- एक करोड़ का नुकसान, एयरकंडीशनर में लगी आग ने धारण किया विकराल रूप
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गर्मी के साथ आग लगने की घटनाएं भी बढ़ रही है। इसके चलते मेडिकल कॉलेज की गायनिक ओटी में लगे एयरकंडीशनर में ब्लॉस्ट होने के बाद आग लग गई। आग ने धीरे-धीरे विकराल रूप धारण कर पूरे वार्ड को चपेट में ले लिया। गनीमत ये रही कि जिस समय आग लगी ओटी में कोई महिला सर्जरी के लिए मौजूद नहीं थी। जबकि ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टॉफ इस हादसे में बाल-बाल बचा। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ी ने एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
शुक्रवार को एलएलआरएम कॉलेज की तीसरी मंजिल पर स्थित गायनिक ओटी में भीषण आग लग गई। बताया जा रहा है आग ओटी में लगे एयरकंडीशनर से शुरू हुई और पूरी ओटी को अपनी चपेट में ले लिया। घटना तीसरी मंजिल पर होने की वजह से मेडिकल के स्टॉफ को वहां पहुंचने में थोड़ा समय लगा। वहीं, मेडिकल प्रशासन की ओर से फायर ब्रिगेड को फोन कर आग लगने की सूचना दी गई, लेकिन फायर ब्रिगेड की गाड़ी को मौके पर पहुंचने में आधा घंटे का समय लगा। आग लगने के दौरान नाइट ड्यूटी पर कर रहे नर्सिंग स्टॉफ की शिफ्ट बदली जा रही थी। तभी आग लग गई, जिससे पूरी ओटी में काला धुंआ भर गया।

बताया जा रहा है नर्सिंग स्टॉफ ने किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाई। इस दौरान ओटी व उसके आसपास कमरों में रखा फर्नीचर व अन्य उपकरण जलकर राख हो गए। गायनिक ओटी की नर्सिंग स्टॉफ आफिसर मंजू सिंह ने बताया उन्हें सुबह साढ़े सात बजे स्टॉफ ने फोन कर आग लगने की सूचना दी। इसके बाद उन्होंने अपने स्टॉफ से कहा कि वह किसी भी तरह ओटी से बाहर निकल जाएं। बताया जा रहा है आग से गायनिक ओटी में लगे करीब एक करोड़ के उपकरण जलकर राख हो गए।
आग लगने के बाद बदले गए एक्सपायरी फायर उपकरण
मेडिकल कॉलेज में हर समय मरीजों का तांता लगा रहता है। यहां 24 घंटे मरीजों के इलाज की सुविधाएं है, जबकि इमरजेंसी, पीकू, नीकू, आर्थोपेडिक वार्ड समेत अधिकतर वार्डाे में मरीज भर्ती रहते हैं, लेकिन मेडिकल में पहले से लगे पुराने अग्निशमन यंत्र ही लगे हुए थे जो एक्सपायर हो चुके थे। शुक्रवार को लगी आग के बाद मेडिकल प्रशासन ने आनन-फानन में एक्सपायर उपकरणों को हटावाकर नए रिफिल किए उपकरण लगवाए।
सवाल यह उठता है कि जिस गायनिक ओटी में आग लगी क्या वहां पर रखे आग बुझाने के यंत्र काम कर रहे थे। यदि कर रहे थे तो उनका प्रयोग कर आग पर काबू पाने की कोशिश क्यों नहीं की गई? आधा घंटे तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी के आने का इंतजार क्यों किया गया। सबसे अहम सवाल ये है कि क्या मेडिकल प्रशासन अपने स्टॉफ को आग बुझाने के लिए प्रशिक्षित करता है।

