
19 सितंबर का दिन भारतीय राजनीति के इतिहास में ऐतिहासिक दिन रहा। दरअसल, 18 जनवरी 1927 को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा बनाया गया हिंदुस्तान का संसद भवन जिसका उद्घाटन देश में सर्वोच्च वायसराय लॉर्ड इरविन ने किया था। पुराने संसद भवन का निर्माण ब्रिटिश हुकूमत ने कराया, जिसका नक्शा ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने बनाया था। अब नए संसद भवन का निर्माण केंद्र की मोदी सरकार ने कराया है और कोरोना काल में अति आवश्यक कार्यों के तहत सेंट्रल विस्टा के तहत संसद भवन का निर्माण हुआ, जिसके बनने में थोड़ी देरी होने के चलते विशेष सत्र बुलाकर इसका उद्घाटन 19 सितंबर को पुरानी संसद की विदाई के बाद हुआ।
बहरहाल, नए संसद भवन में संसद सत्र की शुरुआत विशेष सत्र से हुई, जिसे इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जा चुका है। अब पुराने संसद भवन को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संजोकर रखा जाएगा और इसमें अब पुरानी स्मृतियां शेष रहेंगी। पुराने संसद भवन में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों की ज्वॉइंट तीन फोटो खींची गईं और इसके बाद संसद में अंतिम भाषण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और फिर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भाषण दिया। प्रधानमंत्री के साथ वरिष्ठ मंत्रियों, लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों ने पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल में 2047 तक भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आज नए संसद भवन में हम सब मिलकर नए भविष्य का श्री गणेश करने जा रहे हैं। ये पल हमें भावुक करता है और हमें हमारे कर्तव्य के लिए प्रेरित भी करता है। यहीं पर 1947 में अंग्रेजी हुकूमत ने सत्ता हस्तांतरण किया, इसका गवाह रहा है ये सेंट्रल हॉल. ये सेंट्रल हॉल हमारी भावनाओं से भरा हुआ है। इसी संसद से मुस्लिम बहनों को तीन तलाक से मुक्ति मिली, ट्रांसजेडंर बिल भी इसी संसद में पास हुआ। इसी संसद में जम्मू कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाया गया। आज जम्मू कश्मीर शांति की राह पर चल रहा है। इसी संसद में चार हजार से ज्यादा बिल पास हुए। मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूं कि भारत टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में पहुंचेगा। भारत अब रुकने वाला नहीं है। अब हम पुराने कानून से मुक्ति पाकर नए कानून की ओर जा रहे हैं।
संसद में बनने वाला हर एक कानून भारतवासी के लिए होना चाहिए। हम जो भी रिफॉर्म करे उसमें भारत भी होना चाहिए। 1952 के बाद दुनिया के करीब 41 राष्ट्राध्यक्षों ने सेंट्रल हॉल में आकर हमारे माननीय सांसदों को संबोधित किया है। हिंदुस्तान युवा देश है। इसके बाद उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने विचार रखे। हालांकि संसद भवन की कार्यवाही जिनकी अनुमति से चलती है, वो राष्ट्रपति हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू न तो पुराने संसद भवन में कहीं दिखीं और न ही नए संसद भवन में प्रवेश के दौरान ही वो नजर आईं। इसके क्या कारण रहे, इस पर राजनीतिक बहस जारी है। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इस कार्यक्रम में नहीं आ सके। शायद उनकी स्वास्थ्य समस्या रही हो, क्योंकि वो दिल्ली विधेयक पेश किए जाने के दौरान वोटिंग करने के लिए व्हील चेयर पर भी बीते मानसून सत्र के दौरान संसद भवन में आ सके थे।
बहरहाल, पुराने संसद भवन के सेंट्रल हॉल से संविधान की कॉपी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नए संसद भवन ले जाया गया। रास्ते में एनडीए के सांसद भारत माता की जय के नारे लगाते रहे। नए संसद भवन में पहली बैठक के दौरान सांसदों को उपहार स्वरूप 75 रुपए का चांदी का एक-एक सिक्का और संविधान की एक-एक प्रति और एक-एक डाक टिकिट का गिफ्ट पैकेट भेंट किया गया। संसद के विशेष सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरी प्रार्थना और सुझाव है कि जब हम नए संसद भवन में जा रहे हैं तो इसकी (पुराना संसद भवन) गरिमा कभी भी कम नहीं होनी चाहिए। हालांकि यह अलग बात है कि नए संसद भवन का पहला विशेष सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ा और कार्रवाही को थोड़ी देर के लिए स्थगित करना पड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर आप सब की सहमति हो तो नए संसद भवन को भविष्य में संविधान सदन के नाम से जाना जाए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन के निर्माण में काम करने वाले श्रमिकों, कामगारों, इंजीनियरों का धन्यवाद किया। और