Saturday, March 14, 2026
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सड़कें बिक रही हैं बोलो-खरीदोगे

  • पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए फुटपाथ पर सजी दुकानें, अवैध कब्जों पर अफसरों की खामोशी

जनवाणी संवाददाता

मेरठ: महानगर के तमाम इलाकों में लगता है कि सड़कें बेच दी गयी हैं। यही कारण है जो तमाम कोशिशों और कवायदों के बाद भी जाम की समस्या से मुक्ति मिलती नजर नहीं आ रही है। जब भी जाम से मुक्ति का प्रयास होता है इसका असर दो चार दिन ही नजर आता है, इसका जीता जागता उदाहरण हापुड़ स्टैंड पुराना चौराहा है। हालात इतने ज्यादा बदतर है कि शहर की सड़कों पर अतिक्रमण के आगे जो जिम्मेदार अफसर हैं वो सभी चुप्पी साधे हुए हैं।

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महानगर के मुख्य चौराहे हों या फिर मेन मार्केट तमाम स्थानों पर अवैध कब्जे साफ नजर आते हैं। इन अवैध कब्जों की वजह से ही सड़कें संकरी हो गयी है। रही सही कसर ऐसे इलाकों में गाड़ियों को ले जाकर पूरी कर दी जाती है। हालांकि इसके लिए जो लोग गाड़ी से पहुंचते हैं। उनको कसूरवार ठहराना ज्यादती ही होगी। परिवार के साथ यदि कोई शॉपिंग के लिए निकलता है तो गाड़ी से ही निकलेगा। फिर जहां गाड़ी ले जाने की अनुमति हो तो गाड़ी से ही जाएंगे।  जहां अवैध कब्जे कर लिए गए हैं। वहां थानों की पुलिस तो यहां कोई कार्रवाई करती नहीं। ट्रैफिक पुलिस भी सप्ताह में एक या दो दिन अभियान के नाम पर खानापूर्ति ही करती है।

यह अतिक्रमण जाम का भी बड़ा कारण बनता है। सड़कें अतिक्रमण मुक्त होने के साथ ही स्वच्छ हों तो उस शहर की सूरत अपने आप बदल जाती है। कुछ समय पूर्व हापुड़ स्टैंड पर ट्रैफिक पुलिस ने अभियान चलाया था तो चौराहा साफ नजर आता था, लेकिन उसके बाद पुलिस का यह अभियान धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया और शहर की सड़कें फिर से अतिक्रमण की चपेट में आ गईं।

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ई-रिक्शाओं के कब्जों में अधिकतर चौराहे

शहर का हापुड़ अड्डा चौराहा पर आधे से ज्यादा सड़क आॅटो और ई-रिक्शा वाले घेरे रखते हैं। रही-सही कसर ठेले वाले और दुकानदार पूरी कर देते हैं। इनका सामान दुकानों से काफी आगे तक रहता है। वहीं, चौराहे का एक हिस्सा निजी बसों के हवाले रहता है। इसी तरह गढ़ रोड और हापुड़ रोड का भी यही हाल है।

नहीं दिखता अतिक्रमण

शासन के निर्देश हैं कि अतिक्रमण के खिलाफ ट्रैफिक और थाना पुलिस मिलकर काम करें। लेकिन शहर के थानेदार हो या चौकी इंचार्ज या फिर फैंटम पुलिस, इन्हें गश्त के दौरान कहीं भी अतिक्रमण नहीं दिखता। कहीं जाम दिखता है तो जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस की मानकर मुंह मोड़ लेते हैं। शहर में सार्वजनिक स्थानों पर कहीं पार्किंग नहीं है। सड़क पर ही अवैध तरीके से वाहन खड़े होते हैं, जिनसे जाम लगता है।

लगातार की जा रही सख्ती

अवैध ई-रिक्शाओं को लेकर लगातार सख्ती की जा रही है। हापुड़ स्टैंड चौराहे को जाम मुक्त कराने के लिए दो बार अभियान भी चलाया जा चुका है। -राघवेंद्र मिश्रा, एसपी टैÑफिक

बिना रजिस्टेÑशन के दौड़ रही ई-रिक्शा, फैला मकड़जाल

सरधना: सरधना क्षेत्र में धड़ल्ले से दौड़ रहे सैकड़ों ई-रिक्शा लोगों की परेशानी का सबब बने हुए हैं। जहां एक ओर इन ई-रिक्शों के कारण जाम लगक रहा है। वहीं बच्चें भी रिक्शा लेकर सड़कों पर चल रहे हैं। नगरवासी ने डीएम से मामले की शिकायत करते हुए नगर पालिका में सभी ई-रिक्शों का पूरी जानकारी के साथ रजिस्ट्रेशन कराने की मांग की है।
डीएम से शिकायत करते हुए सूरजमल शर्मा ने कहा कि सरधना क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में ई-रिक्शा चल रहे हैं। जिन्हें अधिकतर बच्चें और बुजुर्ग चला रहे हैं। इस कारण ई-रिक्शा आए दिन पलटते रहते हैं।

चालक कहीं भी सवारी बैठाने या उतारने के लिए बीच सड़क में ई-रिक्शा रोक लेते हैं। हादसा होने पर इन ई-रिक्शों की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिल पाती है। जिसका फायदा चालक उठाते हैं। इन ई-रिक्शों के कारण सरधना में रोजाना जाम लगा रहता है। सुविधा से अधिक ई-रिक्शों के कारण परेशानी ज्यादा बन रही है। इसलिए सभी ई-रिक्शों का नगर पालिका में रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। साथ ही चालक की पूरी जानकारी भी दर्ज कराई जानी चाहिए। नगरवासी ने डीएम से शिकायत करते हुए इसकी मांग की है।

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