- बदहाल बसें, रोड पर न भेजने की हिदायत का नहीं लिया कोई संज्ञान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: महानगर बस सेवा के एमडी के स्तर से किए गए निरीक्षण के दौरान खराब कंडीशन की बसों को मार्ग पर न भेजे जाने के स्पष्ट आदेश के संचालन कंपनी के लिए कोई मायने नहीं रह गए हैं। हद की स्थिति तो यह है कि संचालन प्रभारी तक कंपनी के बचाव में खुलकर उतर आए हैं। बुधवार को बस संख्या यूपी-78बीटी 6077 नंबर की एक बस शाम के समय मेरठ से सरधना के लिए चली। जिसमें सवार यात्रियों ने बस की सीटों की दयनीय स्थिति बताते हुए फोटो मीडिया के साथ साझा की। जिसमें भेजे गए फोटो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि उसकी सीटें टूटी हुई हैं। जबकि अधिकांश सीटों पर लोहे की प्लेट लगाकर संचालित किया जा रहा है।
बीती 30 अप्रैल को एमडी संदीप कुमार नायक ने सोहराब गेट स्थित सीएनजी बसों के डिपो का निरीक्षण किया था। जिसमें संचालक कंपनी को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए थे कि खराब हालत वाली सीटों को फौरन बदला जाए। कोई भी टूटी फूटी सीट पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी देते हुए उन्होंने बदहाल स्थिति की कोई भी बस मार्ग पर न भेजे जाने के निर्देश दिए थे, लेकिन एमडी के आदेश के बावजूद संचालक कंपनी ने इसका संज्ञान लेना जरूरी नहीं समझा।

जिसका परिणाम यह है कि आज भी विभिन्न मार्गों पर बदहाल स्थिति की बसों को संचालित किया जा रहा है। जिनमें से अधिकांश की सीट झूलती हुई और टूटी अवस्था में देखी जा सकती हैं। सीट बदलने की बजाय इनकी गद्दी के स्थान पर लोहे की प्लेट डाल दी गई है। सीएनजी बसों के संचालन प्रभारी सचिन सक्सेना कंपनी के पक्ष में खुलकर आए हुए हैं। बसों की खस्ता हालत के फोटो भेजे जाने के बावजूद उनका जवाब था कि सुबह के समय सीटें ठीक थीं, बाद में कोई पेंच निकल गया होगा।

