जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: महाभारत कालीन तीर्थ नगरी में छठ के महापर्व का सोमवार को सूर्य भगवान को अर्ध्य दे विधिवत पूजा अर्चना के साथ समापन हो गया। छठ महापर्व त्योहार के आखिरी दिन महिलाओं ने उगते हुए सूर्य को वन आरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरने वाली मध्य गंगा नहर पर अर्घ्य दिया। सूर्य को अर्घ्य देने के साथ के साथ ही इस महापर्व का समापन हो गया।

मान्यता है कि छठ पूजा में सूर्य भगवान और माता छठी की पूजा की जाती है. छठ पर्व में महिलाएं 36 घंटे का व्रत रखती हैं। इस पर्व को सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। छठ का पर्व साल में दो बार आता है। छठ का ये पर्व संतान की सुख समृद्धि, अच्छे सौभाग्य और सुखी जीवन के लिए रखा जाता है।
साथ ही यह व्रत पति की लंबी उम्र की कामना के लिए भी रखा जाता है। सोमवार को छठ महापर्व के अतिंम दिन व्रती महिलाओ ने वन आरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरने वाली गंग नहर पर सूर्य को अर्ध्य दे छठ पर्व का विधिवत पूजा अर्चना के साथ समापन किया। इस दौरान मध्य गंगा नहर पर व्रती महिलााओं को सैलाब देखने को मिला।
क्या है छठ का धार्मिक महत्व
ऐसी मान्यता है कि सूर्य देव की पूजा करने से तेज, आरोग्यता और आत्मविशवास की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य ग्रह को पिता, पूर्वज, सम्मान का कारक माना जाता है। साथ ही छठी माता की अराधना से संतान और सुखी जीवन की प्राप्ति होती है। इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह पर्व पवित्रता का प्रतीक है।
मवाना में भी छठ पर्व को सोमवार को व्रती महिलाओं ने पूजा अर्चना से साथ समापन किया। मवाना से सूर्य भगवान के उदय से पूर्व ही मवाना मध्य गंग नहर के आस पास महिलाओं ने सूर्य भगवान को अर्ध्य देर छठ पर्व का समापन किया।

