- लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक मुद्दे क्या है? इसको समझ पाना भी यक्ष प्रश्न से कम नहीं
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: चुनावी बेला में इस तरफ भी ध्यान देने की जरूरत है कि महानगर की सड़क ही पार्किंग स्थल बनी हुई है। शहर जाम से जूझ रहा है, लेकिन लाखों की आबादी वाले इस महानगर में यह जाम कभी राजनीतिक मुद्दा नहीं बन पाता है। लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक मुद्दे क्या है, इसको समझ पाना भी यक्ष प्रश्न से कम नहीं है। फिलहाल बात मेट्रो सिटी मेरठ में बाहरी क्षेत्र से लेकर भीतरी क्षेत्र तक लगने वाले जाम को लेकर की जाए। शहर का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो, जहां पार्किंग की सुचारू व्यवस्था नगर निगम की ओर से दी गई हो।

हालांकि नगर निगम की ओर से मल्टी लेवल पार्किंग बनाने की तैयारी शुरू की गई है, लेकिन यह काम कब तक पूरा होगा, अभी कहना मुश्किल है। मौजूदा स्थिति यह है कि कचहरी, कमिश्नरी पार्क, कचहरी के दोनों रोड, यूनिवर्सिटी क्षेत्र, मेडिकल कॉलेज क्षेत्र, गढ़ रोड, हापुड़ रोड के साथ-साथ शहर के भीतरी अहमद रोड, घंटाघर, सराफा बाजार, लाला का बाजार, खैर नगर, बुढ़ाना गेट, छिपी टैंक समेत किसी भी क्षेत्र को देख लिया जाए, हर तरफ जाम लगा हुआ मिलता है। इसका प्रमुख कारण वाहनों का सड़क के बीचो-बीच या किनारों पर लाकर खड़ा कर देना होता है।
जिधर से भी गुजरिए सड़क के दोनों और चौपहिया वाहन बेतरतीब खड़े हुए देखे जा सकते हैं। मेट्रो सिटी मेरठ लंबे समय से शहर के बीच से लेकर बाहरी क्षेत्र में सुचारू रूप से की जाने वाली पार्किंग की मांग कर रहा है। लेकिन इस और सोचने की किसी को भी फुर्सत नहीं है। कोई भी राजनीतिक दल का नेता हो, सड़क के दोनों और खड़े वाहनों से लगने वाले जाम को नजरअंदाज करके वहां से निकल जाता है। राजनीतिक दलों की यह उपेक्षा कभी जनता के बीच भी मुद्दा नहीं बन पाती है।

शहर की लुप्त हो चुकी पार्किंग और सड़कों पर खड़े वाहन लंबे समय से जाम का कारण बनते चले आ रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस का दायित्व है कि वाहनों को हटवाकर यातायात को सुचारू रूप से संचालित कराया जा सके। लेकिन ट्रैफिक पुलिस की मार्गों से उठाने वाली गाड़ियां भी मेरठ के बाहर का नंबर देखकर की कार्यवाही करती चली आ रही है। ऐसे में जाम और पार्किंग की समस्या का समाधान में जनता के स्तर से हो पा रहा है। और न ही राजनीतिक तौर पर इस दिशा में कोई कदम उठाए जा रहा है।