कहा कि इस नए भवन के निर्माण में 30 हजार से ज्यादा श्रमिकों ने परिश्रम किया है, पसीना बहाया है. आज वह दिन है जब हम कहते हैं ‘मिच्छामी दुक्कड़म’, इससे हमें किसी ऐसे व्यक्ति से माफी मांगने का मौका मिलता है, जिसे हमने जानबूझकर या अनजाने में ठेस पहुंचाई है। मैं संसद के सभी सदस्यों और देश की जनता से भी ‘मिच्छामी दुक्कड़म’ कहना चाहता हूं। संसदीय लोकतंत्र का जब ये नया गृह प्रवेश हो रहा है, यहां आजादी की पहली किरण का साक्षी, पवित्र सेंगोल। ये वो सेंगोल है, जिसको भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू का स्पर्श हुआ था। ये सेंगोल हमें महत्वपूर्ण अतीत से जोड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था बनने और इसे दुनिया की तीसरी सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प को दोहराया और कहा कि दुनिया आश्वस्त है कि भारत टॉप 3 में पहुंचकर रहेगा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया की नजर भारत पर है। दुनिया भारत में अपना मित्र खोज रही है। विश्वमित्र के रूप में भारत आगे बढ़ रहा है।
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि ये महिलाओं के लिए इतिहास बनाने का वक्त है। ये भी ऐतिहासिक रहा कि नए संसद भवन में पहला बिल जो पास हुआ, वो महिला आरक्षण बिल रहा और इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसद में कई बार महिला आरक्षण बिल को पेश किया गया, लेकिन ईश्वर ने कई पवित्र कामों के लिए मुझे चुना है। महिला आरक्षण को लेकर संसद में पहले भी प्रयास हुए है। आज हमारी सरकार संविधान संशोधन बिल पेश करने जा रही है। लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण मिलेगा। जब यह बिल कानून बनेगा, तो इसकी ताकत और हो बढ़ जाएगी। मैं दोनों सदन के सांसदों से अपील करता हूं कि यह सबकी सहमति से पारित हो। आज महिला हर एक एरिया में आगे जा रही है। नीति निर्माण में महिला की भूमिका होनी चाहिए। इस बिल का नाम नारी शक्ति वंदन अधिनियम रखा गया है। यह अब तक के संशोधित बिलों में 128वां संशोधित बिल था। महिला आरक्षण बिल पास होने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए बधाई दी।
महिला आरक्षण विधेयक को केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने नई संसद के लोकसभा पटल पर रखा। बिल पर बहस हुई और विपक्षी नेताओं ने जब अपनी बात रखी, तो अमित शाह उठकर खड़े हो गए और जवाब देने लगे, जिस पर दोनों तरफ से हंगामा हुआ। विपक्ष ने कहा कि बिल को बिना सर्कुलेट किए पेश क्यों किया गया? इस पर कानून मंत्री ने कहा कि बिल वेबसाइट पर अपलोड हो चुका है। विपक्ष ने सवाल उठाया और कहा कि कांग्रेस भी महिला आरक्षण पर बिल लाई थी, जो पास नहीं हो सका। बता दें कि साल 1996 में केंद्र की एच.डी. देवेगौड़ा सरकार ने सबसे पहले संसद में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने के लिए बिल पेश किया था, जो पास नहीं हो सका। इसके बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार ने साल 2008 में इस कानून को पेश किया। राज्यसभा में साल 2010 में ये बिल पारित भी किया गया, लेकिन लोकसभा में पारित नहीं हो सका और 2014 में इसके विघटन के बाद यह खत्म हो गया। राज्यसभा में कांग्रेस सांसद और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि ओबीसी महिलाओं को आरक्षण देना चाहिए। कमजोर वर्ग की महिलाओं के साथ भेदभाव होता है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल में ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षण हो। खड़गे के इस बयान पर राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ।
बहरहाल, माना जा रहा है कि इस बिल के पास होने से 180 लोकसभा सीटों पर डुअल मेंबरशिप होगी, जिसमें से एक-तिहाई सीटें एससी-एसटी के लिए रिजर्व होंगी और साल 2027 के बाद परिसीमन होने के बाद इतनी ही सीटें बढ़ाकर महिलाओं के लिए उन्हें आरक्षित कर दिया जाएगा।
बहरहाल, बहस के कई मुद्दे हैं, लेकिन जिस मुद्दे पर कोई बहस नहीं की जानी चाहिए, वो यह है कि नए संसद भवन का सभी को स्वागत करना चाहिए और गणेश चतुर्थी के दिन देश को सौंपे गए इस नए संसद भवन की गरिमा का ख्याल रखते हुए अब देश के विकास और हित में काम करना चाहिए, जिससे देश में फैली बेरोजगारी, महंगाई और गरीबी को मिटाया जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन का निर्माण कराकर जिस साहस का परिचय दिया है, वो कोई छोटी बात नहीं है, इसके लिए उनके इस साहस की सराहना की जानी चाहिए और सभी जन प्रतिनिधियों को मिलकर देश के विकास में भागीदारी निभाते हुए काम करना चाहिए।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)


