौनी बाबा बने हुए हैं। इतना बड़ा खेल खादी आश्रम की करोड़ों की सम्पति कब्जाने को लेकर कोई न कोई हथकंड़े अपनाये जा रहे हैं, लेकिन आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही हैं।

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