- दुर्गा इंडस्ट्रीज में बॉयलर विस्फोट में मारे गए शंकर और प्रवीण के परिवार डूबे दु:ख के समंदर में
- सांत्वना देने पहुंच रहे नेताजी, लेकिन इमदाद के नाम पर सिफर
- रहने को घर नहीं, सोने को बिस्तर नहीं, प्रशासन की आमद का इंतजार कर रहा शंकर व प्रवीण का परिवार
- 15 लाख का एलान, मिले पांच लाख, नेता तो पहुंचे मगर मदद नहीं
- जल्दी ही फिर से धुआं उगलने लगेगी दुर्गा इंडस्ट्रीज, साफ-सफाई का काम जारी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: इंचौली थाना क्षेत्र के मवाना रोड स्थित फिटकरी गांव की दुर्गा इंडस्ट्रीज में हुए विस्फोट में मारे गए शंकर और प्रवीण के परिवार को सरकारी मदद का बेसब्री से इंतजार है। इन दोनों परिवारों को उम्मीद है कि प्रशासन की ओर से जरूर कोई उनकी सुध लेने आएगा। ये परिवार प्रशासन के अफसरों की आमद का इंतजार कर रहे हैं। इन परिवार को 15 लाख की मदद का एलान किया गया था,

लेकिन मिले महज पांच लाख ही। बाकी की रकम का पोस्टडेटिड चेक दे दिया गया है। वहीं, दूसरी ओर बहुत जल्दी ही दुर्गा इंडस्ट्रीज एक बार फिर से धुआं उगलने लगेगी। हादसे के बाद सिस्टम चलाने वालों की बदौलत मिली राहत के चलते अब दुर्गा इंडस्ट्रीज में साफ-सफाई का काम काफी तेजी से चल रहा है।
बदहाल परिवार को मदद की दरकार
हादसे में मारे गए शंकर के परिवार की बात करें तो उसके दुख और परिवार की हालत को अलफाजों में बयां किया जाना मुश्किल भर है। घर परिवार की यदि बात की जाए तो गांव में एक कौने में छोटी-सी जगह पर जो सरकारी है, वहां छप्पर डालकर शंकर उसकी पत्नी व तीन बच्चे, माता पिता व भाई का परिवार रहता है।

लोअर मीडिल क्लास परिवार में जितना बड़ा एक टॉयलेट होता है, इतनी सी जगह में पूरा परिवार रहता है। झोपड़ी के बाहर खुले में रसोई के नाम पर कच्चा चूल्हा है और बराबर में तालाब की जगह नजर आती है। जिसमें पूरे गांव की गंदगी डंप की जा रही है। इससे अंदाजा लगा लीजिए कि ये जिंदगी है या जहन्नुम…
नहीं थम रहे आंसू
शंकर की पत्नी रश्मि (24) और मां सुरेश देवी की आंखें उनके गम की गवाही देने को काफी थीं। संवाददाता ने जब बातचीत का सिलसिला शुरू किया तो सुरेश देवी ने दिल का सारा दर्द आंखों से आंसू बनकर बाहर आ गया। वो कुछ कहना चाहती थी, लेकिन इससे पहले कि होठों से अल्फाज बाहर आते उनकी आंखों से आंसू बाहर आ गए। उनकी रुलाई थम नहीं रही थी। माहौल बेहद गमगम्ीन था।

शंकर की पत्नी रश्मि जिसकी रुलाई रुकने का नाम नहीं ले रही थी, वो किसी प्रकार अपनी सास को संभालने की कोशिश कर रही थी। पास ही खडेÞ शंकर के तीन छोटे-छोटे बच्चे, मां और दादी को रोते देखकर रुआंसे हो गए। आंखों के आंसू पोछती हुई रश्मि बोली-उसके मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा होगा,
उनका परिवार पूरी तरह से बर्बाद हो गया है, लेकिन सरकार चाहेगी तो उसका यह दुख कुछ कम हो जाएगा। उसने कहा कि वह चाहती है कि सरकार उसके तीनों बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी ले ले। शंकर जिंदा थे तो उसको कोई चिंता नहीं थी, पति का साया सिर से उठा गया। सास, ससुर और तीन बच्चे कैसे संभालेगी?

बेटे की मौत से टूटे पिता
दुर्गा इंडस्ट्रीज हादसे में किशोरीपुर के प्रवीण की भी मौत हुई है। संवाददाता जब गांव में उनके घर पहुंचा तो प्रवीण के पिता चतरू घर के सामने कौने में एक कुर्सी पर निढाल से बैठे थे। हमें देखकर उन्होंने खुद को संयत किया। बातचीत शुरू की। चतरू बोले कि उनके छह बेटे और दो बेटियां थीं।
प्रवीण के जाने के बाद अब पांच बेटे रह गए हैं। प्रवीण की अभी शादी नहीं हुई थी। प्रवीण ही उनका बड़ा सहारा था। चतुरू का कहना था कि जवान बेटे की मौत ने उन्हें तोड़कर रख दिया है। वो चाहते हैं कि प्रशासन की ओर से कुछ मदद मिल जाए तो गुजारा हो जाएगा।
नेता आए, लेकिन मदद नहीं
शंकर और प्रवीण की मौत के बाद गांव में नेताओं का आना जाना लगा हुआ है। पूर्व विधायक योगेश वर्मा के अलावा अन्य दलों के तमाम नेता गांव आए और परिजनों से भी मिले। ग्रामीणों को इस बात का रंज है कि नेता तो बहुत आ रहे हैं, लेकिन जो मदद नेता कर सकते हैं वो मदद नहीं आ रही है। ग्रामीणों का कहना था कि जितना बड़ा दुख है और जितना गरीब शंकर का परिवार है उसके चलते केवल फैक्ट्री मालिक के पांच लाख से गुजारा नहीं होने वाला, प्रशासन व जो भी नेता यहां आ रहे हैं उनसे भी मदद की दरकार है।

फैक्ट्री चलाने की है तैयारी
हादसे के बाद बंद पड़ी दुर्गा इंडस्ट्रीज शीघ्र चालू हो जाएगी। वहां के चीफ सिक्योरिटी योगेश ने बताया कि फैक्ट्री के अंदर साफ-सफाई का काम शुरू हो गया है। एक बार मालिक पूजा भी करा चुके हैं। काफी काम निपट भी गया है। अब केवल बॉयलर को दुरुस्त किया जाना बाकी है। एक-दो रोज में मैकेनिक आकर वोल्ट तैयार कर देगा और उसके बाद दोबारा यहां काम शुरू हो जाएगा।

