- बाहरी उम्मीदवार के मुद्दे पर पर बार अध्यक्ष की बेबाक राय
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: हाईकोर्ट बेंच फिर चुनावी मुद्दा नहीं बन पा रही हैं। ये दुर्भाग्य का विषय हैं। इसकी लंबे समय से मांग चली आ रही हैं। अधिवक्ता आंदोलित भी हैं। मेरठ ही नहीं, किसी अन्य स्थान का बेंच के लिए चयन किया जा सकता हैं, लेकिन राजनेता भी झूठे हो गए हैं। केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ ने अधिवक्ताओं से वादा किया था कि केन्द्र में जब सरकार बनेगी, तब बेंच वेस्ट यूपी में दे दी जाएगी,
लेकिन वो भी मुकर गए। नेताओं की आत्मा मर गई हैं, उनकी इच्छा शक्ति खत्म हो गई हैं। तभी तो बेंच की समस्या का समाधान पश्चिमी यूपी के लोगों के लिए नहीं किया जा रहा हैं। मजबूती के साथ जनता के मुद्दे उठाने वाले अब नेता नहीं रहे। ये कहना है कि मेरठ बार के अध्यक्ष रोहिताश्व अग्रवाल का। उन्होंने ‘जनवाणी’ के साथ विभिन्न मुद्दों को लेकर चर्चा की।
रोहिताश्व अग्रवाल ने हाईकोर्ट बेंच को लेकर उन नेताओं को कटघरे में खड़ा किया, जिन्हें जनता ने अपना नुमाइंदा चुना। किसी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि नेताओं में दम नहीं है। जो चुनकर जाते हैं वो यदि सरकार के सामने वेस्ट यूपी में हाइकोर्ट बेंच को लेकर मजबूती से बात रखें। जब सदन चल रहा हो तब वैल में चले जाएं और सरकार का ध्यान दिलाएं तो शायद बात बने, लेकिन दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि ऐसा अभी तक हो नहीं सका।
बार के अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि हाईकोर्ट बेंच यदि बन जाती है तो इसका फायदा वकीलों से ज्यादा बेस्ट यूपी की जनता को होगा। जहां तक वकीलों की बात है तो उनको फीस के रूप में जो मिलना है वह तो अभी भी मिल रहा है। यहां बात वकीलों की सुविधा असुविधा या लाभ हानि की नहीं बल्कि उससे भी ऊपर उठकर वेस्ट यूपी की जनता के हित की बात सोचनी होगी। जहां तक हाईकोर्ट बेंच की बात है तो वादे तमाम सरकारों ने किए, लेकिन बेंच को सरकारी स्तर पर जो गंभीरता नजर आनी चाहिए थी, वो नजर नहीं आयी।
रोहिताश्व अग्रवाल ने भाजपा प्रत्याशी को लेकर सवाल किए जान पर किसी प्रकार की टिप्पणी ने इंकार कर दिया। उन्होंने बेबाक कहा कि वो कांग्रेस से जुड़े हैं, इसलिए किसी अन्य प्रत्याशी की बात नहीं कर सकते। वह इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के साथ हैं। साथ ही उम्मीद जाहिर की कि शीघ्र ही प्रत्याशी का एलान कर दिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि कचहरी परिसर में पार्किंग स्थल जहां पर मस्जिद है, वहां यदि प्रशासन चाहे तो मल्टीलेवल र्पाकिंग बना सकता है। वैसे उन्होंने कहचरी नाला की ओर से वकीलों के लिए पार्किंग बनाए जाने की पैरवी की।

