Thursday, October 21, 2021
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कोरोना का साइड इफेक्ट: दिल्ली से आने वालों स्वास्थ्य विभाग की नजर

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  • प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग होम संचालकों से मांगी मदद

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: दिल्ली में कोरोना संक्रमण की तीसरे वेव के साइड इफेक्ट के चलते मेरठ आने वाले स्वास्थ्य विभाग के रडार पर रहेंगे। इसके लिए तैयारियां कर ली गयी हैं। वहीं, दूसरी ओर जो लोग दिल्ली से आ रहे हैं तथा जिनके यहां दिल्ली से आने वाले वाले मेहमान रूक रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की सर्विलांस टीम ऐसे लोगों की कंट्रेक्ट ट्रेसिंग करेगी।

दिल्ली व नोएडा में कोरोना संक्रमण मामलों में तेजी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संभावित संकट के चलते हालात से निपटने की अपनी रणनीति तैयार की है। मंडलायुक्त अनिता सी मेश्राम ने प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल प्रशासन व निजी नर्सिंग होम व मेडिकल कालेज संचालकों के साथ चर्चा कर हालात से निपटने की योजना पर चर्चा की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में कोरोना संक्रमण के तेजी से बेकाबू हो रहे हालातों का साइड इफैक्ट जिन इलाकों में पड़ना तय है उसमें मेरठ भी प्रमुख है। इसके चलते दिल्ली से आने वालों को चिन्हित करने का निर्णय लिया गया है। दरअसल मेरठ से प्रति दिन दिल्ली आने जाने वालों की बड़ी संख्या है।

कोरोना संक्रमण के मेनेजमेंट के नाम पर इन पर रोक लगाना लॉकडाउन में भी पूरी तरह से संभव नहीं हो कसा। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि अनलॉक की दशा में तो हालात और भी ज्यादा खराब होंगे। इसके चलते तमाम तैयारी की जा रही हैं। जो हालात बने हुए हैं उनके चलते स्वास्थ्य विभाग ने मदद के लिए निजी नर्सिंग होम व मेडिकल कालेज संचालकों के सामने झोली फैलायी है।

दरअसल बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए बजाय सरकारी अस्पतालों के निजी अस्पतालों की तरफ दौड़ रहे हैं। कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद से सरकारी अस्पतालों में आने वालों का ग्राफ कम हुआ है। वहीं, दूसरी ओर यदि निजी अस्पतालों खासकर शहर के वरिष्ठ चिकित्सकों के क्लीनिकों की बात की जाए तो वहां मरीजों को अटैंड करने की संख्या में बड़ी कमी की बात कही जा रही है।

दरअसल, शहर के कई सीनियर डाक्टरों के संक्रमण के चपेट में आने के बाद नामी और बडेÞ डाक्टर बेहद कमी के साथ मरीजों को देख रहे हैं। इसका खामियाजा भी मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी ओर पिछले दिनों शहर के कुछ चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर स्वास्थ्य विभाग की रोक के आदेश के बाद भी नाराजगी के चलते शहर के कई वरिष्ठ डाक्टरों ने क्लीनिक पर आना करीब करीब बंद कर दिया है।

उनका ये रवैया प्रशासन के आदेश के खिलाफ असहयोग आंदोलन के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि किसी चिकित्सकीय संगठन या डाक्टर ने इस प्रकार की कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन जिस प्रकार से मरीजों को देखने के अनुपात में कमी आयी है उसके बार यही कहा जा रहा है।

ये कहना है मेडिकल प्राचार्य का

मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि दिल्ली में जिस प्रकार से कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर चल रही है, उसका साइड इफेक्ट निश्चित रूप से मेरठ पर पड़ना तय है। इससे बचाव के लिए सावधानी बेहद जरूरी है, जिसको लेकर पूरी लापरवाही देखने में आ रही है।

लखनऊ से हाईलेवल टीम पहुंची सर्किट हाउस अफसर किए तलब

कोरोना की वजह से होने वाली एक-एक मौत का हिसाब स्वास्थ्य विभाग व मेडिकल प्रशासन से लेने के लिए लखनऊ से हाईलेवल टीम गुरुवार की शाम को यहां पहुंच गयी है। केजीएमयू लखनऊ के एचओडी डा. सूर्यकांत को इस टीम का प्रमुख बनाया गया है। उनके साथ दो अन्य सीनियर डाक्टरों को मेरठ भेजा गया है।

डा. सूर्यकांत ने आते ही जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को तलब कर लिया। कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज को लेकर उनके साथ लंबी बैठक की। हालांकि इस बैठक का ब्योरा तो नही मिल सका है, लेकिन पता चला है कि जो कुछ भी बातें संज्ञान में आयी हैं उनको लेकर हाईलेवल टीम असंतुष्ट बतायी जाती है।

यह भी पता चला है कि यहां काफी कुछ किया जाने की जरूरत पर जोर दिया है। सबसे ज्यादा जोर कोरोना संक्रमण रोकने के लिए इन्फेक्शन प्रिवेंशन पर जोर दिया। जिसके तहत लोगों के शत प्रतिशत मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग का प्रयोग किए जाना अनिवार्य किया जाना चाहिए।

मेडिकल का दौरा आज

हाईलेवल टीम शुक्रवार की सुबह मेडिकल का दौरा करेगी। मेडिकल प्रशासन ने इसकी तैयारी कर ली है। मेडिकल प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया कि उनकी ओर से तो हर वक्त तैयारी रहती है। कभी भी कोई भी किसी वक्त आकर यहां कोरोना संक्रमितों का इलाज देख सकता है। मेडिकल के डाक्टरों की ओर से संक्रमितों के इलाज में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है। आइसोलेशन वार्ड समेत जहां जहां भी हाईलेवल टीम चाहेगी वहां का निरीक्षण कर सकते हैं।

मौतों के आंकड़े से शासन नाराज

कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत का आंकड़ा 341 के पार जा पहुंचा है। जबकि संक्रमित केसों की संख्या 14 हजार के पार चली गयी है। हालात का जायजा लेने के लिए शासन के निर्देश पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के नेतृत्व में एक हाईलेवल टीम मेरठ पहुंची है। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य आलोक कुमार के अलावा केजीएमयू के डा. सूर्यकांत व डा. काबे भी आ रहे हैं।

ये रहेगा कार्यक्रम

मेडिकल में इनका बेहद व्यस्त कार्यक्रम तय है। कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड का दौरा करने के अलावा इस टीम के सदस्य मेडिकल प्रशासन के तमाम आला अधिकारियों तथा एचओडी से भी कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज को लेकर चर्चा करेंगे। वहीं सफाई दी जा रही है कि संक्रमित मरीजों की मौत का एक बड़ा कारण यहां रेफर किए जाने वाले मरीजों को लास्ट स्टेज पर भेजा जाना है। ऐसे मरीजों के मामले में मेडिकल के डाक्टरों के पास ज्यादा विकल्प व समय नहीं होता है, जिसकी वजह से डेथ रेट बढ़ गया।

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