Sunday, April 5, 2026
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बॉलीवुड फिल्मों के जन्मदाता मुंबई के फिल्म स्टूडियोज

CINEWANI


मुंबई का असल ग्लैमर, बॉलीवुड की वजह से है। यहां हर साल अनेक फिल्मों का जन्म होता है इसलिए लोग इसे सपनों का शहर कहते हैं। ग्लैमर और प्रसिद्धी पाने के लिए इससे अच्छा शहर शायद हिंदुस्तान में कोई दूसरा नहीं है। 104 साल के भारतीय सिनेमा में मुंबई की कई लोकेशन्स और डेढ़ दर्जन से ज्यादा स्टूडियोज में किसी की आंखों द्वारा देखे गये सपने पूरे होते हैं। इन स्टूडियोज ने हजारों फिल्मों को जन्म दिया है।

1943 में मुंबई के उपनगर गोरेगाव (पश्चिम) में फिल्म निर्माता शशधर मुखर्जी और अशोक कुमार द्वारा स्थापित ‘फिल्मिस्तान स्टूडियो’ मुंबई का सबसे पुराना फिल्म स्टूडियो है। इसमें 14 स्टेजेज, अस्पताल, जेल और पुलिस स्टेशन के स्थाई सेट्स बने हुए हैं। इस स्टूडियो से सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने कैरियर की शुरुआत की।

बॉलीवुड की ब्लॉक बस्टर ‘शहीद’, ‘जंजीर’, ‘ओम शांति ओम’ और ‘रॉ वन’ जैसी न जाने कितनी ही फिल्मों की शूटिंग इस स्टूडियो में हुई। टीवी शो ‘इंडियन आयडल’ और ‘नच बलिये’ के ज्यादातर एपीसोड इस स्टूडियो में शूट किये गये।

1958 में शशधर मुखर्जी ने फिल्मिस्तान स्टूटियो की अपनी पार्टनरशिप तोलाराम जालान को बेचकर अपना स्टूडियो ‘फिल्मालय’ बनाया जो अब अस्तित्व में नहीं है।
1946 में शिराज अली हाकिम ने मुंबई के सबसे ज्यादा प्रसिद्ध टूरिस्ट स्पॉट हाजी अली के सामने बने महालक्ष्मी रेसकोर्स के ठीक पीछे फेमस स्टूडियो की स्थापना की थी।

आजादी के बाद इसे फाइनेंसर मिस्टर रूंगटा ने खरीद लिया। इस स्टूडियो में ‘ताज महल’, ‘सीता और गीता’, ‘कन्यादान’, ‘हम साथ साथ हैं’ जैसी न जाने कितनी फिल्में फिल्मांकित की गई। इसमें रिकार्डिंग स्टूडियो, प्रिव्यू थियेटर के अलावा 9 शूटिंग फ्लोर हैं। इसमें फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन की भी सुविधा उपलब्ध है।

इस स्टूडियो की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पर फिल्मांकन के उपयोग में लाए जाने वाले इक्विपमेंट किराए पर भी दिए जाते हैं। बॉलीवुड के लीजेंडरी निमार्ता निर्देशक और एक्टर राज कपूर द्वारा पूर्वी मुंबई के उप नगर चैंबूर में आरके फिल्म स्टूडियो की स्थापना 1950 में की थी।

इस स्टूडियो में राज कपूर ने ‘आवारा’, ‘श्री 420’, ‘जिस देश में गंगा बहती है’ और ‘मेरा नाम जोकर’ जैसी न जाने कितनी यादगार फिल्मों का निर्माण किया। राजकपूर की मौत के बाद रख रखाव के अभाव में अब आर,के. स्टूडियो उजाड़ सा हो चुका है।
फिल्ममेकर महबूब खान ने 1954 मेंं बांद्रा पश्चिम के हिल रोड पर करीब20 हजार स्कावयर यार्ड में मेहबूब स्टूडियो की स्थापना की थी।

यह फिल्मसिटी और कमालिस्तान के बाद मुंबई का तीसरा सबसे बड़ा स्टूडियो है। इसमें रिकार्डिंग स्टूडियो व मेकअप रूम भी है। इसमें ‘मदर इंडिया’, कागज के फूल’, ‘गाइड’ जैसी अनेक हिट और यादगार फिल्मों को फिल्मांकित किया गया। गुरूदत्त, देव आनंद, नासिर हुसैन जैसे फिल्म मेकर का यह पसंदीदा स्टूडियो था।

अमिताभ बच्चन के लिए महबूब स्टूडियो इस मायने में यादगार रहा है, क्योंकि 1968 में पहली बार इस स्टूडियो में उनकी सुनील दत्त और नर्गिस दत्त के साथ मुलाकात हुई और उसके बाद उनका ‘रेशमा और शेरा’ के लिए स्क्रीन टेस्ट हुआ। सुनील दत्त वहां उस वक्त ‘पड़ोसन’ के लिए डबिंग कर रहे थे।

आज भी ‘महबूब स्टूडियो का जिक्र आते ही अमिताभ बच्चन फ्लैश बैक में चले जाते हैं। कमाल अमरोही ने 1958 में अंधेरी पूर्व में कमालिस्तान स्टूडियो का निर्माण किया था। इस में ‘मुगल ए आजम’, ‘पाकीजा’ ‘अमर अकबर एंथोनी’ जैसी फिल्मों की शूटिंग हुई।

मनमोहन देसाई और सुभाष घई इस स्टूडियो को खुद के लिए बेहद लकी मानते थे। सलमान खान की ‘दबंग’ और ‘दबंग 2’ अधिकांश शूटिंग इसी स्टूडियो में हुई थी। आजकल इसमें रोहित शेट्टी की ‘गोलमाल 4’ की शूटिंग चल रही है।
गोरेगांव पश्चिम में ग्रीन जोन में लगभग है। 500 एकड़ से भी ज्यादा एरिया में फैला हुआ फिल्मसिटी मुबई का एक मात्र सरकारी स्टूडियो है।

1977 में स्थापित फिल्मसिटी अपने नाम को चरितार्थ करते हुए अपने आप में किसी बड़े शहर की तरह है और इसमें फिल्मों की पूरी दुनिया बसी है। पिछले चार दशक से मुंबई में बन रही ज्यादातर फिल्मों की शूटिंग इसी स्टूडियो में की जाती है। ‘लावारिस’, ‘कर्ज’, ‘चांदनी’, ‘दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे’, 3 ईडियट्स और ‘क्रिश’ जैसी नामचीन और कामयाब फिल्में इसी में बनीं।

यहां टीवी सीरियल के फिल्मांकन की भी सबसे अच्छी व्यवस्था है। 2001 में इसका नाम बदलकर ‘दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी’ कर दिया गया। फिलहाल इसमें 16 स्टूडियो और 42 आउट डोर लोकेशंस हैं जिसमें गार्डन, लेक और टेंपल ,हेलीपेड नदी, झरने और तालाब सब कुछ मौजूद हैं। इनके अलावा मुंबई में राज कमल, मोहन और सेठ स्टूडियो भी हुआ करते थे, लेकिन अब वे अस्तित्व में नहीं हैं।

सुभाष शिरढोनकर


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