Wednesday, March 25, 2026
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अपने खिलाफ जांच, अपने ही मातहत को सौंपी

  • अंधेरगर्दी: आदेश के विपरीत 10 डंपरों की खरीद का मामला
  • शासन को गुमराह करने के लिए रचा जांच का ड्रामा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एक ओर कारनामा, नगर निगम के खाते में जुड़ गया है। पहले भी कई कारनामे नगर निगम कर चुका है। जिसमें आला अफसर अपनी गलती छुपाने के लिए अधीनस्त को ही जांच सौंप कर लीपापोती कर देते हैं। ये भी एक वैसा ही मामला है। जब अपने खिलाफ पोल खुली और सवाल उठने लगे।

यहां तक कि शासन स्तर से भी जवाब तलब हुआ तो अपने को पाक साफ साबित करने के लिए नगर निगम के मुखिया ने ऐसा स्वांग रचा है कि सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे। यानि जनता को यह भी दिखता रहे कि काम हो रहा है और काम होना भी नहीं है। अपने ही खिलाफ नगर आयुक्त ने जांच भी अपने ही खासमखास अधिकारी को दी है। मंशा साफ है कि जांच में बेदाम साबित हों और फिर से किसी नये घोटाले को जन्म दें।

लूट का इससे बेहतरीन सबूत और कुछ नहीं मिल सकता है कि वर्क आॅर्डर किस गाड़ी के जारी किये जाते हैं और फिर अंदरखाने मिलीभगत करके कौन सी गाड़ी की सप्लाई ले ली जाती है, लेकिन जब मामला लाख-दो लाख का नहीं, बल्कि एक ही गाड़ी पर पूरे दस लाख रुपये जेब में आ रहे हों और साथ ही गाड़ियों की खरीद में कमीशन अलग से मिल रहा हो तो बड़े-बड़ों का ईमान डगमगा जाता है। कुछ ऐसा ही कारनामा इन दिनों नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग में अंजाम दिया गया है।

वर्क आॅर्डर तो अशोक लीलैंड मिनी ट्रक का जारी किया गया, जबकि सप्लाई कर दिये गये महेन्द्रा डंपर ट्रक। अब जब पोल खुली तो इन सभी ट्रकों को ज्वाइंट डिपो में हटाकर भेज दिया गया है। पिछले पांच महीने से करोड़ों की खरीद के यह डंपर धूल फांक रहे हैं। इन ट्रकों की हिफाजत के लिए बाकायदा नगर निगम के दो-दो कर्मचारियों की ड्यूटियां भी लगाई गई हैं। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि करोड़ों रुपये जनता के विकास के लिए इस खरीद में खर्च करने के बाद भी जनता को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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अधिकारियों को अपने मुनाफे और कमीशन से मतलब था। लिहाजा मुनाफा और कमीशन लेने के बाद वह भी चुप्पी साधकर बैठ गये हैं। नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग ने शहर में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए साढ़े चार करोड़ रुपये से दस डंपर ट्रकों की खरीद के लिए आॅर्डर बनाया। नगर निगम ने विषय विशेषज्ञों से सलाह मश्वरा करने के बाद तय किया कि अशोक लीलैंड कंपनी के डंपर ट्रक खरीदे जायेंगे। नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग ने विषय व तकनीकी विशेषज्ञों से सलाह मश्वरा करने के बाद गत वर्ष सात अक्टूबर 2023 को वर्क आॅर्डर जारी किया।

यह वर्क आॅर्डर बैक्सी लिमिटेड कंपनी के नाम जारी किया गया था। कंपनी को हिदायत दी गई थी कि अशोक लीलैंड कंपनी के डंपर ट्रक सप्लाई करके उनकी चेसिस व अन्य पत्रावलियां जैम पोर्टल पर भी डाउनलोड की जायें। वर्क आॅर्डर जारी कराने के बाद फाइलों की कागजी खानापूर्ति तो बंद कर दी गई, लेकिन इसके बाद नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग के अधिकारियों ने खेल शुरू कर दिया। बैक्सी लिमिटेड कंपनी के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके अशोक लीलैंड के स्थान पर महेन्द्रा ब्लेजो डंपर ट्रकों की सप्लाई मंगवा ली गई।

