Monday, June 8, 2026
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कैंट बोर्ड के पार्कों पर लाखों खर्च, फिर भी पार्क पर अवैध कब्जे

  • सीईओ के आदेश पर महताब की मीट मार्केट पर चला था कैंट का बुलडोजर
  • बोर्ड बैठक में सदस्यों ने किया था मुक्त करायी जगह पर तिकोना पार्क निर्माण का प्रस्ताव पास

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: लाखों का भारी भरकम खर्चा कराने के बावजूद भारत सरकार की करोड़ों कीमत की बेशकीमती जमीन पर कैंट बोर्ड स्टाफ की मिलीभगत से अवैध कब्जे हो गए। हैरानी की बात तो ये है कि दशकों पुराने जिस कब्जे को बामुश्किल हटाया जा सका था, उस जगह पर चंद महीनों पर स्टाफ ने दोबारा कब्जे करा दिए।

ये है पूरा मामला

दिल्ली रोड स्थित महताब के समीप भारत सरकार की जमीन पर अवैध कब्जे कर मीट मार्केट आबाद कर दी गयी थी। कैंट बोर्ड के तत्कालीन सीईओ डीएन यादव ने इन अवैध कब्जों का संज्ञान लिया और हिम्मत दिखाते हुए महताब के अवैध मीट मार्केट पर बुलडोजर चलवा कर करोड़ों की जमीन को मुक्त करा दिया था।

दिल्ली मेन रोड जैसी बेहर महंगी जिस जगह को मुक्त कराया गया था और वहां कैंट बोर्ड की बैठक में सदस्यों ने तिकोना पार्क बनाने का प्रस्ताव पास किया था वहां दोबारा कब्जे करा दिए गए। पार्क के लिए यहां दो-दो फीट की चारदीवारी करायी गयी थी। इसके लिए ठेकेदार को तब करीब दस लाख का भुगतान भी कर दिया गया था, लेकिन स्टाफ ने भूमाफियाओं से हाथ मिला लिया। पार्क के निर्माण का जो काम ठेकेदार से लाखों के भुगतान कर कराया गया था उसे भी बीच में रूकवा दिया गया। देखते ही देखते मीट मार्केट दोबारा आबाद हो गया।

प्रशासन को चुकानी पड़ी कीमत

कैंट बोर्ड स्टाफ की अवैध कब्जा करने वालों से मिलीभगत की कारगुजारी की कीमत जिला प्रशासन को चुकानी पड़ी थी। पिछले साल छह मार्च को सीईई के नेतृत्व में एक दस्ता अवैध कब्जे हटाने के लिए पहुंचा। इसकी शुरूआत बंगला 201 भूसा मंडी से की गयी। कैंट बोर्ड की कार्रवाई का लोगों ने विरोध किया। कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गयी।

महताब में हुए उपद्रव की गूंज नई दिल्ली के साउथ ब्लाक से लेकर लखनऊ जीओसी कार्यालय तक सुनाई दी गयी। महताब व भूसा मंडी इलाके में व्यापक आगजनी की गयी। उपद्रवियों ने दिल्ली रोड पर कई दुकानों को लूट लिया। गुजरने वाले वाहनों पर पथराव व फायरिंग की गयी। इस इलाके में दंगा सरीखा माहौल हो गया। जिसकी गूंज नई दिल्ली से लेकर लखनऊ तक सुनाई दी।

एडिशन डीजी और डायरेक्टर पहुंचे

कैंट स्टाफ की कारगुजारियों के चलते हुए उपद्रव के बाद रक्षा मंत्रालय के अधिकारी हरकत में आ गए। आनन-फानन में नई दिल्ली के डीजी आफिस से एडिशन डीजी सोमन यदगोल व पीडी कार्यालय लखनऊ से डायरेक्टर एसएन गुप्ता मेरठ आ धमके। उन्होंने घटना के कारणों की जांच की।

तत्कालीन सीईओ कैंट प्रसाद चव्हाण से तीन दिन के भीतर पूरे मामले पर रिपोर्ट भेजने को कहा। भूसा मंड़ी और महताब में आगजनी की घटना को लेकर जब डायरेक्टर एसएन गुप्ता मेरठ के तत्कालीन एसएसपी नितिन तिवारी से मिलने पहुंचे थे तो उन्होंने डायरेक्टर एसएन गुप्ता को नसीहत दी थी। साथ ही कैंट बोर्ड के स्टाफ की अवैध कब्जों के मामले में जांच कराए जाने को भी कहा था। दरअसल, आगजनी इतने बडे स्तर पर की गयी थी कि मेरठ में दंगा सरीखे हालात बन गए थे। जिला प्रशासन का मानना था कि इसके लिए कैंट बोर्ड के अवैध कब्जों व निर्माण में लिप्त रहने वाला स्टाफ जिम्मेदार था, लेकिन वहां एक बार फिर पुराने हालात बना दिए गए हैं।

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