Saturday, March 14, 2026
- Advertisement -

अवैध होर्डिंग की समस्या से निपटने की चुनौती

Nazariya


ALI KHANदेशभर में अवैध होर्डिंग की समस्या ने लोगों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। दरअसल, मुंबई में 13 मई को दोपहर करीब 3 बजे तेज आंधी आई। जिससे घाटकोपर में 100 फीट ऊंचा और 250 टन वजनी लोहे का होर्डिंग एक पेट्रोल पंप पर जा गिरा। इस दौरान कुछ कार, टू-व्हीलर्स और पैदल यात्री इसकी चपेट में आ गए। हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 74 लोग घायल हो गए। जांच में सामने आया कि ये होर्डिंग अवैध था और 15 हजार वर्ग फीट से ज्यादा क्षेत्रफल में लगा था। इस होर्डिंग का नाम लिम्का बुक आॅफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हो चुका था। उल्लेखनीय है कि होर्डिंग लगाने के लिए उस एजेंसी की अनुमति जरूरी होती है जिसकी भूमि पर होर्डिंग लगाई जा रही है। मुंबई में कई तरह की जमीनें हैं, जैसे कलेक्टर लैंड, सॉल्ट पैन लैंड, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट लैंड, बीएमसी लैंड आदि। इसलिए अगर कोई किसी जमीन पर होर्डिंग लगा रहा है तो उसे संबंधित लैंड अथॉरिटी से अनुमति लेनी पड़ती है। साथ ही बीएमसी की इजाजत भी जरूरी है। ऐसे में बड़ा सवाल कि आखिर इतने? बड़े आकार के हॉर्डिंग लगाने की अनुमति क्यों दी गई? अब जब इतना बड़ा हादसा हो गया है तो किन-किन पर कार्रवाई की जाएंगी? क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी? इसे सुनिश्चित करने के लिए क्या-क्या प्रयास किए जाएंगे? ऐसे यक्ष प्रश्न आम आदमी के मस्तिष्क में कौंधने स्वाभाविक हैं। आज देश के कमोबेश सभी शहर अवैध हॉर्डिंग की समस्या का सामना कर रहे हैं।? शहरों की शायद ही ऐसी कोई लॉकेशन हो जो होर्डिंग व बैनर से अछूती हो। एक तरफ ये होर्डिंग, जहां ऐतिहासिक धरोहरों व इमारतों के सौंदर्य को ढक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लोगों के जान पर भी आफत बन रहे है।

आज देश के सभी शहरों की सड़कें अवैध होर्डिंग से पटी हुई है। कई शहरों में इन होर्डिंग को हटाने की कवायद की गई, लेकिन यह समस्या जस की तस बनी हुई है। आज अवैध होर्डिंग की समस्या सड़क हादसों की वजह बन रही है। यह देखा गया है कि सड़कों पर लगे होर्डिंग के चलते वाहन चालकों को साइड देखने में दिक्कतें झेलनी पड़ती है। लापरवाही का आलम यह है कि कई बार फूटपाथ पर होर्डिंग को रख दिया जाता है जिसके चलते फूटपाथ पर पैदल चलने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोग सड़कों पर चलने के लिए मजबूर हो जाते हैं, इस कारण भी कई बार हादसा हो जाता है।

देश के उस बहुचर्चित हादसे को कैसे भुला सकते है जिसमें एक अवैध होर्डिंग ने एक 23 वर्षीय युवती की जान ले ली थी । दरअसल, चेन्नई में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करने वाली 23 वर्षीय सुबाश्री अपने आॅफिस से घर की ओर जा रही थी, उसी दौरान रास्ते में एआईएडीएमके का अवैध रूप से लगी होर्डिंग युवती के ऊपर गिर गई थी। हार्डिंग के गिरते ही पीछे की ओर तेजी से आ रही एक टैंकर ने युवती को कुचल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई थी। यह महज एक चर्चित हादसा है, इसके अलावा भी देश में हर रोज ऐसे हादसे सुर्खियां बटोरते हुए देखे जा सकते हैं।

ऐसे में यक्ष प्रश्न खड़ा हो जाता है कि आखिर अवैध होर्डिंग के मकड़जाल से मुक्ति कैसे मिलेगी? सच्चाई यह है कि अगर सरकारी महकमा ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाए, तो इस विकराल रूप लेती समस्या से निपटा जा सकता है। हकीकत यह भी है कि राजनीतिक दल चुनावों में रैलियों व कार्यक्रमों के लिए जगह-जगह होर्डिंग व बैनर लगा देते हैं। उन्हें न किसी नियम की परवाह है और न ही किसी कानून की। इसके अतिरिक्त होर्डिंग-बैनर बनाने बनाने वाली एजेंसियों पर राजनीतिक दलों का हाथ होने से प्रशासन उनके आगे बेबस नजर आता है। इस परंपरा को खत्म किए जाने की सख्त जरूरत है, इसके बिना होर्डिंग्स के मकड़जाल को तोड़ पाना बेहद मुश्किल होगा। आज जरूरत इसकी है कि यदि कोई भी एजेंसी बिना पंजीकरण के कोई होर्डिंग लगाती है तो संबंधी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा सभी एजेंसियों को सख्ती के साथ इस बात की हिदायत दी जानी चाहिए कि सड़कों के किनारे किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं करें। अगर कोई ऐसा करते हुए पाया जाए तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो।

आज शहरों की सूरत को बिगाड़ने में होर्डिंग्स बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। शहरों की बिगड़ती सूरत को सुधारने के लिए शहरों में होर्डिंग लगाने के लिए महानगरों की तर्ज पर कमेटी का गठन किया जाना चाहिए। कमेटी की अनुशंसा और अनुमति के बाद ही हॉर्डिंग्स लगाई जानी चाहिए। आजकल शहरों में स्कूल, कोचिंग संस्थान और अन्य प्रतिष्ठान हर सरकारी और निजी भवनों को विज्ञापन स्थल का रूप दे रहे हैं। ये लोग बेतरतीब ढंग से अपने संस्थानों का प्रचार प्रसार करते हैं। देखा गया है कि ये लोग पैसा बचाने के चक्कर में बीच रोड पर और सड़क किनारे अवैध होर्डिंग लगाकर प्रचार प्रसार करते हैं। इनके विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। यदि अब भी समय रहते नहीं चेते तो निकट भविष्य में मुंबई में घटित घटना की पुनरावृत्ति को झेलने के लिए बेशक हमें तैयार रहना होगा।


janwani address 7

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी रद्द, गृह मंत्रालय ने दी स्वतंत्रता की जानकारी

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जलवायु...
spot_imgspot_img