यह सभी नये डंपर नगर निगम के दिल्ली रोड वाहन डिपो पहुंचे तथा इन्हें यहीं पर खड़ा भी करा दिया गया। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि उक्त निविदा में प्रतिभागी समस्त फर्मों द्वारा अपलोड किये गये प्रपत्र आॅनलाईन जैम पोर्टल पर संरक्षित है, जिनका अवलोकन जैम पोर्टल पर भी किया जा सकता है, लेकिन आपूर्ति के महेन्द्रा ब्लेजो डंपर जब सामने खड़े रहे और अधिकारियों की छिछालेदारी होती रही तो इन डंपरों को चोरी छिपे नगर निगम के दिल्ली रोड वाहन डिपो के सरस्वती लोक में बनाये गये नये ज्वाइंट वाहन डिपो में भेज दिया गया। तब से पिछले पांच महीने से यह ट्रक सरस्वती लोक के ज्वाइंट डिपो में खड़े धूल फांक रहे हैं।

जनवाणी ने अपने 8 मार्च के अंक में नगर निगम में नगर आयुक्त की शह पर हुए इस महाघोटाले का पूरा खुलासा किया। जनवाणी में खबर छपने के चौथे दिन चोरी छिपे इनके साथ खरीदे गये दूसरे ट्रकों को ज्वाइंट डिपो से हटाया जाने लगा। इस बीच ज्वाइंट डिपो में सभी दरवाजे भी बंद कर दिये गये तथा अलग से दो कर्मचारियों की सुरक्षा में ड्यूटियां भी लगा दी गर्इं। इस मामले की शिकायत मिलने के बाद मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने नगर आयुक्त को नोटिस जारी किया है।

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इसमें नगर आयुक्त से शिकायत संदर्भ संख्या-12138240042235 के बारे में पूछा गया है कि वाहनों की आर्डर के विपरीत खरीद क्यों की गई है? तथा इसमें वर्तमान में क्या स्थिति है। नगर आयुक्त को आदेश दिया गया है कि उक्त खेल की जांचोपरान्त तत्काल आख्या दी जाये। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव के सीधे नगर आयुक्त से जवाब तलब करने से नगर निगम मे अधिकारियों में हड़कम्प मच गया है। नगर निगम में घोटाले करने में माहिर अधिकारियों की पूरी फौज अपने आका को बचाने की कोशिशों में जुट गई है।

मुखिया के चोरी छिपे किये गये इस घोटाले को साफ सुथरा बनाने का खेल शुरू हो गया है और इस कोशिश में अपने को पाक साफ साबित करने के लिए नगर आयुक्त ने अपने ही इस घोटाले की जांच का जिम्मा अपर नगर आयुक्त ममता मालवीय के सुपुर्द किया है। यानि एक छोटा अधिकारी अपने ही उस अधिकारी के खिलाफ जांच करेगा, जिस विभाग के आला अधिकारी के अधीन वह नौकरी कर रहा है।

खुद साफ साबित होता है कि बड़े स्तर पर हुए घोटाले को दबाने के लिए अधिकारी किस स्तर तक गिर सकत हैं। होना तो यह चाहिए था कि किसी बाहरी विभाग से जांच कराई जाती और फिर इसमें जांच जैसी बात ही क्या है। जब पिछले पांच महीने से साढ़े चार करोड़ के डंपरों को खुद ही चोरी छिपे ज्वाइंट डिपो में खड़ा करवा दिया गया है तो खुद ही साबित होता है कि घोटाले में नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना कुछ भी संभव नहीं हो सकता है।

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